bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Urdu
/
Urdu UCVD (उर्दू हमअस्र तरजुमा)
/
Acts 24
Acts 24
Urdu UCVD (उर्दू हमअस्र तरजुमा)
← Chapter 23
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 25 →
1
पांचवें दिन के बाद आला काहिन हननयाह बाज़ बुज़ुर्गों और तिरतुलुस, नामी वकील के हमराह क़ैसरिया पहुंचा और सूबे के हाकिम के हुज़ूर में जा कर पौलुस के ख़िलाफ़ अपने इल्ज़ामात पेश किये।
2
जब पौलुस को हाज़िर किया गया तो तिरतुलुस ने उस पर इल्ज़ाम लगाते हुए कहा, “हम आप के बाइस बड़े अमन से ज़िन्दगी गुज़ार रहे हैं और आप ने अपनी दूर अन्देशी से बहुत सी इस्लाहात की हैं जिन से इस मुल्क को फ़ायदा पहुंचा है।
3
फ़ज़ीलत-मआब फ़ेलिक्स, हम हर जगह और हर वक़्त, आप की मेहरबानीयों की वजह से आप के शुक्रगुज़ार हैं।
4
लेकिन आप का ज़्यादा वक़्त लिये बग़ैर अर्ज़ करता हूं के मेहरबानी से हमारी मुख़्तसर सी दरख़्वास्त सुन लें।
5
“हम ने इस शख़्स को फ़साद बरपा करने वाला पाया है, ये दुनिया के सारे यहूदियों में फ़ित्ना अंगेज़ी करता फिरता है और नासरियों के बदनाम फ़िर्क़ा का सरग़ना बना हुआ है।
6
इस ने तो बैतुलमुक़द्दस को भी नापाक करने की कोशिश की। लिहाज़ा हम ने उसे पकड़ लिया।
7
लेकिन पलटन का सालार लिसियास इसे हमारे हाथों से ज़बरदस्ती छीन कर ले गया
8
आप उन की तहक़ीक़ात करेंगे तो आप को इन इल्ज़ामात की हक़ीक़त मालूम हो जायेगी जो हम ने पौलुस पर लगाये हैं। और हुक्म दिया के पौलुस के मुद्दई यहां आकर उन पर मुक़द्दमा दायर करें।”
9
दूसरे यहूदी भी उन से मुत्तफ़िक़ होकर कहने लगे, ये बातें बिलकुल सही हैं।
10
जब सूबे के हाकिम ने पौलुस को बोलने का इशारा किया, तो पौलुस ने जवाब दिया: “मुझे मालूम है के आप कई सालों से इस मुल्क का मुन्सिफ़ रहे हो; इसलिये मैं ख़ुशी से अपनी सफ़ाई पेश करता हूं।
11
आप ख़ुद पता लगा सकते हो के बारह दिन पहले मैं यरूशलेम में इबादत करने गया था।
12
मेरे मुद्दईयों ने मुझे बैतुलमुक़द्दस में किसी के साथ भी बहस करते या यहूदी इबादतगाहों में या इधर-उधर शहर में फ़साद बरपा करते नहीं देखा।
13
अब वह इन इल्ज़ामात को जो वह मुझ पर लगा रहे हैं, आप के सामने साबित नहीं कर सकते।
14
हां में ये इक़रार ज़रूर करता हूं के जिस मसीही अक़ीदे को वह बिदअत क़रार देते हैं उस के मुताबिक़ में अपने आबा-ओ-अज्दाद के ख़ुदा की इबादत करता हूं और जो कुछ तौरेत और नबियों के सहाइफ़ में लिख्खा है उन सब पर मेरा ईमान है।
15
में भी ख़ुदा से वोही उम्मीद रखता हूं जो ये रखते हैं के रास्तबाज़ों और बदकारों दोनों की क़ियामत होगी।
16
लिहाज़ा मेरी तो यही कोशिश रहती है के ख़ुदा और इन्सान दोनों के सामने मेरी नेकनियती बनी रहे।
17
“कई बरसों की गै़रहाज़िरी के बाद में अपनी क़ौम के लिये अतिये की रक़म और नज़्राने ले कर यरूशलेम आया था।
18
जब उन्होंने मुझे बैतुलमुक़द्दस में पाया तो मैं तहारत की रस्म अदा कर रहा था। मेरे साथ न तो कोई मज्मा था और न ही में कोई फ़साद बरपा कर रहा था।
19
हां, आसिया के चंद यहूदी ज़रूर वहां मौजूद थे। अगर उन्हें मुझ से कोई शिकायत थी तो वाजिब था के वह यहां हाज़िर होकर मुझ पर दावा करते।
20
ये लोग जो यहां मौजूद हैं बतायें के जब मैं मज्लिस आम्मा में पेश हुआ था तो उन्होंने मुझ में क्या जुर्म पाया था?
21
सिवाए इस एक बात के जो मैंने खड़े होकर बुलन्द आवाज़ से कही थी: ‘ये आज तुम्हारे सामने मुझ पर मुर्दों की क़ियामत यानी मुर्दे फिर से जी उठेंगे के बारे में मुक़द्दमा चिल्लाया जा रहा है।’ ”
22
तब फ़ेलिक्स ने जो मसीही अक़ीदे के बारे में बहुत कुछ जानता था, ये कह कर मुक़द्दमा मुल्तवी कर दिया। “जब पलटन का सालार लूसियास यहां आयेगा मैं तुम्हारे मुक़द्दमा का फ़ैसला करूंगा।”
23
इस ने फ़ौजी कप्तान से कहा के पौलुस को पहरा में आराम से रखा जाये और इस के दोस्तों में से किसी को भी इस की ख़िदमत करने से मना न किया जाये।
24
कुछ दिनों के बाद फ़ेलिक्स अपनी बीवी द्रुसिल्ला के साथ आया, जो यहूदी थी। उस ने पौलुस को बुला भेजा और ख़ुदावन्द अलमसीह ईसा पर ईमान की बाबत उस की बातें सुनीं।
25
जब पौलुस ने रास्तबाज़ी, परहेज़गारी और आने वाली अदालत के बारे में बयान किया तो फ़ेलिक्स डर गया और कहने लगा, “अभी इतना ही काफ़ी है! तो जा सकता है। मुझे फ़ुर्सत मिलेगी तो मैं तुझे फिर बुलवाऊंगा।”
26
साथ ही फ़ेलिक्स को ये भी उम्मीद थी के उसे पौलुस की जानिब से रिशवत मिलेगी, लिहाज़ा वह पौलुस को बार-बार बुलाता और उस के साथ गुफ़्तगू करता था।
27
पूरे दो बरस बाद, फ़ेलिक्स की जगह पुरकियुस फ़ेस्तुस सूबा का हाकिम मुक़र्रर हुआ, लेकिन फ़ेलिक्स ख़ुद को यहूदियों का मोहसिन साबित करने के लिये, वह पौलुस को क़ैद ही में छोड़ गया।
← Chapter 23
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 25 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28