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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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Philippians 1
Philippians 1
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
पौलुस आ तिमुथियुस, जे मसीह यीशुक दास सभ छथि, तिनका सभक दिस सँ फिलिप्पी नगर मे रहऽ वला परमेश्वरक सभ पवित्र लोक जे मसीह यीशु मे छथि, मण्डलीक जिम्मेवार लोकनि और मण्डली-सेवक सभ सेहो, तिनका सभक नाम मे ई पत्र।
2
अपना सभक पिता परमेश्वर आ प्रभु यीशु मसीह अहाँ सभ पर कृपा करथि और अहाँ सभ केँ शान्ति देथि।
3
जखन कखनो हम अहाँ सभक स्मरण करैत छी तँ हम अपना परमेश्वर केँ धन्यवाद दैत छियनि।
4
जखन अहाँ सभ गोटेक लेल प्रार्थना करैत छी तँ हरदम आनन्देक संग करैत छी,
5
किएक तँ अहाँ सभ पहिलुके दिन सँ लऽ कऽ एखन धरि शुभ समाचारक काज मे हमरा संग सहभागी छी।
6
हमरा एहि बातक निश्चयता अछि जे, जे परमेश्वर अहाँ सभ मे नीक काज शुरू कयने छथि, से मसीह यीशुक अयबाक दिन धरि ओकरा पूरा सेहो करताह।
7
अहाँ सभक प्रति हमर ई भावना ठीको अछि—अहाँ सभ तँ हमरा हृदय मे बसि गेल छी, किएक तँ हम चाहे जहलक भीतर मे छी वा बाहर शुभ समाचारक सत्यताक साक्षी दऽ रहल छी आ ओकर पुष्टि कऽ रहल छी, अहाँ सभ गोटे हमरा संग परमेश्वरक कृपा मे सहभागी छी।
8
परमेश्वर हमर गवाह छथि जे हमर हृदय अहाँ सभक प्रति मसीह यीशुक प्रेम सँ भरल अछि और अहाँ सभ गोटे केँ देखबाक लेल हमर मोन कतेक लागल रहैत अछि।
9
परमेश्वर सँ हमर प्रार्थना यैह अछि जे अहाँ सभक प्रेम सत्य-ज्ञान आ पूर्ण बुद्धि-विवेकक संग निरन्तर बढ़ैत जाय,
10
जाहि सँ अहाँ लोकनि सभ सँ उत्तम बात सभ चिन्हि ली आ मसीहक अयबाक दिन धरि निर्दोष आ शुद्ध मोनक रही
11
आ अहाँ सभक जीवन यीशु मसीह द्वारा उत्पन्न होमऽ वला धार्मिकता सँ भरल होअय, जाहि सँ परमेश्वरक सम्मान आ प्रशंसा होनि।
12
यौ भाइ लोकनि, हम अहाँ सभ केँ एहि बातक जानकारी दऽ देबऽ चाहैत छी जे हमरा पर जे बितल अछि ताहि सँ शुभ समाचारक प्रचार मे उन्नतिए भेल अछि,
13
एतऽ तक जे राज-महलक सम्पूर्ण सुरक्षा दल और आरो सभ लोकक बीच सेहो ई बात पसरि गेल अछि जे हम मसीहक प्रचार करबाक कारणेँ बन्दी बनाओल गेल छी।
14
हमरा बन्दी होयबाक कारणेँ अधिकांश मसीही भाय सभक मोन मे प्रभु पर भरोसा बढ़ि गेल छनि जाहि सँ ओ सभ आब पहिने सँ बेसी साहसक संग निडर भऽ कऽ परमेश्वरक वचन सुनबैत छथि।
15
किछु लोक हमरा सँ डाह कऽ कऽ विरोधक भावना सँ मसीहक प्रचार करैत छथि, से बुझैत छी, मुदा किछु लोक नीक भावना सँ।
