bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Urdu
/
Urdu DGV (किताब-ए मुक़द्दस)
/
Proverbs 17
Proverbs 17
Urdu DGV (किताब-ए मुक़द्दस)
← Chapter 16
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 18 →
1
जिस घर में रोटी का बासी टुकड़ा सुकून के साथ खाया जाए वह उस घर से कहीं बेहतर है जिसमें लड़ाई-झगड़ा है, ख़ाह उसमें कितनी शानदार ज़ियाफ़त क्यों न हो रही हो।
2
समझदार मुलाज़िम मालिक के उस बेटे पर क़ाबू पाएगा जो शर्म का बाइस है, और जब भाइयों में मौरूसी मिलकियत तक़सीम की जाए तो उसे भी हिस्सा मिलेगा।
3
सोना-चाँदी कुठाली में पिघलाकर पाक-साफ़ की जाती है, लेकिन रब ही दिल की जाँच-पड़ताल करता है।
4
बदकार शरीर होंटों पर ध्यान और धोकेबाज़ तबाहकुन ज़बान पर तवज्जुह देता है।
5
जो ग़रीब का मज़ाक़ उड़ाए वह उसके ख़ालिक़ की तहक़ीर करता है, जो दूसरे की मुसीबत देखकर ख़ुश हो जाए वह सज़ा से नहीं बचेगा।
6
पोते बूढ़ों का ताज और वालिदैन अपने बच्चों के ज़ेवर हैं।
7
अहमक़ के लिए बड़ी बड़ी बातें करना मौज़ूँ नहीं, लेकिन शरीफ़ होंटों पर फ़रेब कहीं ज़्यादा ग़ैरमुनासिब है।
8
रिश्वत देनेवाले की नज़र में रिश्वत जादू की मानिंद है। जिस दरवाज़े पर भी खटखटाए वह खुल जाता है।
9
जो दूसरे की ग़लती को दरगुज़र करे वह मुहब्बत को फ़रोग़ देता है, लेकिन जो माज़ी की ग़लतियाँ दोहराता रहे वह क़रीबी दोस्तों में निफ़ाक़ पैदा करता है।
10
अगर समझदार को डाँटा जाए तो वह ख़ूब सीख लेता है, लेकिन अगर अहमक़ को सौ बार मारा जाए तो भी वह इतना नहीं सीखता।
11
शरीर सरकशी पर तुला रहता है, लेकिन उसके ख़िलाफ़ ज़ालिम क़ासिद भेजा जाएगा।
12
जो अहमक़ अपनी हमाक़त में उलझा हुआ हो उससे दरेग़ कर, क्योंकि उससे मिलने से बेहतर यह है कि तेरा उस रीछनी से वास्ता पड़े जिसके बच्चे उससे छीन लिए गए हों।
13
जो भलाई के एवज़ बुराई करे उसके घर से बुराई कभी दूर नहीं होगी।
14
लड़ाई-झगड़ा छेड़ना बंद में रख़ना डालने के बराबर है। इससे पहले कि मुक़दमाबाज़ी शुरू हो उससे बाज़ आ।
15
जो बेदीन को बेक़ुसूर और रास्तबाज़ को मुजरिम ठहराए उससे रब घिन खाता है।
16
अहमक़ के हाथ में पैसों का क्या फ़ायदा है? क्या वह हिकमत ख़रीद सकता है जबकि उसमें अक़्ल नहीं? हरगिज़ नहीं!
17
पड़ोसी वह है जो हर वक़्त मुहब्बत रखता है, भाई वह है जो मुसीबत में सहारा देने के लिए पैदा हुआ है।
18
जो हाथ मिलाकर अपने पड़ोसी का ज़ामिन होने का वादा करे वह नासमझ है।
19
जो लड़ाई-झगड़े से मुहब्बत रखे वह गुनाह से मुहब्बत रखता है, जो अपना दरवाज़ा हद से ज़्यादा बड़ा बनाए वह तबाही को दाख़िल होने की दावत देता है।
20
जिसका दिल टेढ़ा है वह ख़ुशहाली नहीं पाएगा, और जिसकी ज़बान चालाक है वह मुसीबत में उलझ जाएगा।
21
जिसके हाँ अहमक़ बेटा पैदा हो जाए उसे दुख पहुँचता है, और अक़्ल से ख़ाली बेटा बाप के लिए ख़ुशी का बाइस नहीं होता।
22
ख़ुशबाश दिल पूरे जिस्म को शफ़ा देता है, लेकिन शिकस्ता रूह हड्डियों को ख़ुश्क कर देती है।
23
बेदीन चुपके से रिश्वत लेकर इनसाफ़ की राहों को बिगाड़ देता है।
24
समझदार अपनी नज़र के सामने हिकमत रखता है, लेकिन अहमक़ की नज़रें दुनिया की इंतहा तक आवारा फिरती हैं।
25
अहमक़ बेटा बाप के लिए रंज का बाइस और माँ के लिए तलख़ी का सबब है।
26
बेक़ुसूर पर जुरमाना लगाना ग़लत है, और शरीफ़ को उस की दियानतदारी के सबब से कोड़े लगाना बुरा है।
27
जो अपनी ज़बान को क़ाबू में रखे वह इल्मो-इरफ़ान का मालिक है, जो ठंडे दिल से बात करे वह समझदार है।
28
अगर अहमक़ ख़ामोश रहे तो वह भी दानिशमंद लगता है। जब तक वह बात न करे लोग उसे समझदार क़रार देते हैं।
← Chapter 16
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 18 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28
29
30
31