bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Maithili
/
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
/
Philippians 3
Philippians 3
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
← Chapter 2
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 4 →
1
आब, यौ भाइ लोकनि, अहाँ सभ प्रभु मे आनन्दित रहू। अहाँ सभ केँ ई बात सभ दोहरा कऽ लिखऽ मे हमरा कोनो कष्ट नहि बुझाइत अछि, किएक तँ ई अहाँ सभक सुरक्षाक लेल हितकर अछि।
2
अहाँ सभ ओहि कुकुर सभ सँ होसियार रहू, हँ, ओहि अधलाह काज कयनिहार सभ सँ, ओहि अंग काट-कूट कयनिहार सभ सँ ⌞जे सभ सिखबैत अछि जे उद्धार पयबाक लेल खतना करौनाइ आवश्यक अछि।⌟
3
किएक तँ वास्तविक “खतना कयल लोक” तँ अपना सभ छी जे परमेश्वरक आत्मा द्वारा हुनकर आराधना करैत छी आ अपन मानवीय योग्यता पर भरोसा नहि रखैत छी, बल्कि मसीह यीशु पर गौरव करैत छी,
4
ओना तँ हम मानवीय योग्यता पर भरोसा राखि सकैत छलहुँ। जँ ककरो अपन मानवीय योग्यता पर भरोसा रखबाक आधार बुझाइत होइक तँ हमरा ओकरो सँ बेसी भऽ सकैत अछि—
5
जन्मक आठम दिन हमर खतना भेल। हम इस्राएलिए जातिक, बिन्यामीन कुलक, इब्रानी सँ जन्मल इब्रानी छी। धर्म-नियमक पालन करबाक दृष्टिकोण सँ हम एक फरिसी छलहुँ।
6
धर्मक प्रति हमर उत्साह एतेक छल जे हम मसीहक मण्डली पर अत्याचार करैत छलहुँ। आ धर्म-नियम पर आधारित धार्मिकताक दृष्टि सँ हमरा मे कोनो त्रुटी नहि छल।
7
मुदा जाहि बात सभ केँ हम लाभ बुझैत छलहुँ तकरा आब मसीहक कारणेँ हानि बुझैत छी।
8
एतबे नहि, बल्कि हम अपन प्रभु, मसीह यीशु केँ जानि लेनाइ सर्वश्रेष्ठ लाभ मानैत छी जकरा तुलना मे अन्य सभ बात केँ हानि बुझैत छी। हम हुनके लेल सभ किछु त्यागि देने छी, हँ, सभ केँ घृणाक वस्तु बुझैत छी, जाहि सँ हम ई लाभ उठाबी जे मसीह हमर बनि जाथि
9
आ हम हुनका मे पाओल जाइ। ई हमरा ओहि धार्मिकता सँ नहि होइत अछि जे धर्म-नियमक पालन कयला सँ मानल जाइत अछि, बल्कि ओहि धार्मिकता सँ जे मसीह पर विश्वास कयला सँ भेटैत अछि, अर्थात् ओहि धार्मिकता सँ जे मात्र विश्वासक आधार पर परमेश्वर सँ प्राप्त होइत अछि।
10
हँ, हम एही लेल सभ किछु त्यागि देने छी जाहि सँ हम मसीह केँ जानि ली, आ ओहि सामर्थ्यक अनुभव करी जकरा द्वारा ओ फेर जिआओल गेलाह, आ हुनकर दुःख भोगनाइ मे सहभागी बनि जाइ, और एहि तरहेँ जेहन ओ मृत्युक समय मे रहलाह तेहने हमहूँ बनी
11
जाहि सँ चाहे किछुओ होअय हमहूँ मृत्यु सँ जिआओल जा सकी।
12
हम ई नहि कहैत छी जे एखन तक हमरा एहि लक्ष्यक प्राप्ति भऽ गेल अछि वा हमरा सिद्धी भऽ चुकल अछि। मुदा हम आगाँ बढ़ैत जाइत रहैत छी जाहि सँ हम ओहि लक्ष्य केँ प्राप्त करी जाहि लक्ष्यक लेल मसीह यीशु हमरा अपन बना लेने छथि।
13
यौ भाइ लोकनि, हम नहि मानैत छी जे एखन तक हम ओहि लक्ष्य धरि पहुँचि गेल छी। मुदा हम एकटा काज करैत छी—जे पाछाँ अछि तकरा बिसरि कऽ आगाँ वला बातक लेल प्रयत्नशील रहैत छी।
14
हम ओहि लक्ष्यक दिस बढ़ैत जा रहल छी जाहि सँ हम ओ पुरस्कार प्राप्त कऽ सकी जकरा लेल परमेश्वर मसीह यीशु द्वारा हमरा स्वर्ग दिस बजौने छथि।
15
आब अपना सभ जे बुझऽ वला लोक छी, सभ केँ यैह मनोभावना होयबाक चाही आ जँ कोनो बात मे अहाँ सभ केँ दोसर विचार होअय तँ परमेश्वर तकरो अहाँ सभक लेल स्पष्ट करताह।
16
जे किछु होअय, अपना सभ जाहि स्तर धरि पहुँचि गेल छी ताहि अनुरूप आचरण करी।
17
यौ भाइ लोकनि, हम जेना करैत छी, तेना करऽ मे एक-दोसर केँ संग दिअ। हम अहाँ सभ केँ एक नमूना देलहुँ; ताहि अनुसार चलऽ वला लोक सभ पर ध्यान देने रहू,
18
किएक तँ हम अहाँ सभ केँ पहिने बेर-बेर कहि चुकल छी आ एखनो कानि-कानि कऽ कहैत छी जे एहन बहुत लोक सभ अछि जे सभ अपन आचरण द्वारा मसीहक क्रूसक दुश्मन बनैत अछि।
19
ओकरा सभक सर्वनाश निश्चित अछि। ओ सभ पेट केँ अपन ईश्वर बना लेने अछि आ एहन बात सभ पर गर्व करैत अछि जाहि पर लाज होयबाक चाहिऐक। ओ सभ सांसारिक वस्तु सभ पर मोन लगौने अछि।
20
मुदा अपना सभक नागरिकता तँ स्वर्गक अछि आ अपना सभ स्वर्ग सँ आबऽ वला मुक्तिदाताक बाट उत्सुकतापूर्बक तकैत रहैत छी, अर्थात्, प्रभु यीशु मसीहक।
21
हुनका सभ किछु केँ अपना अधीन कऽ लेबाक जे सामर्थ्य छनि, ताहि सामर्थ्य द्वारा ओ अपना सभक कमजोर मरणशील शरीर केँ बदलि कऽ अपन महिमामय शरीर जकाँ बना देताह।
← Chapter 2
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 4 →
All chapters:
1
2
3
4