bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Urdu
/
Urdu UCVD (उर्दू हमअस्र तरजुमा)
/
James 1
James 1
Urdu UCVD (उर्दू हमअस्र तरजुमा)
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 2 →
1
याक़ूब की जानिब से जो ख़ुदा का और ख़ुदावन्द ईसा अलमसीह का ख़ादिम है, इस्राईल के बारह क़बीलों को जो तमाम जगहों में बिखरे हुए हैं, सलाम पहुंचे।
2
मेरे भाईयो और बहनों! जब तुम तरह-तरह की आज़माइशों का सामना करते हो, तो इसे बड़ी ख़ुशी की बात समझो
3
क्यूंके तुम जानते हो के तुम्हारे ईमान का इम्तिहान तुम्हारे अन्दर सब्र पैदा करता है।
4
सब्र को अपना पूरा काम करने दो ताके तुम अपने ईमान में पुख़्ता और कामिल हो जाओ और तुम में किसी बात की कमी न रहे।
5
अगर तुम में से किसी में हिक्मत की कमी हो तो वह ख़ुदा से मांगे जो सब को बग़ैर मलामत किये फ़य्याज़ी से देता है और तुम्हें भी अता फ़रमायेगा।
6
मगर ईमान के साथ मांगे और ज़रा शक न करे, क्यूंके शक करने वाला समुन्दर की लहर की मानिन्द होता है जो हवा के ज़ोर से बहती और उछलती रहती है।
7
ऐसा शख़्स यह न समझे के उसे ख़ुदावन्द से कुछ मिलेगा।
8
इसलिये के वह शख़्स दो दिला है और अपने किसी काम में मुस्तक़िल नहीं।
9
जो मोमिनीन पस्त हाली में हैं उन्हें अपने आला मर्तबा पर फ़ख़्र करना चाहिये।
10
मगर दौलतमन्द को अपने अदना मर्तबा पर फ़ख़्र करना चाहिये क्यूंके दौलतमन्द जंगली फूल की तरह मुरझा कर ख़त्म हो जायेगा।
11
क्यूंके सूरज तुलूअ होते ही सख़्त धूप लगती है और पौदे को सुखा देती है। और उस का फूल झड़ जाता है और उस की तमाम ख़ूबसूरती ख़त्म हो जाती है। इसी तरह दौलतमन्द की ज़िन्दगी भी इस के कारोबार के दौरान फ़ना हो जायेगी।
12
मुबारक है वो आदमी जो आज़माइश के वक़्त सब्र से काम लेता है, क्यूंके जब मक़्बूल ठहरेगा तो ज़िन्दगी का ताज पायेगा जिस का ख़ुदावन्द ने अपने महब्बत करने वालों से वादा किया है।
13
जब किसी को आज़माया जाये तो, वो ये न कहे, “मेरी आज़माइश ख़ुदा की तरफ़ से हो रही है।” क्यूंके न तो ख़ुदा बदी से आज़माया जा सकता है और न वो किसी को आज़माता है।
14
मगर हर शख़्स ख़ुद अपनी ही ख़ाहिशों में खिंच कर और फंस कर आज़माया जाता है।
15
फिर ख़ाहिश हामिला होकर गुनाह को पैदा करती है और गुनाह अपने शबाब पर पहुंच कर मौत को ख़ल्क़ करता है।
16
ऐ मेरे प्यारे भाईयों और बहनों! फ़रेब मत खाओ।
17
हर अच्छी नेमत और कामिल तोहफ़ा आसमान से और नूरों के बाप की तरफ़ से ही नाज़िल होता है। वो साया की तरह घटता या बढ़ता नहीं बल्के लातब्दील है।
18
उस ने अपनी मर्ज़ी से हमें कलामे हक़ के वसीले से पैदा किया ताके उस की मख़्लूक़ात में से हम गोया पहले फल हों।
19
ऐ मेरे अज़ीज़ भाईयों और बहनों! इस बात का ख़्याल रखना के हर आदमी सुनने में तेज़ और बोलने और ग़ुस्सा करने में धीमा हो।
20
क्यूंके इन्सान का ग़ुस्सा वो रास्तबाज़ी पैदा नहीं करता जो ख़ुदा चाहता है।
21
चुनांचे अपनी ज़िन्दगी की सारी नापाकी और बदी की सारी गंदगी को दूर कर के उस कलाम को हलीमी से क़बूल कर लो जो तुम्हारे दिलों में बोया गया है और जो तुम्हें नजात दे सकता है।
22
सिर्फ़ कलाम के सुनने वाले न बनो। बल्के कलाम पर अमल करने वाले बनो। वर्ना तुम ख़ुदी को फ़रेब दे रहे हो।
23
क्यूंके जो कोई कलाम को सुनता है लेकिन उस पर अमल नहीं करता वो उस आदमी की मानिन्द है जो आईने में अपनी सूरत देखता है।
24
और ख़ुद को देखकर चला जाता है और फ़ौरन भूल जाता है के वो कैसा दिखाई देता है।
25
लेकिन जो शख़्स आज़ाद करने वाली कामिल शरीअत का गहराई से ग़ौर करता और उस पर क़ाइम रहता है तो वो सुन कर भूलने वाला नहीं बल्के उस पर अमल करने वाला है। ऐसा शख़्स अपने हर काम में बरकत पायेगा।
26
अगर कोई शख़्स अपने आप को दीनदार समझता है मगर फिर भी अपनी ज़बान को क़ाबू में नहीं रखता तो वो अपने आप को धोका देता है। और उस का दीन फ़ुज़ूल है।
27
हमारे ख़ुदा बाप की नज़र में हक़ीक़ी और बेऐब दीनदारी ये है के मुसीबत के वक़्त यतीमों और बेवाओं की ख़बर लें और अपने आप को दुनिया से बेदाग़ रखें।
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 2 →
All chapters:
1
2
3
4
5