bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Marwari
/
Marwari Bible
/
2 Timothy 3
2 Timothy 3
Marwari Bible
← Chapter 2
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 4 →
1
पण ओ याद राख की आखरी दिनां मांय कठिन वगत आवैला।
2
क्यूंकै मिनख मतलबी, लोभी, डींगमार, अभिमांनी, निंदा करणैवाळौ, मां-बाप री आग्या टाळणैवाळा, दया नीं करणैवाळौ, अपवितर,
3
परैम नीं राखणवाळौ, माफ नीं करणैवाळौ, दोसण लगाणैवाळौ, सहन नीं करणैवाळौ, कठोर, भलै रा बैरी,
4
विसवासघाती, लोफर, घमंडी, अर परमेसर रा कोनीं बल्कि सुख-विलास रा ही चाहनेवाळा होवैला।
5
वे भगती रौ रूप तो धारैला, पण उणरी सगति नै नीं मानैला। ऐड़ौ ऊं आगौ रैणौ।
6
इण मांय ऊं कीं गळत सिखाणवाळा लोग है जिकौ घरो मांय दबे पगां घुस आवै है, अर उण कमजोर लुगाईयां नै वस मे कर लेवे है जिकौ पापों ऊं दबी अर हरैक परकार री भूंडी इछाओ रै वस में है।
7
ऐ लुगाईयां हमेसां सीखती तो रैवै है पण सचाई री पिछांण तांई कदैई नीं पूगी।
8
ज्यौ यनैस अर यम्ब्रेस नै मूसा रौ विरोध किनो हो, व्यौंही ऐ गळत सिखाणवाळा लोग भी सचाई रौ विरोध करै है। ऐ ऐड़ा मिनख है, जिणरी बुद्धि भीस्ट हो गी है अर वे विसवास रै बारै मांय निकमे है।
9
पण वे इण ऊं आगै कोनीं बढ़ सकै, क्यूंकै ज्यूं यनैस अर यम्ब्रेस री नासमझ सगळै मिनखौ माथै परगट होय गी ही, व्यौंही इण गळत सिखाणवाळौ रौ भी हो जावैला।
10
पण थै म्हारी सिकसा, चाल-चलण, मनसा, विसवास, सहन करणै री ताकत, परैम, अर धीरज नै देख्यौ है। अर सताए जांणै, अर दुख उठाणै में थै म्हारौ साथ दियौ।
11
अर ऐड़ै दुखौ में भी जिकौ अन्ताकिया अर इकुनियुम अर लिस्तरा मे म्हारै माथै पड़िया हा, अर वळै दुखौ नै भी जिकौ म्हैं उठाया हा। पण परभु नै म्हनै उण सगळां ऊं छुड़ा लियौ।
12
पण जिता यीसु मसीह में भगती रै साथै जीवन बिताणौ चावै है वे सगळा सताया जावैला।
13
पण पापी अर ठग, धोखो देता होया अर धोखो खाता होया, बिगड़ता होया जावैला।
14
पण थूं उण बातां माथै जिकौ थूं सीखी है अर विसवास कियो है, ओ जांणनै मजबुत बण्यौ रै की थै उणै कीण लोगां ऊं सीख्यौ है।
15
अर बचपन ऊं पवितर सास्तर थारै जांण्योड़ो है, जिकौ थनै यीसु मसीह माथै विसवास करणै ऊं उद्धार प्राप्त करणै रै खातर बुद्धिमान बणा सकै है।
16
पूरौ पवितर सास्तर परमेसर री सामरथ ऊं रचियोड़ो है अर उपदेस, अर समझानै, अर सुधारनै, अर धरम री सिकसा रै खातर फायदेमंद है,
17
ताकी परमेसर रौ जन सिद्ध बणै, अर हरैक भलै कांम रै खातर तैयार रैवै।
← Chapter 2
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 4 →
All chapters:
1
2
3
4