bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Hindi
/
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
/
1 Samuel 5
1 Samuel 5
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
← Chapter 4
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 6 →
1
पलिश्तियों ने परमेश्वर की मंजूषा पर कब्जा कर लिया। वे मंजूषा को एबन-एजर नगर से अश्दोद नगर ले गए।
2
तत्पश्चात् उन्होंने परमेश्वर की मंजूषा को उठाया, और उसको दागोन देवता के मन्दिर में पहुँचा दिया। उन्होंने मंजूषा को दागोन की मूर्ति के समीप खड़ा कर दिया।
3
दूसरे दिन सबेरे अश्दोद नगर के रहने वाले सोकर उठे। वे दागोन देवता के मन्दिर में गए। तब उन्होंने देखा कि दागोन देवता की मूर्ति प्रभु की मंजूषा के सामने औंधे मुँह भूमि पर पड़ी हुई है। अत: उन्होंने मूर्ति को उठाया, और उसे उसके स्थान पर फिर खड़ा कर दिया।
4
अगले दिन सबेरे वे सोकर उठे। उन्होंने देखा कि दागोन देवता की मूर्ति प्रभु की मंजूषा के सामने औंधे मुँह भूमि पर पड़ी हुई है। उसके सिर तथा दोनों हाथ कटे हुए देहरी पर पड़े हैं। मूर्ति का धड़ ही शेष रह गया है।
5
इस कारण दागोन देवता के पुरोहित तथा उसके मन्दिर में प्रवेश करने वाले उसकी देहरी पर आज तक अपने पैर नहीं रखते।
6
प्रभु का हाथ अश्दोद नगर के रहने वालों पर विकट रूप से उठा! प्रभु ने अश्दोद तथा उसके आस-पास के क्षेत्र में रहनेवालों को प्लेग की गिल्टियों से आतंकित तथा पीड़ित कर दिया।
7
जब अश्दोद के रहने वालों ने यह देखा तब उन्होंने कहा, ‘इस्राएल के परमेश्वर की मंजूषा हमारे साथ नहीं रहना चाहिए; क्योंकि उसका हाथ हमारे तथा हमारे दागोन देवता पर विकट रूप से उठा है।’
8
अत: उन्होंने दूत भेजे और पलिश्तियों के सामंतों को एकत्र किया। उन्होंने उनसे पूछा, ‘हमें इस्राएल के परमेश्वर की मंजूषा के साथ क्या करना चाहिए?’ सामंतों ने उत्तर दिया, ‘इस्राएल के परमेश्वर की मंजूषा को गत नगर भेज दो।’ अत: वे इस्राएल के परमेश्वर की मंजूषा को गत नगर ले गए।
9
परन्तु मंजूषा को गत नगर में लाने के बाद ही प्रभु का हाथ नगर पर उठा। नगर में बड़ी घबराहट फैल गई। प्रभु ने नगर के बच्चों से बूढ़ों तक सब को प्लेग-रोग से पीड़ित कर दिया। उनके शरीर में गिल्टियाँ निकल आईं।
10
इसलिए गत नगर के रहनेवालों ने परमेश्वर की मंजूषा एक्रोन नगर भेज दी। परन्तु जब परमेश्वर की मंजूषा एक्रोन नगर में आई, तब एक्रोन नगर के रहने वाले चिल्लाने लगे, ‘वे हमें और हमारे लोगों को मार डालने के लिए इस्राएल के परमेश्वर की मंजूषा को हमारे पास लाए हैं।’
11
अत: उन्होंने दूत भेजे, और पलिश्तियों के सामंतों को एकत्र किया। उन्होंने कहा, ‘आप लोग इस्राएल के परमेश्वर की मंजूषा को भेज दीजिए। यह अच्छा हो कि वह अपने स्थान को लौट जाए, और उसके कारण हम और हमारे लोग न मरें।’ समस्त नगर में मृत्यु-भय फैल गया था। वहाँ परमेश्वर का हाथ विकट रूप से उठा था।
12
जिन लोगों की मृत्यु नहीं हुई थी, वे गिल्टियों से पीड़ित थे। नगर की दुहाई स्वर्ग तक पहुँची।
← Chapter 4
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 6 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28
29
30
31