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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1 Timothy 4
1 Timothy 4
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
परमेश्वरक आत्मा स्पष्ट कहैत छथि जे अन्तिम समय मे एहनो लोक सभ होयत जे सभ बहकाबऽ वला आत्मा सभ केँ आ दुष्टात्मा सभक शिक्षा सभ केँ मानि कऽ विश्वास त्यागि देत।
2
एहन शिक्षा ओहन झूठ बाजऽ वला कपटी लोक द्वारा आओत जकरा सभक विवेक धिपल लोहा सँ दगायल जकाँ सुन्न भऽ गेल छैक।
3
ओ सभ विवाह और कोनो-कोनो खयबाक वस्तु सभ सँ परहेज करबाक शिक्षा दैत अछि, जखन कि परमेश्वर एहि वस्तु सभक रचना एहि लेल कयलनि जे, सत्य केँ जानऽ वला आ विश्वास करऽ वला सभ द्वारा ई वस्तु सभ धन्यवादक संग ग्रहण कयल जाय।
4
परमेश्वरक सृष्टि कयल प्रत्येक वस्तु नीक अछि। कोनो वस्तु अस्वीकार कयल जाय जोगरक नहि होइत अछि, जँ ओकरा धन्यवादक संग स्वीकार कयल जाइत छैक तँ,
5
कारण, ओ परमेश्वरक कहल बात द्वारा आ प्रार्थना सँ पवित्र ठहराओल जाइत अछि।
6
ई सभ बात विश्वासी भाय सभ केँ अहाँ बुझाउ। एहि तरहेँ अहाँ मसीह यीशुक असली सेवक बनल रहब—एहन सेवक जिनकर भरण-पोषण विश्वासक सिद्धान्त सभ सँ आ ओहि नीक शिक्षा सभ सँ भेल होनि, जकर अहाँ पालन करैत आबि रहल छी।
7
परमेश्वर केँ अपमानित करऽ वला निरर्थक काल्पनिक कथा-पिहानी सभ सँ दूर रहू। तकर बदला मे परमेश्वर केँ पसन्द पड़ऽ वला भक्तिक जीवनक साधना मे लीन रहू।
8
शारीरिक साधना सँ किछु लाभ तँ अछि, मुदा भक्ति सँ असीमित लाभ अछि, किएक तँ ओ जीवनक आश्वासन दैत अछि इहलोक मे सेहो और परलोक मे सेहो।
9
ई एक सत्य बात अछि, जकर विश्वास सभ केँ करबाक चाही।
10
एहि कारणेँ अपना सभ परिश्रम करैत छी आ संघर्ष मे लागल रहैत छी; किएक तँ अपना सभ अपन आशा जीवित परमेश्वर पर रखने छी, जे सम्पूर्ण मनुष्य जातिक, आ विशेष रूप सँ विश्वासी सभक उद्धारकर्ता छथि।
11
अहाँ अपना उपदेश मे एही बात सभक शिक्षा और आदेश दैत रहू।
12
युवा अवस्थाक कारणेँ केओ अहाँ केँ तुच्छ नहि बुझओ, बरु बात-चीत, चालि-चलन, प्रेम, विश्वास आ पवित्रता मे विश्वासी सभक लेल अहाँ नमूना बनू।
13
जाबत धरि हम नहि आयब, ताबत धरि मण्डली केँ धर्मशास्त्र पढ़ि कऽ सुनाबऽ मे, विश्वासी सभ केँ उत्साहित करऽ मे, और शिक्षा देबऽ मे लीन रहू।
14
अहाँ अपन ओहि वरदानक उपयोग करू, जे अहाँ केँ ओहि समय मे भविष्यवाणी द्वारा देल गेल जखन मण्डलीक देख-रेख कयनिहारक समुदाय अहाँ पर हाथ रखलनि।
15
एहि बात सभक ध्यान राखू आ पूर्ण रूप सँ एहि मे लागि जाउ, जाहि सँ सभ लोक अहाँक आत्मिक उन्नति देखि सकय।
16
अहाँ एहि बात सभ मे दृढ़ बनल रहू। अहाँ जे करैत छी आ जे सिखबैत छी, दूनू पर विशेष ध्यान दिअ। एहि तरहेँ कयला सँ अहाँ अपनो लेल और अहाँक शिक्षा केँ सुननिहारो सभक लेल उद्धारक कारण होयब।
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