bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Chhattisgarhi
/
Chhattisgarhi
/
Job 15
Job 15
Chhattisgarhi
← Chapter 14
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 37
Chapter 38
Chapter 39
Chapter 40
Chapter 41
Chapter 42
Chapter 16 →
1
तब तेमान के रहइया एलीपज ह जबाब दीस:
2
“का बुद्धिमान मनखे बिगर सोचे-बिचारे जबाब दीही या गरम पूरबी पवन ले अपन पेट भरही?
3
का ओमन बेकार के गोठ ले बहस करहीं या बेमतलब के बात संग बहस करहीं?
4
पर तेंह परमेसर के आदर ला कम करथस अऊ परमेसर के भक्ति म बाधा डालथस।
5
तोर पाप ह तोर मुहूं ला गोठियाय बर उकसावत हे; तेंह चतुरामन के भासा म बातचीत करथस।
6
मेंह नइं, पर तोर खुद के मुहूं के गोठ ह तोला दोसी ठहिरात हे; तोर खुद के जीभ ह तोर बिरोध म गवाही देवत हे।
7
“का जम्मो मनखे म सबले पहिली तेंह जनमे? का परबतमन ले पहिली तोला बनाय गीस?
8
का तें परमेसर के सभा म बईठके सुनथस? का सिरिप तोरेच करा बुद्धि हवय?
9
तेंह अइसे का जानथस, जऊन ला हमन नइं जानन? तोर म अइसे कोन समझ के बात हवय, जऊन ह हमन म नइं ए?
10
पाके चुंदीवाला अऊ सियानमन हमर तरफ हवंय, अऊ त अऊ तोर ददा ले घलो जादा उमर के मनखेमन।
11
का परमेसर के ढाढ़स देवई, अऊ कहे गे कोमल बचन तोर बर परयाप्त नो हंय?
12
तोर मन ह तोला काबर आने कोति लेगत हे, अऊ रिस म तोर आंखीमन काबर चमकत हवंय,
13
कि तेंह अपन गुस्सा ला परमेसर के बिरोध म परगट कर अऊ अपन मुहूं ले अइसने बचन निकलन देय?
14
“मरनहार मनखे ह का अय कि ओह सुध हो सकय या माईलोगन ले जनमे मनखेमन कोन अंय कि ओमन धरमी हो सकंय?
15
यदि परमेसर ह अपन पबितर मनखेमन ऊपर भरोसा नइं करय, अऊ यदि स्वरगमन घलो ओकर नजर म सुध नइं अंय,
16
त फेर मरनहार मनखेमन के का हिसाब, जऊन मन दुस्ट अऊ भ्रस्ट अंय, अऊ अधरम के काम करे बर पीयासन रहिथें!
17
“मोर बात ला सुन अऊ मेंह तोला समझाहूं; मेंह तोला बतात हंव कि मेंह का देखे हंव,
18
ओ बात जऊन ला बुद्धिमान मनखेमन अपन पुरखामन ले पाय रिहिन, ओला बिगर छुपाय बताय हवंय,
19
(सिरिप पुरखामन ला देस दिये गे रिहिस जब कोनो परदेसी के ओमन के बीच म आना-जाना नइं रिहिस):
20
दुस्ट मनखे ह अपन जिनगी भर पीरा सहथे, अऊ निरदयी मनखे बर येह ओकर जिनगी भर बने रहिथे।
21
भयभीत करइया अवाज ओकर कान म गूंजत रहिथे; जब सब सही जान पड़थे, तभे बिनास करइयामन ओकर ऊपर आ जाथें।
22
ओला अंधियार म ले बच निकले के बिसवास नइं रहय; अऊ तलवार ले ओकर मारे जवई ह खचित ए।
23
ओह गिधवा के सहीं जेवन बर एती-ओती किंदरत रहिथे; ओह जानथे कि अंधियार के दिन ह तीरेच म हवय।
24
पीरा अऊ बिपत्ति के भय ले ओह भरे रहिथे; दुख-समस्या ले ओह बियाकुल रहिथे, जइसे कोनो राजा चढ़ई करे बर तियार हवय,
25
काबरकि ओह परमेसर के ऊपर मुक्का तानथे अऊ सर्वसक्तिमान परमेसर के बिरोध म अपन डींग मारथे,
26
अऊ ओकर बिरोध म उतावला होके एक मोटा अऊ मजबूत ढाल लेके ओकर ऊपर धावा बोलथे।
27
“हालाकि ओकर चेहरा म चरबी बड़ गे हवय अऊ ओकर कनिहां ह मांस भरे ले मोटा हो गे हवय,
28
पर ओह उजरे नगरमन म अऊ ओ घरमन म रहिही जिहां कोनो नइं रहंय, अऊ जिहां घर के दीवारमन कुटा-कुटा होके गिरथें।
29
ओह अऊ धनवान नइं रहिही अऊ ओकर धन बने नइं रहय, ओकर धन ह देस म नइं फईलही।
30
ओह अंधियार ले नइं बांच पाही; आगी के जुवाला ले ओकर पीकामन झुलस जाहीं, अऊ परमेसर के मुहूं के सांस ले ओह दूरिहा छिटक जाही।
31
ओह बेकार के बातमन म भरोसा करके अपनआप ला धोखा झन देवय, काबरकि ओकर बलदा म ओला कुछू नइं मिलय।
32
अपन समय के पहिली ओह मुरझा जाही, अऊ ओकर डारामन नइं बड़हीं।
33
ओह ओ अंगूर के नार सहीं होही जेकर कइंचा अंगूरमन झरके गिर जाथें, या ओह ओ जैतून रूख सहीं होही जेकर फूलमन झरके गिरत हवंय।
34
काबरकि भक्तिहीन के संगति म रहइया बिगर फर के होही, अऊ घूसखोरमन के डेरामन ला आगी ह भसम कर दीही।
35
ओमन समस्या खड़े करे के योजना बनाथें अऊ दुस्ट काम करथें; ओमन के मन म धोखाधड़ी के बिचार रहिथे।”
← Chapter 14
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 37
Chapter 38
Chapter 39
Chapter 40
Chapter 41
Chapter 42
Chapter 16 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28
29
30
31
32
33
34
35
36
37
38
39
40
41
42