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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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2 Corinthians 5
2 Corinthians 5
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
कारण, अपना सभ जनैत छी जे जँ अपना सभक ई देहरूपी तम्बू, पृथ्वी पर अपना सभक ई डेरा, नष्ट होयत तँ परमेश्वरक दिस सँ अपना सभ केँ स्वर्ग मे एक देहरूपी भवन अछि—अनन्त काल तक रहऽ वला एक एहन “घर” जे मनुष्यक बनाओल नहि अछि।
2
ताबत अपना सभ एहि “तम्बू” मे कुहरैत अपन स्वर्गिक “भवन” केँ वस्त्र जकाँ धारण करबाक लेल लालाइत छी,
3
किएक तँ ओहि “वस्त्र” केँ धारण कयला पर अपना सभ नाङट नहि पाओल जायब।
4
वास्तव मे जाबत धरि अपना सभ एहि “तम्बू” मे छी, अर्थात्, एहि भौतिक शरीर मे, तँ बोझ सँ दबायल कुहरैत छी। कारण, अपना सभ एहि तम्बू केँ उतारऽ चाहैत छी, से बात नहि अछि, मुदा ओहि स्वर्गिक शरीर केँ उपर सँ धारण करऽ चाहैत छी जाहि सँ एहि मरणशील शरीरक स्थान पर अनन्त काल तक जीवित रहऽ वला प्राप्त करी।
5
जे अपना सभक रचना एही अभिप्राय सँ कयलनि से परमेश्वरे छथि आ ओ बेनाक रूप मे अपना सभ मे अपन पवित्र आत्मा वास करौने छथि।
6
एहि लेल हम सभ सदत साहस रखैत छी। हम सभ ई बुझैत छी जे जाबत धरि ई देह हमरा सभक घर अछि ताबत धरि हम सभ प्रभुक लग वला “घर पर” नहि छी।
7
हम सभ तँ आँखि सँ देखल बातक आधार पर नहि, बल्कि विश्वास पर चलैत छी।
8
हँ, हम सभ साहस रखैत छी आ एहि देह सँ अलग भऽ कऽ प्रभुक लग वला “घर पर” रहनाइ केँ सभ सँ उत्तम मानैत छी।
9
तेँ हम सभ चाहे एहि देह मे रही वा एकरा सँ अलग, हमरा सभक एकमात्र लक्ष्य ई अछि जे हम सभ हुनकर प्रसन्नताक अनुसार चलैत रही।
10
किएक तँ अपना सभ गोटे केँ मसीहक न्यायासनक सामने उपस्थित होमऽ पड़त जाहि सँ प्रत्येक व्यक्ति केँ अपना देहधारी जीवन मे कयल नीक अथवा अधलाह काज सभक प्रतिफल भेटैक।
11
हम सभ प्रभुक भय मानैत छी, तेँ लोक सभ केँ समझबैत-बुझबैत रहैत छी। हम सभ की छी से परमेश्वर स्पष्ट रूप सँ जनैत छथि आ हमरा आशा अछि जे अहाँ सभक मोन मे सेहो स्पष्ट अछि।
12
हम सभ फेर अहाँ सभक सामने अपन प्रशंसा नहि कऽ रहल छी, बल्कि अहाँ सभ केँ हमरा सभ पर गर्व करबाक मौका दऽ रहल छी जाहि सँ अहाँ सभ ओहन लोक केँ उत्तर दऽ सकिऐक जे सभ हृदयक भावना पर नहि, बल्कि बाहरी बात सभ पर गर्व करैत अछि।
13
की हम सभ “पागल” छी? जँ छीहो तँ ई परमेश्वरक लेल अछि। जँ हमरा सभक होश ठीक अछि तँ ई अहाँ सभक कल्याणक लेल अछि।
14
मसीहक प्रेम हमरा सभ केँ बाध्य करैत अछि, किएक तँ हम सभ बुझि गेल छी जे जखन एक गोटे सभक लेल मरलाह तँ सभ केओ मरि गेल।
15
मसीह सभक लेल मरलाह जाहि सँ जे सभ जीवित अछि से सभ आब अपना लेल नहि, बल्कि तिनका लेल जीवन बिताबय जे ओकरा सभक लेल मरलाह आ जिआओल गेलाह।
16
एहि लेल आब हम सभ कोनो मनुष्य केँ सांसारिक दृष्टि सँ नहि देखैत छी। पहिने हम सभ मसीहो केँ सांसारिक दृष्टि सँ देखैत छलहुँ मुदा आब हम सभ हुनका तेना नहि देखैत छी।
17
एकर अर्थ अछि जे जँ केओ मसीह मे अछि तँ ओ एक नव सृष्टि अछि। पुरान बात सभ समाप्त भऽ गेल, आब सभ किछु नव बनि गेल अछि।
18
ई सभ परमेश्वरक दिस सँ भेल। ओ मसीह द्वारा अपना संग हमरा सभक मिलाप करौने छथि आ हमरा सभ केँ मिलाप करयबाक सेवा-काजक जिम्मा देने छथि।
19
एकर अर्थ ई अछि जे परमेश्वर मनुष्य सभक अपराधक लेखा नहि लऽ कऽ मसीह मे अपना संग संसारक मिलाप करा रहल छलाह, आ हमरा सभ केँ एहि मिलापक सुसमाचार सुनयबाक जिम्मा दऽ देने छथि।
20
एहि लेल हम सभ मसीहक राजदूत छी, मानू जेना हमरा सभक द्वारा परमेश्वर अहाँ सभ सँ अनुरोध कऽ रहल छथि। तेँ हम सभ मसीहक दिस सँ अहाँ सभ सँ यैह अनुरोध कऽ रहल छी जे अहाँ सभ परमेश्वरक मेल-मिलाप केँ स्वीकार करू।
21
मसीह, जिनका मे कोनो पाप नहि छलनि, तिनका परमेश्वर हमरा सभक लेल पाप ठहरौलथिन जाहि सँ हम सभ हुनका द्वारा परमेश्वरक धार्मिकता ठहरी।
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