bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Shekhawati
/
Shekhawati
/
Mark 4
Mark 4
Shekhawati
← Chapter 3
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 5 →
1
दरिआव क किनारै ईसु ओज्यु सीख देबा लाग्यो। अर बिकै च्यारूमेर घणीसारी भीड़ भेळी होगी। इ बजेऊँ बो दरिआव म खड़ी न्याव क मांयनै बेठगो अर लोग दरिआव किनारै खड़्या होगा।
2
ईसु बानै सीख देबाळी मिसाल म कई बाता सीखातो हो, अर बो बानै अंय्यां सीखायो क,
3
“सुणो, एक बार की बात ह एक किसान हो अर बो बीज बोबा ताँई गयो।
4
अर जद बो बीज बोबा लाग्यो, जणा क्युंक बीज गेला क सारै पड़्या अर चिड़कल्या बानै चूगलेगी।
5
अर क्युंक बीज कांकरा म पड़्या अर बानै चाए जत्ती माटी कोनी मिली जि बजेऊँ बे तावळाई निपज्या।
6
पण सूरज उगताई तावड़ीऊँ बळगा क्युं क बे जड़ कोनी पकड़्या।
7
अर क्युंक झाड़्या म जार पड़्या अर झाड़ी बाकै सागै बढर बानै दाब दिनी। जिऊँ बे कोनी फळ्या।
8
अर क्युंक बीज उपळी माटी म पड़्या अर उपज्या जिऊँ खूब पणप्या, अर बाऊँ तीसुणा साठुणा अर सो गुणा पैदावार होई।”
9
अर ईसु बानै बोल्यो, “जिकै कान ह बो बानै खोलल्यो।”
10
जद ईसु एकलो हो जणा बिका कनै का मिनख बा बारा चेला क सागै बिऊँ मिसाल क बारां म बुजबा लाग्या
11
ईसु बानै खेबा लाग्यो, “थानै तो परमेसर का राज को भेद खोलेड़ो ह पण दुसरा मिनखा ताँई तो सगळी बाता मिसाल देरई बोली ज्यावै ह।”
12
जणाई तो, “देखता-देखता बानै कोनी सुजै अर सुणता-सुणता कोनी समळै अर जणाई तो बे आपका हियानै कुगेलाऊँ कोनी बदलै अर परमेसर बानै माफ कोनी करै।”
13
ईसु बाऊँ बोल्यो, “आ मिसाल थारै पलै कोनी पड़ी जणा बाकी की मिसाला कंय्यां पलै पड़सी?
14
किसान जखो उगावै ह बो तो परमेसर को बचन ह।
15
जखा बीज गेला क मांयनै पड़्या अ बे लोग ह जखा बचन सुणै ह पण सेतान आर बि बचननै चुरा लेज्यावै ह।
16
जखा बीज कांकरा म पड़्या अ बे लोग ह जखा बचननै सुणी हीं अर बिनै राजी-पेटाऊँ मानी बी हीं
17
पण बो बचन बाकै हिया म जड़ कोनी पकड़ै जि बजेऊँ जद बापै दुख अर सताव आवै जणा बाको बिस्वास मर जावै ह।
18
जखा बीज झाड़्या क मांयनै बोया गया अ बे लोग ह जखा बचन सुणी।
19
पण जीबा को घ्यार, मो-माया को लालच अर मन की बुरी बाता बाका हिया मई बचननै दबा देवै ह, इ ताँई बे बीज फळै कोनी।
20
अर जखा बीज उपळी माटी म बोया गया अ बे लोग हीं जखा बचन सुणर बिनै मानी हीं अर बिकै गेल फळीं, जिऊँ बे तीसुणा, साठुणा, सोगुणा अर सो गुणाऊँ बी घणो फळ ल्यावीं।”
21
