bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Urdu
/
Urdu UCVD (उर्दू हमअस्र तरजुमा)
/
Colossians 2
Colossians 2
Urdu UCVD (उर्दू हमअस्र तरजुमा)
← Chapter 1
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 3 →
1
मैं चाहता हूं के तुम जान लो के में न सिर्फ़ तुम्हारे लिये बल्के लौदीकिया शहर वालों के लिये, और उन तमाम मोमिनीन के लिये भी कितनी सख़्त जद्द-ओ-जहद कर रहा हूं और जिन लोगो से मैं ज़ाती तौर से नहीं मिला।
2
मेरी कोशिश ये है के उन की दिली हौसला अफ़्ज़ाई कर के आपसी महब्बत में एक किया जाये, ताके वो अक़्ल और दानिश की सारी दौलत पायें और ख़ुदा के राज़ को, जान लें यानी अलमसीह को,
3
अलमसीह में ही हिक्मत और इल्म-ओ-इरफ़ान के सब ख़ज़ाने पोशीदा हैं।
4
मैं यह इसलिये कहता हूं के कोई तुम्हें झूटी दलीलों से गुमराह न कर दे।
5
अगरचे मैं जिस्मानी तौर पर तुम से दूर हूं मगर रूहानी तौर पर तुम्हारे नज़दीक, और यह देखकर ख़ुश होता हूं के तुम कितनी मुनज़्ज़म ज़िन्दगी गुज़ारते हो, और तुम्हारा अलमसीह पर ईमान कितना पुख़्ता है।
6
पस जब तुम ने अलमसीह ईसा को अपना ख़ुदावन्द क़बूल कर लिया है, तो अलमसीह में ज़िन्दगी भी गुज़ारो,
7
अलमसीह में जड़ पकड़ते और तामीर होते जाओ, और जिस तरह तुम ने तालीम पाई है उसी तरह ईमान में मज़बूत रहो, और ख़ुदा की बेहद शुक्र गुज़ारी किया करो।
8
ख़बरदार, कोई शख़्स तुम्हें उन फ़ल्सफ़ियाना और पुर फ़रेब ख़्यालात का शिकार न बनाने पाये, जिन की बुनियाद अलमसीह पर नहीं बल्के इन्सानी रिवायतों और दुनियवी इब्तिदाई बातों पर है।
9
क्यूंके उलूहीयत की सारी मामूरी अलमसीह में मुजस्सम होकर सुकूनत करती है,
10
और तुम्हें अलमसीह की मामूरी में शरीक कर दिया गया है वोही हर तरह की हुक्मरानी और इख़्तियार वाले का सर हैं।
11
अलमसीह में तुम्हारा ऐसा ख़तना हुआ है जो इन्सानी हाथ का नहीं। बल्के अलमसीह के वसीले से तुम्हारी पुरानी गुनाह आलूदा इन्सानियत को तुम से जुदा कर दिया गया,
12
जब तुम पाक-ग़ुस्ल ले कर गोया अलमसीह के साथ दफ़न हो गये, और तुम ईमान के ज़रीये ज़िन्दा भी किये गये क्यूंके तुम ख़ुदा की उस क़ुदरत पर ईमान लाये, जिस ने अलमसीह को मुर्दों में से ज़िन्दा किया।
13
और तुम अपने गुनाहों और नामख़्तून जिस्मानी हालत की वजह से मुर्दा थे लेकिन ख़ुदा ने अलमसीह के साथ तुम्हें भी ज़िन्दा कर दिया। और उस ने हमारे सारे क़ुसूर मुआफ़ कर दिये,
14
और अहकाम के क़ानूनी दस्तावेज़ को जो हमारे ख़िलाफ़ लिखे गये थे, और हमें मुजरिम ठहराते थे उसे अलमसीह ने मौक़ूफ़ कर के सलीब पर कीलों से जड़ कर, हमारी नज़रों से दूर कर दिया।
15
और ख़ुदा ने रूहानी हुक्मरानों और इख़्तियार वालों से अिस्लाहः छीन कर उन का एलानिया तमाशा बनाया, और अलमसीह ने सलीब के सबब से उन पर ज़फ़रयाबी का शादयाना बजाया।
16
पस किसी को मौक़ा न दो के वह खाने-पीने, मज़हबी त्योहार मनाने, नये चांद और सबत मनाने के बारे में तुम्हें क़ुसूरवार ठहराये।
17
ये सब चीज़ें तो सिर्फ़ मुस्तक़बिल में आने वाली हक़ीक़त का साया हैं; मगर, अलमसीह तो ख़ुद ही हक़ीक़त हैं।
18
अगर कोई शख़्स ज़ाहिरी ख़ाकसारी और फ़रिश्तों की इबादत करने से ख़ुश होता है। ऐसा शख़्स बड़ी तफ़्सील से अपनी रोयाओं में देखी हुई चीज़ों का बयान करता है; और अपनी ग़ैर रूहानी अक़्ल पर बेफ़ाइदा फूल जाता है।
19
वह शख़्स सर यानी अलमसीह से अपना तअल्लुक़ खो बैठता है जिस से सारा बदन जोड़ों और पठ्ठों के वसीले से परवरिश पा कर, और बाहम पेवस्ता होकर, ख़ुदा की मर्ज़ी के मुताबिक़ बढ़ता चला जाता है।
20
जब तुम अलमसीह के साथ इस दुनिया की रूहानी क़ुव्वतों के लिये, मर चुके हो तो अब दुनियादारों की तरह, ज़िन्दगी क्यूं गुज़ारते हो? गोया तुम अभी भी दुनिया के अहकाम के ताबे हो मसलन:
21
“इसे हाथ न लगाना! उसे न चखना! और उसे न छूना?”
22
यह उसूल सिर्फ़ इन्सानी अहकाम और तालीमात हैं और यह सारी चीज़ें इस्तिमाल होकर फ़ना हो जाती हैं।
23
यह ख़ुद साख़ता इबादत, क़ाइदे और क़ानून ज़ाहिर में तो माक़ूल लगते हैं, क्यूंके इन में जिस्मानी रियाज़त और ज़ाहिरी फ़िरोतनी पर ज़ोर दिया गया, मगर जिस्मानी ख़ाहिशों पर क़ाबू पाने में इन से कोई मदद नहीं मिलती।
← Chapter 1
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 3 →
All chapters:
1
2
3
4