bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Hindi
/
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
/
Esther 4
Esther 4
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
← Chapter 3
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 5 →
1
जब ये बातें मोरदकय को मालूम हुईं तब उसने अपना शोक प्रकट करने के लिए अपने वस्त्र फाड़े, और शरीर पर राख डाली, तथा टाट के वस्त्र पहिनकर वह घर से बाहर निकला। वह नगर के बीच में खड़ा होकर रोता हुआ जोर-जोर से चिल्लाने लगा।
2
यहाँ तक कि वह राजमहल में प्रवेश-द्वार के सम्मुख भी पहुँचा, जबकि टाट के वस्त्र पहिनकर राजमहल के भीतर प्रवेश करना मना था।
3
साम्राज्य के प्रदेशों में, जहाँ-जहाँ सम्राट की राजाज्ञा तथा आदेश-पत्र पहुँचा, वहाँ-वहाँ यहूदी बहुत शोक करने लगे। उन्होंने सामूहिक उपवास किया, परमेश्वर के सम्मुख विलाप किया। वे रोए। अधिकांश यहूदी टाट के वस्त्र पहिनकर राख के ढेर पर बैठे रहे।
4
रानी एस्तर की सखियों और खोजों ने इन सब बातों की खबर उसको दी। रानी को अत्यन्त दु:ख हुआ। उसने मोरदकय के लिए वस्त्र भेजे ताकि वह उनको पहिने, और टाट-वस्त्र अपने शरीर से उतार दे। किन्तु मोरदकय ने उनको स्वीकार नहीं किया।
5
तब एस्तर ने हताख नामक एक खोजे को बुलाया। सम्राट क्षयर्ष ने हताख को रानी एस्तर की सेवा में नियुक्त किया था। एस्तर ने उसको मोरदकय के पास जाने का आदेश दिया कि वह मोरदकय से पूछे कि क्या बात है, और वह ऐसा क्यों कर रहा है।
6
हताख मोरदकय के पास नगर के चौराहे पर गया। यह स्थान राजमहल के प्रवेश-द्वार के सम्मुख था।
7
मोरदकय ने हताख को सब बताया जो उसके साथ हुआ था। उसने हामान के षड्यन्त्र के विषय में भी बताया कि उसने यहूदियों के विनाश के लिए कितना धन राजकीय कोष में जमा करने का वचन दिया है।
8
शूशन नगर में बसनेवाले यहूदियों का विनाश करने के लिए जो आदेश-पत्र भेजा गया था, उसकी एक प्रति भी मोरदकय ने हताख को दी ताकि वह एस्तर को दिखा दे, और उसका विवरण भी उसको बता दे। मोरदकय ने हताख के माध्यम से एस्तर को आदेश दिया कि वह अपनी कौम के भाई-बन्धुओं के प्राण बचाने के लिए सम्राट के पास जाए, और उससे अनुनय-विनय करे और उसके सम्मुख निवेदन करे।
9
हताख लौटा। उसने मोरदकय की बातें एस्तर को बताईं।
10
एस्तर ने हताख से बात की, और उसको मोरदकय के लिए यह सन्देश दिया:
11
‘महाराज के सब सेवक तथा साम्राज्य के सब प्रदेशों के निवासी यह बात जानते हैं कि जो स्त्री या पुरुष बिना बुलाए महल के अन्त:पुर में प्रवेश करेगा, उसके लिए केवल एक नियम है: प्राणदण्ड! यह नियम सब पर लागू है और केवल वह व्यक्ति प्राणदण्ड से बच सकता है जिसकी ओर महाराज अपने स्वर्ण राजदण्ड से संकेत करते हैं। मैं तीस दिन से महाराज के पास नहीं बुलाई गई हूँ।’
12
सन्देशवाहकों ने एस्तर का सन्देश मोरदकय को दिया,
13
किन्तु मोरदकय ने उनसे कहा कि वे एस्तर के पास लौट जाएं और उससे यह कहें: ‘तू अपने मन में यह मत सोच कि तू अन्य यहूदियों की अपेक्षा राजमहल में सुरक्षित है, और बच जाएगी।
14
यदि तू ऐसे संकट के समय में चुप रहेगी तो भी कहीं न कहीं से यहूदियों को सहायता प्राप्त हो जाएगी, और वे इस संकट से मुक्त हो जाएंगे, पर तू और तेरा पितृकुल नष्ट हो जाएगा। कौन जानता है, ऐसे ही संकट के समय अपनी कौम को बचाने के लिए तुझे यह राजपद प्राप्त हुआ है?’
15
मोरदकय के सन्देश के उत्तर में एस्तर ने सन्देशवाहकों से कहा कि वे मोरदकय को यह उत्तर दें:
16
‘जाओ, और शूशन नगर के सब यहूदियों को एकत्र करो, और मेरे लिए सामूहिक उपवास करो। तीन दिन और रात न भोजन करना, और न पानी पीना। तुम्हारे समान मैं भी अपनी सखियों के साथ उपवास करूंगी। तब मैं महाराज के पास जाऊंगी, यद्यपि ऐसा करना नियम के विरुद्ध होगा। यदि मुझे मरना ही पड़ेगा तो मैं मर जाऊंगी।’
17
यह सन्देश सुनकर मोरदकय चला गया, और उसने वैसा ही किया जैसा करने का आदेश एस्तर ने दिया था।
← Chapter 3
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 5 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10