ईसु बाऊँ बोल्यो, “कोईनै दिओ जळार बिनै खाट अर कुंडा तळै म्हेलता देख्या हा के? पण बिनै आळ्या म म्हेलीं हीं जिऊँ बो सगळा कोठा म च्यानणो दे।
22
जोक्यु बी ओला म ह बो चोड़ा म ल्यायो जासी अर जोक्यु ढकेड़ो ह बिनै खोल्यो ज्यासी।
23
जिकै कान ह बो बानै खोलल्यो।”
24
बो बाऊँ बोल्यो गोर कर सुणज्यो, “जंय्यां थे लोगा क सागै करो हो बंय्यांई परमेसर थारै सागै करसी अर बिऊँ बी बेसी करसी।
25
जिकनै ह बिनै ओर दिओ जासी, अर जिकै कनै कोनी बिऊँ जोक्यु बिकन ह बो बी ले लिओ जासी।”
26
ईसु बोल्यो, “परमेसर को राज माटी म बीज बोवणिया मिनख की जंय्यां ह।
27
अर बो तो रातनै सोतो अर दिन म जागतो। अर कद बा बीजा म कुपळ आई अर कद बे बढ्या बिनै तो कोई बात की खबरई कोनी पड़ी।
28
माटी खुदई उपजावै पेल्या कुपळ आवै जिकै पाछै बाळी अर बाळ्या म खूब दाणा।
29
अर जद दाणा पक जावै ह जणा बो बेगोसो दांतळी लेर काटबा लागज्या क्युं क लावणी को टेम आ जावै ह।”
30
ईसु ओज्यु बोल्यो, “आपा परमेसर का राजनै किऊँ परगट कर सकां हां, अर बिनै किकी मिसाल देर समजा सकां हां?
31
ओ राई क दाणा की जंय्यां को ह जिनै माटी म बोयो जावै अर ओ दाणो सगळा बीजा मऊँ छोटो होवै।
32
पण जद इनै बोयो जावै जणा ओ दाणो उगबा क पाछै धरती का सगळा बोजा मऊँ बडो होज्यावै ह। इकी डाळ्यां अत्ती बडी होवै क अकास का पंछी बापै घुरस्ळो घालै।”
33
अंय्यां की मिसाल देर बो बानै बचन सुणाया करतो हो, अर बो बानै बाकी बुदी गेलई सीखातो हो।
34
बिना मिसाल देर क्युंई कोनी सीखातो हो पण जद बो आपका चेला क सागै एकलो होतो जणा बो बानै सगळी बाता को भेद समजाया करतो हो।
35
जनाड़ै आथण्या ईसु चेलानै बोल्यो, “आओ ल्यो आपा दरिआव क परलै-पार चालां।”
36
इ बजेऊँ बे भीड़नै बठैई छोडर ईसु जि न्याव म बेठ्यो हो बि न्याव मई बिनै लेर रवाना होया। बठै ओर बी न्याव ही।
37
बाकै रवाना होबा क पाछै जोरऊँ तौफान चालबा लाग्यो। अर दरिआव म झाल उठबा लागी अर न्याव क पछाड़ा मारबा लागी अर न्याव म पाणी भरबा लाग्यो।
38
पण ईसु न्याव क गेलड़ै नाकै सुत्यो हो। चेला बिनै जगाया अर बिऊँ बोल्या, “ओ गरूजी थानै क्युंई परवा कोनी के? म्हें डूबबाळा हां।”
39
ईसु खड़्यो होर तौफाननै दकाल्यो अर झालनै ओडायो, “थमज्या” अर तौफान थमग्यो अर बठै सक्यु स्यांत होगो।
40
अर ईसु बाऊँ बोल्यो, “थे क्याले डरो हो? थानै हालबी बिस्वास कोनी के?”
41
बे डरग्या अर आपसरी म बुजबा लाग्या, “ओ कूण ह? जिको खयो हवा अर पाणी बी मानै ह।”
← Chapter 3
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 5 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16