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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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2 Corinthians 8
2 Corinthians 8
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
यौ भाइ लोकनि, हम अहाँ सभ केँ ओहि कृपाक विषय मे सुनाबऽ चाहैत छी जे मकिदुनिया प्रदेशक मण्डली सभ केँ परमेश्वरक दिस सँ प्राप्त भेल अछि—
2
संकटक अग्नि-परीक्षा मे रहितो हुनका सभ मेहक उमड़ैत आनन्द आ हुनका सभक घोर गरीबी हुनका सभक मोन केँ एहन बना देलकनि जे ओ सभ पूरा तन-मन-धन सँ बेसी सँ बेसी दान देबाक लेल तैयार छलाह।
3
हम गवाही दैत छी जे ओ सभ अपने इच्छा सँ अपन क्षमताक अनुसार आ क्षमतो सँ बेसी देलनि।
4
ओ सभ हमरा सभ सँ बेर-बेर विनती करैत जोर देलनि जे हम सभ हुनको सभ केँ प्रभुक लोक सभक सहायता करऽ मे सहभागी होयबाक अवसर दियनि।
5
ओ सभ एहि बात मे हमरा सभक आशा सँ बढ़ि कऽ निकललाह। ओ सभ परमेश्वरक इच्छाक अनुसार सभ सँ पहिने परमेश्वरक प्रति, तखन हमरा सभक प्रति, अपना केँ समर्पित कऽ देलनि।
6
तेँ हम सभ तीतुस केँ अनुरोध कयलहुँ जे ओ जखन पहिनहि सँ अहाँ सभक बीच ई दान देबऽ वला काज शुरू करौने छलाह, तँ आब ओकरा पूरा करऽ मे सेहो अहाँ सभक सहायता करथि।
7
जहिना अहाँ सभ प्रत्येक बात मे आगाँ बढ़ल छी, अर्थात् विश्वास मे, बाजऽ मे, ज्ञान मे, पूर्ण समर्पणता मे आ हमरा सभक प्रति प्रेम मे, तहिना अहाँ सभ खुशी मोन सँ दान देबऽ मे सेहो आगाँ रहू।
8
हम अहाँ सभ केँ आदेश नहि दऽ रहल छी, बल्कि एहि बातक चर्चा कऽ कऽ जे दोसर लोक सभ दान देबाक लेल कोना तत्पर रहैत अछि ई जाँचऽ चाहैत छी जे अहाँ सभक प्रेम कतेक पक्का अछि।
9
किएक तँ अहाँ सभ अपना सभक प्रभु यीशु मसीहक कृपा केँ जनैत छी जे धनिक होइतो ओ अहाँ सभक लेल गरीब बनि गेलाह, जाहि सँ अहाँ सभ हुनकर गरीब बनला सँ धनिक बनि जाइ।
10
आब एहि विषय मे अहाँ सभक लेल की नीक होयत ताहि सम्बन्ध मे हम अपन सल्लाह दऽ रहल छी—एक वर्ष पहिने अहीं सभ दान देबहे मे नहि, बल्कि दान देबाक इच्छा करऽ मे सेहो सभ सँ पहिल छलहुँ।
11
एहि दान वला काज केँ आब पूरा कऽ लिअ, जाहि सँ जहिना इच्छा करऽ मे तत्पर छलहुँ तहिना अपन सामर्थ्यक अनुसार दान दऽ कऽ एहि काज केँ पूरो करी।
12
किएक तँ जँ केओ देबाक लेल इच्छुक अछि तँ ओकरा लग जे किछु छैक तकरा अनुसार दान ग्रहणयोग्य ठहराओल जयतैक, नहि कि तकरा अनुसार जे ओकरा लग नहि छैक।
13
हमर कहबाक तात्पर्य ई नहि जे, अहाँ सभ दोसर लोक केँ कष्ट सँ बचा कऽ अपने कष्ट मे पड़ि जाइ, बल्कि ई जे, सभ मे समानता होअय।
14
एहि समय मे अहाँ सभक सम्पन्नता हुनका सभक अभावक पूर्ति करत जाहि सँ कहियो हुनका सभक सम्पन्नता अहाँ सभक अभावक पूर्ति करय आ एहि तरहेँ समानताक स्थिति रहि सकय।
15
धर्मशास्त्रक लेख सेहो अछि जे, “जे अपना लेल बहुत जमा कयलक तकरा लग फाजिल नहि भेलैक, आ जे अपना लेल कनेके जमा कयलक तकरा अभाव नहि रहलैक।”
16
परमेश्वर केँ धन्यवाद होनि जे ओ तीतुसक हृदय मे सेहो अहाँ सभक लेल एहने चिन्ता रखने छथिन जेहन हमरा हृदय मे अछि।
17
किएक तँ ओ हमरा सभक अनुरोध खुशी-खुशी स्वीकारे नहि कयलनि, बल्कि अहाँ सभ लग उत्साहपूर्बक आ अपन इच्छा सँ जा रहल छथि।
18
हम सभ हुनका संग ओहि भाय केँ सेहो पठा रहल छी जे सुसमाचार सम्बन्धी काज मे विश्वासयोग्य रहबाक कारणेँ सभ मण्डली मे प्रशंसाक पात्र छथि।
19
एतबे नहि, बल्कि मण्डली सभ सेहो हुनका चुनने छनि जे ओ जमा कयल दान केँ पहुँचयबाक लेल हमरा सभक संग जाथि। हम सभ ई सेवा-काज एहन तरीका सँ करैत छी जाहि सँ प्रभुक महिमा आ हमरा सभक परोपकार करबाक उत्सुकता देखाइ देअय।
20
हम सभ एहि लेल एहन सावधानी रखैत छी जाहि सँ एहि बड़का दानक प्रबन्ध मे केओ हमरा सभ पर दोष नहि लगाबऽ पाबय।
21
किएक तँ हम सभ मात्र प्रभुएक दृष्टि मे नहि, बल्कि मनुष्य सभक दृष्टि मे सेहो ठीक सँ काज करबाक ध्यान रखैत छी।
22
एहि दूनू गोटेक संग हम सभ अपन एकटा आरो भाय केँ सेहो पठा रहल छी, जे कतेको बेर आ बहुतो बात मे अपन उत्साह प्रमाणित कयने छथि। अहाँ सभ पर हिनका बहुत भरोसा छनि तेँ हिनकर उत्साह आरो बढ़ल छनि।
23
तीतुसक विषय मे हम ई कहब जे ओ हमर सहयोगी छथि आ अहाँ सभक सेवा करऽ मे हमरा संग काज करैत छथि, और एहि भाय सभक विषय मे ई, जे ई सभ मण्डली सभक पठाओल प्रतिनिधि छथि आ हिनका सभक जीवन सँ मसीह केँ सम्मान होइत छनि।
24
एहि लेल अहाँ सभ हिनका सभ केँ अपन प्रेमक प्रमाण दिअ आ एहि बातक प्रमाण सेहो दिअ जे हम सभ अहाँ सभ पर कोन कारणेँ गर्व करैत छी, जाहि सँ मण्डली सभ ई बात बुझत जे हमर सभक गर्व सही आधार पर कयल गेल अछि।
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