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Luke 24
Luke 24
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
विश्राम-दिनक प्रात भेने, अर्थात् सप्ताहक पहिल दिन, भोरे-भोर ओ स्त्रीगण सभ अपन तैयार कयल सुगन्धित तेल सभ लऽ कऽ कबर पर गेलीह।
2
ओतऽ पहुँचला पर ओ सभ देखलनि जे कबरक मुँह पर जे पाथर राखल छलैक, से एक कात हटाओल गेल अछि।
3
मुदा ओ सभ जखन कबरक भीतर गेलीह तँ प्रभु यीशुक लास नहि देखलनि।
4
एहि पर ओ सभ सोच मे पड़ि गेलीह जे, ई की भेल? ताबते मे चमकैत वस्त्र पहिरने दू पुरुष हुनका सभ लग आबि ठाढ़ भऽ गेलनि।
5
ओ सभ डरेँ मूड़ी झुका कऽ नीचाँ मुँहें देखऽ लगलीह। ओ दूनू पुरुष हुनका सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ जीवित आदमी केँ मुइल सभ मे किएक ताकि रहल छियनि?
6
ओ एतऽ नहि छथि, जीबि उठल छथि! ओ गलील मे रहैत काल अहाँ सभ केँ की कहने रहथि, से मोन पाड़ू।
7
ई जे, मनुष्य-पुत्र केँ पापी सभक हाथ मे सौंपल जयनाइ, क्रूस पर चढ़ाओल जयनाइ और तेसर दिन जीबि उठनाइ आवश्यक छनि।”
8
तखन यीशुक ई कहल बात हुनका सभ केँ मोन पड़लनि।
9
कबर पर सँ घूमि आबि कऽ ओ सभ ई सभ बात एगारहो शिष्य केँ और आरो लोक सभ केँ सुनौलथिन।
10
जे स्त्रीगण सभ ई बात सभ मसीह-दूत लोकनि केँ सुनौलथिन, से ई सभ छलीह—मरियम मग्दलीनी, योअन्ना, याकूबक माय मरियम और हुनकर सभक आरो संगी सभ।
11
मुदा मसीह-दूत सभ केँ ई सभ बात बताहे वला बुझयलनि और ओ सभ विश्वास नहि कयलथिन।
12
तैयो पत्रुस उठि कऽ कबर पर दौड़ैत गेलाह। ओ निहुड़ि कऽ भीतर तकलनि तँ मात्र मलमल वला पट्टी सभ एक कात पड़ल देखलनि। एहि बात सँ आश्चर्यित होइत ओ घूमि अयलाह।
13
ओही दिन यीशुक संगी मे सँ दू व्यक्ति इम्माउस नामक गाम जा रहल छलाह, जे यरूशलेम सँ करीब चारि कोस दूर अछि।
14
ओ सभ बाट मे एहि बितल घटना सभक बारे मे अपना मे गप्प-सप्प कऽ रहल छलाह।
15
गप्प-सप्प और विचार-विमर्श करैत काल यीशु स्वयं हुनका सभक लग आबि संग-संग चलऽ लगलाह।
16
मुदा हुनका सभक नजरि तेना बन्द कयल गेल छलनि जे ओ सभ यीशु केँ नहि चिन्हि सकलथिन।
17
ओ हुनका सभ सँ पुछलथिन, “अहाँ सभ चलैत-चलैत अपना मे की गप्प-सप्प कऽ रहल छी?” ओ सभ उदास मोन सँ ठाढ़ भऽ गेलाह।
18
ओहि मेहक एक गोटे जिनकर नाम क्लियोपास छलनि, से यीशु केँ कहलथिन, “यरूशलेम मे अहींटा एहन प्रवासी होयब जकरा बुझल नहि छैक जे हाल मे की घटना सभ भेल!”
