bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Urdu
/
Urdu DGV (किताब-ए मुक़द्दस)
/
Proverbs 19
Proverbs 19
Urdu DGV (किताब-ए मुक़द्दस)
← Chapter 18
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 20 →
1
जो ग़रीब बेइलज़ाम ज़िंदगी गुज़ारे वह टेढ़ी बातें करनेवाले अहमक़ से कहीं बेहतर है।
2
अगर इल्म साथ न हो तो सरगरमी का कोई फ़ायदा नहीं। जल्दबाज़ ग़लत राह पर आता रहता है।
3
गो इनसान की अपनी हमाक़त उसे भटका देती है तो भी उसका दिल रब से नाराज़ होता है।
4
दौलतमंद के दोस्तों में इज़ाफ़ा होता है, लेकिन ग़रीब का एक दोस्त भी उससे अलग हो जाता है।
5
झूटा गवाह सज़ा से नहीं बचेगा, जो झूटी गवाही दे उस की जान नहीं छूटेगी।
6
मुतअद्दिद लोग बड़े आदमी की ख़ुशामद करते हैं, और हर एक उस आदमी का दोस्त है जो तोह्फ़े देता है।
7
ग़रीब के तमाम भाई उससे नफ़रत करते हैं, तो फिर उसके दोस्त उससे क्यों दूर न रहें। वह बातें करते करते उनका पीछा करता है, लेकिन वह ग़ायब हो जाते हैं।
8
जो हिकमत अपना ले वह अपनी जान से मुहब्बत रखता है, जो समझ की परवरिश करे उसे कामयाबी होगी।
9
झूटा गवाह सज़ा से नहीं बचेगा, झूटी गवाही देनेवाला तबाह हो जाएगा।
10
अहमक़ के लिए ऐशो-इशरत से ज़िंदगी गुज़ारना मौज़ूँ नहीं, लेकिन ग़ुलाम की हुक्मरानों पर हुकूमत कहीं ज़्यादा ग़ैरमुनासिब है।
11
इनसान की हिकमत उसे तहम्मुल सिखाती है, और दूसरों के जरायम से दरगुज़र करना उसका फ़ख़र है।
12
बादशाह का तैश जवान शेरबबर की दहाड़ों की मानिंद है जबकि उस की मंज़ूरी घास पर शबनम की तरह तरो-ताज़ा करती है।
13
अहमक़ बेटा बाप की तबाही और झगड़ालू बीवी मुसलसल टपकनेवाली छत है।
14
मौरूसी घर और मिलकियत बापदादा की तरफ़ से मिलती है, लेकिन समझदार बीवी रब की तरफ़ से है।
15
सुस्त होने से इनसान गहरी नींद सो जाता है, लेकिन ढीला शख़्स भूके मरेगा।
16
जो वफ़ादारी से हुक्म पर अमल करे वह अपनी जान महफ़ूज़ रखता है, लेकिन जो अपनी राहों की परवा न करे वह मर जाएगा।
17
जो ग़रीब पर मेहरबानी करे वह रब को उधार देता है, वही उसे अज्र देगा।
18
जब तक उम्मीद की किरण बाक़ी हो अपने बेटे की तादीब कर, लेकिन इतने जोश में न आ कि वह मर जाए।
19
जो हद से ज़्यादा तैश में आए उसे जुरमाना देना पड़ेगा। उसे बचाने की कोशिश मत कर वरना उसका तैश और बढ़ेगा।
20
अच्छा मशवरा अपना और तरबियत क़बूल कर ताकि आइंदा दानिशमंद हो।
21
इनसान दिल में मुतअद्दिद मनसूबे बाँधता रहता है, लेकिन रब का इरादा हमेशा पूरा हो जाता है।
22
इनसान का लालच उस की रुसवाई का बाइस है, और ग़रीब दरोग़गो से बेहतर है।
23
रब का ख़ौफ़ ज़िंदगी का मंबा है। ख़ुदातरस आदमी सेर होकर सुकून से सो जाता और मुसीबत से महफ़ूज़ रहता है।
24
काहिल अपना हाथ खाने के बरतन में डालकर उसे मुँह तक नहीं ला सकता।
25
तानाज़न को मार तो सादालौह सबक़ सीखेगा, समझदार को डाँट तो उसके इल्म में इज़ाफ़ा होगा।
26
जो अपने बाप पर ज़ुल्म करे और अपनी माँ को निकाल दे वह वालिदैन के लिए शर्म और रुसवाई का बाइस है।
27
मेरे बेटे, तरबियत पर ध्यान देने से बाज़ न आ, वरना तू इल्मो-इरफ़ान की राह से भटक जाएगा।
28
शरीर गवाह इनसाफ़ का मज़ाक़ उड़ाता है, और बेदीन का मुँह आफ़त की ख़बरें फैलाता है।
29
तानाज़न के लिए सज़ा और अहमक़ की पीठ के लिए कोड़ा तैयार है।
← Chapter 18
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 20 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28
29
30
31