16
ई लोक प्रेम सँ प्रचार करैत छथि, ई जानि जे हम शुभ समाचारक रक्षाक लेल एतऽ राखल गेल छी।
17
मुदा दोसर सभ शुद्ध मोन सँ नहि, स्वार्थ सँ मसीहक शुभ समाचार सुनबैत अछि, ई सोचि जे एहि तरहेँ हमरा लेल जहल मे कष्ट बढ़ा रहल अछि।
18
मुदा ताहि सँ की? कपट सँ होअय वा सदभाव सँ, मसीहक प्रचार सभ तरहेँ भऽ रहल अछि। हम एहि बात सँ आनन्दित छी। आ हम आनन्द मनबिते रहब,
19
किएक तँ हम जनैत छी जे अहाँ सभक प्रार्थना सभक द्वारा आ यीशु मसीहक आत्माक सहायता द्वारा एहि सभ बातक परिणाम ई होयत जे हमर छुटकारा भऽ जायत।
20
ई हमर एहि हार्दिक आशा आ अभिलाषाक अनुसार सेहो अछि जे हम कोनो बात मे लज्जित होयबाक जोगरक नहि बनी, बल्कि हमरा पूरा साहस रहय जाहि सँ जहिना हमरा जीवन सँ मसीहक आदर सदा होइत रहल अछि तहिना आब सेहो होइत रहओ, चाहे हम जीवित रही वा मरि जाइ।
21
हमरा लेल जीवित रहबाक अर्थ अछि मसीहक लेल जीनाइ, आ मरनाइ अछि लाभ।
22
मुदा जँ हम जीवित रही तँ फलदायक परिश्रम कऽ सकब। तखन हम कोन चुनी—जीनाइ वा मरनाइ, से नहि जनैत छी।
23
हम बड़का दुबिधा मे छी। मोन तँ होइत अछि जे एहि संसार केँ छोड़ि कऽ मसीह लग जा कऽ रही, जे शरीर मे जीवित रहनाइ सँ बहुत नीक अछि।
24
मुदा अहाँ सभक लेल बेसी आवश्यक ई अछि जे हम शरीर मे जीवित रही।
25
एहि बातक हमरा पूरा विश्वास अछि, आ तेँ हम जनैत छी जे हम जीवित रहब और अहाँ सभक संग रहब, जाहि सँ विश्वास मे अहाँ सभक आनन्द बढ़य और प्रगति होअय।
26
एहि तरहेँ जखन हम फेर अहाँ सभक ओतऽ आयब तँ मसीह यीशु हमरा लेल की सभ कयलनि, ताहि पर अहाँ सभ केँ आरो गर्व करबाक आधार भेटत।
27
मुदा जे किछु होअय, अहाँ सभ एक बातक ध्यान राखू—अहाँ सभक आचरण-व्यवहार मसीहक शुभ समाचारक योग्य होअय। एहि तरहेँ हम चाहे आबि कऽ अहाँ सभ सँ भेँट करी वा दूर रहि कऽ अहाँ सभक विषय मे सुनी, हमरा यैह पता चलय जे अहाँ सभ एक आत्मा मे स्थिर छी और एक मोनक भऽ कऽ एक संग मिलि कऽ ओहि विश्वासक लेल संघर्ष करैत छी जे शुभ समाचार पर आधारित अछि
28
आ अपन विरोधी सभ सँ कनेको डेरायल नहि छी। ई ओकरा सभक विनाशक, मुदा अहाँ सभक उद्धारक स्पष्ट प्रमाण अछि। और ई सभ बात परमेश्वरक दिस सँ अछि।
29
कारण, अहाँ सभ केँ ई वरदान देल गेल अछि जे अहाँ सभ मात्र मसीह पर विश्वासे नहि करी, बल्कि हुनका लेल कष्ट सेहो सही।
30
अर्थात्, अहूँ सभ ओहने संघर्ष मे लागल छी जेहन अहाँ सभ हमरा करैत देखलहुँ आ सुनैत होयब जे एखनो कऽ रहल छी।
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