19
यीशु पुछलथिन, “कोन घटना सभ?” ओ सभ उत्तर देलथिन, “नासरत-निवासी यीशुक सम्बन्ध मे। ओ परमेश्वरक प्रवक्ता छलाह, और परमेश्वरक आ समस्त जनताक नजरि मे हुनकर काज और वचन सामर्थ्यपूर्ण छलनि।
20
मुख्यपुरोहित सभ और हमरा सभक महासभाक अधिकारी सभ हुनका मृत्युदण्ड दिअयबाक लेल राज्यपालक हाथ मे सौंपि देलथिन, आ क्रूस पर चढ़ा कऽ मरबा देलथिन।
21
हमरा सभ केँ तँ आशा छल जे यैह इस्राएल केँ छुटकारा दिऔताह। और एतबे नहि, एक बात आओर अछि—आइ तीन दिन भेल ई घटना सभ भेला,
22
और आइ हमर सभक किछु स्त्रीगण सभ हमरा सभ केँ आश्चर्यित कऽ देलनि। ओ सभ आइ भोरे-भोर कबर पर गेलीह
23
मुदा हुनकर लास हुनका सभ केँ नहि भेटलनि। ओ सभ आबि कऽ हमरा सभ केँ कहलनि जे एना-एना स्वर्गदूतक दर्शन भेल आ स्वर्गदूत कहलनि जे ओ जीविते छथि।
24
एहि पर हमरा सभक किछु संगी सभ कबर पर गेलाह, आ जहिना स्त्रीगण सभ कहने छलीह, तहिना हुनका सभ केँ सभ किछु भेटलनि, मुदा यीशु केँ ओ सभ नहि देखलनि।”
25
ओ हुनका सभ केँ कहलथिन, “अहाँ सभ कतेक निर्बुद्धि छी! प्रभुक प्रवक्ता लोकनिक सभ कथन पर अहाँ सभ विश्वास करबाक लेल किएक नहि तैयार भेलहुँ?
26
की मसीह केँ दुःख उठौलाक बादे अपना स्वर्गिक महिमा मे प्रवेश नहि करबाक छलनि?”
27
तखन यीशु मूसाक और अन्य प्रवक्ता सभक लेख सँ शुरू कऽ कऽ सम्पूर्ण धर्मशास्त्र मे अपना बारे मे लिखल बात सभ हुनका सभ केँ बुझाबऽ लगलथिन।
28
ताबते मे ओ सभ ओहि गाम लग पहुँचलाह जतऽ जयबाक छलनि, और यीशु एना देखौलथिन जेना ओ आगाँ जाय चाहैत होथि।
29
मुदा ओ सभ हुनका सँ बहुत आग्रह कयलनि जे, “देखू, साँझ पड़ऽ वला अछि, आब अन्हार होयत। हमरा सभक संग आइ रहि जाउ।” तखन यीशु हुनका सभक संग रहबाक लेल घरक भीतर गेलाह।
30
यीशु जखन हुनका सभक संग भोजन करबाक लेल बैसलाह तँ रोटी लेलनि, और परमेश्वर केँ धन्यवाद दऽ कऽ रोटी तोड़ि हुनका सभ केँ देबऽ लगलथिन।
31
तखन हुनका सभक नजरि खुलि गेलनि और ओ सभ हुनका चिन्हि लेलथिन। तकरबाद तुरत्ते यीशु बिला गेलाह।
32
तखन ओ सभ एक-दोसर केँ कहऽ लगलाह, “बाट मे चलैत काल ओ जखन अपना सभ सँ बात-चीत कयलनि आ धर्मशास्त्रक अर्थ बुझा देलनि, तँ अपना सभक हृदय आनन्द सँ केहन धक-धक करैत छल!”
