bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Hindi
/
Hindi HSB 2023 (नवीन हिंदी बाइबल)
/
2 Corinthians 9
2 Corinthians 9
Hindi HSB 2023 (नवीन हिंदी बाइबल)
← Chapter 8
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 10 →
1
यह आवश्यक नहीं कि जो सेवा पवित्र लोगों के लिए की जाती है उसके विषय में मैं तुम्हें लिखूँ,
2
क्योंकि मैं तुम्हारी उत्सुकता को जानता हूँ और मकिदुनिया के लोगों के सामने तुम्हारे विषय में गर्व करता हूँ कि अखाया के लोग पिछले वर्ष से तैयार हैं, और तुम्हारे उत्साह ने बहुतों को प्रेरित किया है।
3
परंतु मैं भाइयों को इसलिए भेज रहा हूँ कि इस विषय में तुम्हारे प्रति हमारा गर्व व्यर्थ न ठहरे, और यह कि तुम वैसे ही तैयार रहो, जैसा कि मैं कहता आया हूँ;
4
ऐसा न हो कि जब कुछ मकिदुनियावासी मेरे साथ आएँ और तुम्हें तैयार न पाएँ, तो इस भरोसे के कारण हमें (यह नहीं कहता कि “तुम्हें”) लज्जित होना पड़े।
5
इसलिए मैंने भाइयों से यह आग्रह करना आवश्यक समझा कि वे पहले से तुम्हारे पास आकर तुम्हारी उस उदार भेंट का प्रबंध कर लें जिसकी प्रतिज्ञा तुमने पहले से की थी; और यह भेंट उदारता से तैयार रहे न कि दबाव से।
6
स्मरण रखो, जो थोड़ा बोता है वह थोड़ा ही काटेगा और जो बहुत बोता है वह बहुत काटेगा।
7
प्रत्येक जन वैसा ही दान करे जैसा उसने अपने मन में निश्चित किया है, न तो अनिच्छा से और न ही विवश होकर; क्योंकि परमेश्वर हर्ष से देनेवाले से प्रेम रखता है।
8
परमेश्वर तुम्हें सब प्रकार का अनुग्रह बहुतायत से देने में समर्थ है, जिससे तुम सदैव हर बात में संपन्न रहो कि हर भले कार्य के लिए तुम्हारे पास बहुतायत से हो,
9
जैसा लिखा है: उसने बिखेरा, उसने दरिद्रों को दिया, उसकी धार्मिकता सदा बनी रहती है।
10
अब जो बोनेवाले को बीज और भोजन के लिए रोटी देता है, वही तुम्हें बीज देगा और उसे बढ़ाएगा और तुम्हारी धार्मिकता की उपज में वृद्धि करेगा।
11
तुम उस संपूर्ण उदारता के लिए हर बात में धनी किए जाओगे, जो हमारे द्वारा परमेश्वर के प्रति धन्यवाद उत्पन्न करती है;
12
क्योंकि यह सेवाकार्य न केवल पवित्र लोगों के अभावों को पूरा करता है, बल्कि परमेश्वर को बहुत धन्यवाद देने के द्वारा इसकी वृद्धि भी होती है।
13
इस सेवा को प्रमाण मानकर कि तुम अधीनता के साथ मसीह के सुसमाचार का अंगीकार करते हो तथा उनके और सब के लिए उदारता से दान देते हो, वे परमेश्वर की महिमा करेंगे;
14
और तुम पर हुए परमेश्वर के अपार अनुग्रह के कारण वे तुम्हारे लिए प्रार्थना करने के साथ-साथ तुम्हारी लालसा करेंगे।
15
परमेश्वर का उसके उस दान के लिए धन्यवाद हो, जो वर्णन से बाहर है!
← Chapter 8
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 10 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13