bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Urdu
/
Urdu UCVD (उर्दू हमअस्र तरजुमा)
/
Colossians 1
Colossians 1
Urdu UCVD (उर्दू हमअस्र तरजुमा)
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 2 →
1
यह ख़त ख़ुदा की मर्ज़ी से अलमसीह ईसा के रसूल पौलुस और भाई तिमुथियुस की जानिब से,
2
कुलुस्से शहर के उन मुक़द्दस और अलमसीह में वफ़ादार साथी मोमिन भाईयों और बहनों के नाम लिख्खा हुआ ख़त: हमारे ख़ुदा बाप की तरफ़ से तुम्हें फ़ज़ल और इत्मीनान हासिल होता रहे।
3
जब हम तुम्हारे लिये दुआ करते हैं तो हमेशा अपने ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह के बाप यानी ख़ुदा का शुक्र अदा करते हैं,
4
क्यूंके हम ने सुना है के तुम ख़ुदावन्द अलमसीह ईसा पर ईमान रखते हो और सब मुक़द्दसीन से किस क़दर महब्बत करते हो।
5
तुम्हारा यह ईमान और महब्बत उस चीज़ की उम्मीद के सबब से है जो तुम्हारे लिये आसमान पर जमा कर के रख्खी हुई है और जिस का ज़िक्र तुम ने पहले ही उस इन्जील के बरहक़ कलाम में सुना था
6
ये पैग़ाम जो तुम्हारे पास पहुंच चुका है। ठीक उसी तरह पूरी दुनिया में फैल रहा और तरक़्क़ी कर रहा है, जिस तरह ये तुम्हारे दरमियान भी इसी दिन से काम कर रहा है जिस दिन तुम ने पहली मर्तबा उसे सुन कर ख़ुदा के फ़ज़ल की पूरी हक़ीक़त समझ ली थी।
7
तुम ने उस की तालीम हमारे अज़ीज़ हम ख़िदमत इपफ़्रास से सीखी, जो हमारी तरफ़ से तुम्हारे दरमियान अलमसीह का वफ़ादार ख़ादिम है।
8
इपफ़्रास ने हमें बताया के पाक रूह ने तुम्हारे अन्दर कैसी महब्बत पैदा की है।
9
इसलिये जिस दिन से हम ने आप लोगों से सब बातें सुनी हैं, हम भी तुम्हारे वास्ते ख़ुदा से बिला नाग़ा दुआ करते और दरख़्वास्त करने से बाज़ नहीं आते के तुम्हें ख़ुदा अपनी मर्ज़ी के इल्म से, रूहानी हिक्मत और समझ से मामूर कर दे जिसे पाक रूह मुहय्या करता है।
10
ताके तुम्हारी ज़िन्दगी ख़ुदावन्द के लाइक़ हो और ख़ुदावन्द को हर तरह से ख़ुश करने वाली हो: और सब नेक काम में फलदार बनो, और ख़ुदा के इल्म-ओ-इरफ़ान में बढ़ते चले जाओ,
11
तुम लोगों के लिये हमारी दुआ है के तुम ख़ुदा की जलाली क़ुदरत से मिलने वाली हर तरह की क़ुव्वत से मज़बूत होते जाओ ताके तुम में बेहद तहम्मुल और सब्र पैदा हो,
12
और ख़ुशी से ख़ुदा बाप का शुक्र करते रहो जिस ने तुम्हें नूर की बादशाही में अपने मुक़द्दस लोगों की मीरास में शामिल होने के लाइक़ बनाया,
13
ख़ुदा ने हमें तारीकी के क़ब्ज़े से छुड़ा कर अपने अज़ीज़ बेटे की बादशाही में दाख़िल किया है,
14
उसी अज़ीज़ बेटे के ज़रीये हमें मुख़्लिसी, यानी गुनाहों की मुआफ़ी मिली है।
15
इब्न-ए-ख़ुदा अनदेखे ख़ुदा की सूरत है और तमाम मख़्लूक़ात में पहलौठे हैं।
16
क्यूंके अलमसीह के वसीले से ख़ुदा ने सब कुछ ख़ल्क़ किया गया: चाहे वह चीज़ें आसमान की हों या ज़मीन की, नमूदार हों या पोशीदा, शाही तख़्त हों या उन की क़ुव्वतें, हुक्मरां हों या इख़्तियार वाले। सब चीज़ें अलमसीह के ज़रीये और उन ही के ख़ातिर पैदा हुई हैं।
17
वह सब चीज़ों में सब से पहले है और अलमसीह में ही सब चीज़ें क़ाइम है।
18
और वोही बदन यानी जमाअत का सर हैं। वोही पहले मुर्दों में से जी उठने वालों में पहलौठे हैं ताके सब चीज़ों में पहला दर्जा उन ही का हो।
19
क्यूंके ख़ुदा को यह पसन्द आया के ख़ुदा की सारी मामूरी अलमसीह में सुकूनत करे,
20
और अलमसीह के सलीब पर बहाए गये ख़ून के वसीले से, सब चीज़ों का चाहे वो आसमान की हों, या ज़मीन की, अपने साथ सुलह कर ले।
21
किसी वक़्त तुम ख़ुदा से बहुत दूर थे, और अपने ज़हनों में दुश्मनी रखकर बुरे कामों में मश्ग़ूल थे।
22
लेकिन अब उस ने अलमसीह की जिस्मानी मौत के वसीले से तुम्हारे साथ सुलह कर ली है ताके वह तुम्हें पाक, बेऐब और बेइल्ज़ाम बना कर अपने हुज़ूर में पेश करे।
23
बशर्ते के तुम अपने ईमान की पुख़्ता बुनियाद पर क़ाइम रहो, और उस ख़ुशख़बरी की उम्मीद को जिसे तुम ने सुना था, न छोड़ो, जिस की मुनादी आसमान के नीचे सारी मख़्लूक़ में की गई, और मैं पौलुस उसी का ख़ादिम बना।
24
अब तुम्हारी ख़ातिर दुख उठाना भी मेरे लिये ख़ुशी का बाइस है, क्यूंके मैं अपने जिस्म में अलमसीह की मुसीबतों की कमी को उस के बदन, यानी जमाअत की ख़ातिर पूरा कर रहा हूं।
25
ख़ुदा ने अपने कलाम को पूरे तौर पर तुम्हें मुनादी करने की ज़िम्मेदारी मेरे सुपुर्द की और मुझे अपनी जमाअत का ख़ादिम मुक़र्रर किया।
26
यानी वह राज़ जो तमाम ज़मानों और पुश्तों से पोशीदा रहा, लेकिन अब ख़ुदा के मुक़द्दसीन पर ज़ाहिर हुआ है।
27
जिन्हें ख़ुदा ने मुन्तख़ब किया के ग़ैरयहूदियों के दरमियान उस बेशक़ीमती और जलाली राज़ को ज़ाहिर करे, वो राज़ अलमसीह हैं जो जलाल की उम्मीद हैं, और तुम में बसे हुए हैं।
28
हम उसी अलमसीह की मुनादी करते, और कमाल दानाई से हर एक को नसीहत करते और तालीम देते हैं, ताके हर शख़्स को अलमसीह में कामिल कर के उसे ख़ुदा के हुज़ूर पेश कर सकें।
29
और इसी मक़सद मैं अलमसीह की उस अज़ीम क़ुव्वत के मुवाफ़िक़ जो मुझ में तासीर करती है, जांफ़िशानी से सख़्त मेहनत और जद्दोजहद करता हूं।
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 2 →
All chapters:
1
2
3
4