33
ओ सभ तुरत्ते उठि कऽ यरूशलेम घूमि गेलाह। ओतऽ हुनका सभ केँ एगारहो शिष्य और अन्य संगी-साथी सभ एक ठाम जमा भेल भेटलथिन।
34
शिष्य सभ कहि रहल छलाह जे, “सत्ये अछि! प्रभु जीबि उठल छथि! ओ सिमोन केँ दर्शन देलनि अछि।”
35
तखन इहो दूनू गोटे हुनका सभ केँ बाट मे भेल बात सभक विषय मे कहि सुनौलथिन, आ कहलथिन, “ओ जखन रोटी तोड़लनि तखन हम सभ हुनका चिन्हि लेलियनि।”
36
ओ सभ ई बात सभ सुनबिते छलथिन कि यीशु स्वयं हुनका सभक बीच मे प्रगट भेलथिन और कहलथिन, “अहाँ सभ केँ शान्ति भेटय।”
37
ओ सभ हुनका भूत बुझि अकचका कऽ भयभीत भऽ गेलाह।
38
यीशु कहलथिन, “अहाँ सभ किएक घबड़ायल छी? मोन मे शंका किएक उठैत अछि?
39
हमर हाथ-पयर देखू। हमहीं छी! हमरा छुबि कऽ देखू! भूत-प्रेत केँ तँ एना हाड़-माँसु सभ नहि होइत छैक जेना अहाँ सभ हमरा देखि रहल छी।”
40
ई कहि ओ हुनका सभ केँ अपन हाथ-पयर देखौलथिन।
41
हुनका सभ केँ ततेक ने आनन्द भेलनि जे तखनो विश्वास नहि भेलनि, आश्चर्य मे डुबल छलाह। तेँ यीशु पुछलथिन, “की अहाँ सभ लग किछु खयबाक वस्तु अछि?”
42
ओ सभ हुनका पकाओल माछक कुटिआ देलथिन।
43
ओ लऽ कऽ हुनका सभक सामने खयलनि।
44
यीशु कहलथिन, “हम जखन अहाँ सभक संग छलहुँ तँ अहाँ सभ केँ ई कहने छलहुँ जे, मूसाक धर्म-नियम, प्रभुक प्रवक्ता सभक लेख और भजन-संग्रहक पुस्तक मे हमरा विषय मे जे किछु लिखल अछि, से सभ बात पूरा होयब आवश्यक अछि।”
45
तखन ओ हुनका सभ केँ धर्मशास्त्रक बात बुझबाक लेल बुद्धि देलथिन।
46
ओ हुनका सभ केँ कहलथिन, “धर्मशास्त्र मे ई लिखल अछि जे, उद्धारकर्ता-मसीह दुःख उठौताह आ तेसर दिन मृत्यु सँ जीबि उठताह,
47
और यरूशलेम सँ शुरू कऽ पृथ्वीक सभ जातिक लोक मे हुनकर नाम सँ एहि बातक प्रचार कयल जायत जे, अपना पापक लेल पश्चात्ताप कऽ हृदय-परिवर्तन करू आ पापक क्षमा प्राप्त करू।
48
अहाँ सभ एहि बात सभक गवाह छी।
49
हमर पिता अहाँ सभ केँ जे किछु देबाक वचन देलनि, से हम अहाँ सभ केँ आब पठा देब। मुदा जा धरि अहाँ सभ केँ ऊपर सँ सामर्थ्य प्राप्त नहि होयत, ता धरि अहाँ सभ एहि शहर मे रूकल रहू।”
50
यीशु हुनका सभ केँ बेतनिया गाम दिस लऽ गेलथिन, और अपन हाथ उठा कऽ हुनका सभ केँ आशीर्वाद देलथिन।
51
आशीर्वाद दैत काल ओ हुनका सभ सँ अलग भऽ गेलाह, और स्वर्ग मे उठा लेल गेलाह।
52
शिष्य सभ हुनकर आराधना कयलनि और अत्यन्त आनन्दक संग यरूशलेम घूमि अयलाह।
53
ओ सभ परमेश्वरक स्तुति-प्रशंसा करैत अपन सम्पूर्ण समय मन्दिर मे व्यतीत करऽ लगलाह।
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