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1
एह पइ नामात प्रदेस क सोपर जवाब दिहस।
2
“अय्यूब, धियान दया। मइँ परेसानी मँ हउँ। यह बरे मइँ हाली तोहका बताएउँ क कि मइँ का सोचत हउँ।
3
तोहार आलोचना हमार अपमान करत हीं। मुला मइँ बुद्धिमान हउँ अउर जानत हउँ कि तोहका कइसे जवाब दीन्ह जाइ चाही।
4
“एका तू तब स जानत ह जब बहोत पहिले लोगन क धरती पइ पठवा ग रहा, दुट्ठ मनई क आनन्द बहोत दिन नाहीं टिकत ह। अइसा मनई जेका परमेस्सर क चिन्ता नाहीं अहइ उ तनिक समइ बरे आनन्द मँ भरि जात ह।
6
चाहे दुट्ठ मनई क अपमान अकासे तलक छू जाइ।
7
उ आपन तने क मल क नाई नस्ट होइ जाइ। उ सबइ लोग जउन ओका जानत हीं कइहीं, ‘उ कहाँ अहइ?’
8
उ अइसे बिलाइ जाइ जइसे सपन हाली ही कहूँ उड़ जात ह। फिन कबहुँ कउनो ओका लखि नाहीं सकी, उ नस्ट होइ जाइ, ओका राति क सपना क तरह हाँक दीन्ह जाइ।
9
उ सबइ मनई जउन ओका लखे रहेन फुन कबहुँ नाहीं लखेन। ओकर परिवार फुन कबहुँ ओका नाहीं लखि पाइ।
10
जउन कछू भी उ (दुट्ठ) गरीबन स लिहे रहा ओकार संतानन चुकइहीं। ओनका आपन हीं हाथन स धन लौटाए होइ।
11
जब उ जवान रहा, ओकर सरीर मजबूत रही, मुला उ हाली ही धूलि होइ जाइ।
12
“दुस्ट क मुहँ क दुस्टता बड़ी मीठी लागत ह, उ ओका आपन जिभिया क खाले छुपाइ लेइ।
13
बुरा मनई उ बुराई क थामे रही, ओकर दूर होइ जाब ओका कबहुँ नाहीं भाई, तउ उ ओका आपन मुँहे मँ थामे रही।
14
मुला ओकरे पेटे मँ ओकर भोजन जहर बन जाइ, उ ओकरे भीतर अइसे बन जाइ जइसे कउनो नाग क विख सा कडुवा जहर।
15
दुस्ट धन दौलत क लील जात ह मुला उ ओन सबका बाहेर उगिली। परमेस्सर दुस्ट क पेटे स ओन सबका उगालिवाइ।
16
दुस्ट मनई क विख चुसब साँपे क नाई होइ। मुला साँपे क विसैला जीभ ओका मारि डइहीं।
17
मुला दुस्ट मनई लखइ क आनन्द नाहीं लेइहीं अइसी ओन नदियन क जउन सहद अउर मलाई बरे बहा करत ह।
18
दुट्ठ क ओकर लाभ वापिस करइ क दबावा जाइ। ओका ओन चिजियन क आनन्द नाहीं लेइ दीन्ह जाइ जेनके बरे उ मेहनत किहे अहइ।
19
कहेकि उ दुस्ट मनई दीन मनई क चिन्ता नाहीं किहस। बलकि, उ दूसर लोगन क घरन क भी लइ लिहस जेका उ पचे आपन बरे बनाएस रहा।
20
“दुस्ट मनई कबहुँ संतुट्ठ नाहीं होत ह। उ आपन सबहिं धन क लइ ले जात ह।
21
जब उ खात ह तउ कछू नाहीं तजत ह, तउ ओकर कामयाबी बनी नहीं रही।
22
जब दुस्ट जन क लगे भरपूर होइ तबहिं ओन पइ विपत्ती आइहीं अउर उ कस्ट क अनुभव करिहीं।
23
दुस्ट जन उ सब कछू खाइ चुकी जेका उ खाइ चाहत ह। परमेस्सर आपन बरत भवा किरोध ओह पइ डाइ। उ दुस्ट मनई पइ परमेस्सर सजा बरसाइ।
24
होइ सकत है कि उ दुस्ट लोहा क तरवार स बच निकरइ, मुला कहुँ स काँसा क बाण ओका मार गिरावइ।
25
तीर खींचत लिहेस ह, अउर बिजुरि क नाई ओकरे पीठ मँ घुसत ह, अउर ओकरे करेजा बाहर आ जात ह, अउर उ आंतकित होइके काँप उठत ह।
26
ओकर सबहिं खजाना नस्ट होइ जइहीं, एक ठु अइसी आगी जेका कउनो नाहीं बारेस ओका नस्ट करी, उ आगी ओनका जउन ओकरे घरे मँ बचा अहइँ नस्ट कइ डाइ।
27
सरग सिद्ध करी कि उ दुस्ट अपराधी अहइ, इ गबाही धरती ओकरे खिलाफ देइ।
28
जउन कछू भी ओकरे घरे मँ अहइ, उ परमेस्सर क किरोध क बाढ़ मँ बहि जाइ।
29
इ उहइ जेका परमेस्सर दुस्टन क संग करइ क जोजना रचत ह। इ उहइ जइसा परमेस्सर ओनका देइ क जोजना बनावत ह।”
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