bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Hindi
/
Hindi HSB 2023 (नवीन हिंदी बाइबल)
/
2 Corinthians 1
2 Corinthians 1
Hindi HSB 2023 (नवीन हिंदी बाइबल)
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 2 →
1
पौलुस की ओर से, जो परमेश्वर की इच्छा से मसीह यीशु का प्रेरित है, और भाई तीमुथियुस की ओर से परमेश्वर की उस कलीसिया के नाम जो कुरिंथुस में है, तथा सारे अखाया के सब पवित्र लोगों के नाम:
2
हमारे परमेश्वर पिता और प्रभु यीशु मसीह की ओर से तुम्हें अनुग्रह और शांति मिले।
3
धन्य है परमेश्वर और हमारे प्रभु यीशु मसीह का पिता, जो दयालु पिता और समस्त शांति का परमेश्वर है।
4
वह हमारे हर क्लेश में हमें शांति देता है, ताकि हम उस शांति के कारण जो हमें परमेश्वर से मिलती है, उन्हें भी शांति दे सकें जो किसी प्रकार के क्लेश में हों;
5
क्योंकि जैसे मसीह के दुःख हममें बहुतायत से हैं वैसे ही हमारी शांति भी मसीह के द्वारा बहुतायत से है।
6
यदि हम क्लेश सहते हैं, तो यह तुम्हारी शांति और उद्धार के लिए है; यदि हमें शांति मिलती है तो यह तुम्हारी शांति के लिए है, जिससे तुममें उन दुःखों को सहने का धीरज उत्पन्न हो जिन्हें हम भी सहते हैं।
7
तुम्हारे विषय में हमारी आशा दृढ़ है, क्योंकि हम जानते हैं कि जिस प्रकार तुम हमारे दुःखों में सहभागी हो, उसी प्रकार हमारी शांति में भी सहभागी हो।
8
हे भाइयो, हम नहीं चाहते कि तुम हमारे उस क्लेश से अनजान रहो जो आसिया में हमें सहना पड़ा था। हम ऐसे बोझ से दब गए थे जो हमारी सहनशक्ति से बाहर था, यहाँ तक कि हम जीवित रहने की आशा भी छोड़ चुके थे;
9
बल्कि हमें ऐसा लग रहा था मानो हम पर मृत्युदंड की आज्ञा हो चुकी हो। यह इसलिए था कि हम स्वयं पर नहीं बल्कि परमेश्वर पर भरोसा रखें जो मृतकों को जिलाता है।
10
उसी ने हमें ऐसी भयानक मृत्यु से बचाया और बचाएगा। हमने उस पर आशा रखी है कि वह हमें आगे भी बचाता रहेगा,
11
और तुम भी अपनी प्रार्थनाओं द्वारा हमारी सहायता करते रहोगे, ताकि हमारी ओर से बहुत से लोग उस अनुग्रह के लिए धन्यवाद करें जो बहुतों की प्रार्थनाओं द्वारा हमें मिला है।
12
यह हमारा गर्व अर्थात् हमारे विवेक की साक्षी है कि हमने इस संसार में, विशेषकर तुम्हारे प्रति, शारीरिक ज्ञान के अनुसार नहीं बल्कि परमेश्वर के अनुग्रह के अनुसार, भक्तिपूर्ण खराई और सच्चाई से आचरण किया है।
13
इसलिए जिन बातों को तुम पढ़ते और समझते भी हो, उन्हें छोड़ हम कुछ और नहीं लिख रहे हैं; और मैं आशा करता हूँ
14
कि जिस प्रकार तुमने हमें आंशिक रूप से समझा है उसी प्रकार पूर्ण रूप से यह समझ लोगे कि जैसे हम तुम्हारा गर्व हैं वैसे हमारे प्रभु यीशु के दिन में तुम भी हमारा गर्व ठहरोगे।
15
इसी भरोसे के साथ मैं पहले तुम्हारे पास आना चाहता था कि तुम्हें दूसरी बार आशिष प्राप्त हो,
16
अर्थात् यह कि तुम्हारे पास से होता हुआ मकिदुनिया जाऊँ और फिर मकिदुनिया से तुम्हारे पास आऊँ, और तुम्हारे द्वारा यहूदिया के लिए विदा किया जाऊँ।
17
जब मैंने ऐसा करना चाहा तो क्या मेरा मन अस्थिर था? या जो निर्णय मैं लेता हूँ, क्या वह शरीर के अनुसार लेता हूँ कि मैं “हाँ, हाँ” भी कहूँ और साथ ही “नहीं, नहीं” भी?
18
जिस प्रकार परमेश्वर विश्वासयोग्य है, उसी प्रकार तुम्हारे प्रति हमारे वचन में “हाँ” और “नहीं” दोनों एक साथ नहीं पाए जाते।
19
क्योंकि परमेश्वर का पुत्र यीशु मसीह, जिसका प्रचार तुम्हारे बीच हमारे द्वारा, अर्थात् मेरे, सिलवानुस और तीमुथियुस के द्वारा किया गया, वह ऐसा नहीं जो “हाँ” और “नहीं” दोनों हो, बल्कि उसमें “हाँ” ही है।
20
क्योंकि परमेश्वर की जितनी भी प्रतिज्ञाएँ हैं, वे उसमें “हाँ” ही “हाँ” हैं। इसलिए उसमें हमारे द्वारा “आमीन” भी परमेश्वर की महिमा के लिए होती है।
21
अब वह परमेश्वर ही है जो हमें तुम्हारे साथ मसीह में दृढ़ करता है, और जिसने हमारा अभिषेक किया है,
22
और हम पर मुहर भी लगाई है और बयाने के रूप में अपना आत्मा हमारे मनों में दिया है।
23
मैं परमेश्वर को अपने जीवन का साक्षी मानकर कहता हूँ कि तुम्हें दुःख से बचाने के लिए ही मैं फिर कुरिंथुस नहीं आया।
24
इसका अर्थ यह नहीं कि हम तुम्हारे विश्वास पर प्रभुता जताना चाहते हैं, बल्कि हम तुम्हारे आनंद के लिए तुम्हारे सहकर्मी हैं, क्योंकि विश्वास ही के द्वारा तुम स्थिर रहते हो।
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 2 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13