bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Bundeli
/
Bundeli
/
Revelation 14
Revelation 14
Bundeli
← Chapter 13
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 15 →
1
फिन मैंने तको, कि बो मेमना सिय्योन पहरवा पै ठांड़ो आय, और ऊके संग्गै एक लाख चौआलीस हजार मान्स आंय, जिन के कपाट पै उनको और उनके बाप कौ नाओं लिखो आय।
2
और सरग से मोहां एक ऐसी आवाज आई, मानो जैसे पानू की बिलात धार हो और ऊके संग्गै गरजबे की आवाज ऐसी सुनी जैसे कोऊ वीणा बजात होबे।
3
और बे सिंहासन और चारई जनावर और प्राचीनन के सामूं एक नओ गाना गात हते, उन एक लाख चौआलीस हजार मान्स जौन धरती पै से मोल लय गए हते, उनके छोड़ कोऊ ई गाना हां नईं सीख सकत हतो।
4
जे बे आंय, जो बईयरन के संग्गै अशुद्ध नईं भए, परन्त कुंआरे आंय: और जे बे आंय, कि जिते मेमना जात आय, बे ऊके पछाऊं जात आंय: जे जने संसार में से परमेसुर के सामूं ठांड़े होबे हां छुड़ाए गए आंय।
5
इन मान्सन में कछु खोट नईंयां, जे कभऊं झूठ नईं बोले।
6
फिन मैंने एक सरगदूत हां आकास के बीच उड़त तको, जीके ऐंगर धरती पै रैबेवारे सब जातियन, सबरी बोली बोलबेवारे, और मान्सन हां सुनाबे हां सनातन सुसमाचार हतो।
7
और ऊ ने ऊं ची टेर लगाई; परमेसुर से डरो; और उन के गुणगान करो; कायसे अब न्याय की बेरा आ गई आय, सो ऊ को भजन करो, जीने सरग और धरती हां और समुन्दर और पानू के झरने बनाए।
8
फिन ईके पाछें एक और सरगदूत ऐसो कैत भओ आओ, कि बड़ो बाबुल देश बरबाद हो गओ, जीने संसार के मान्सन हां सबरी बुरई बातें सिखाईं।
9
फिन ईके पाछें एक और सरगदूत बड़ी आवाज में ऐसो कैत आओ, कि जो कोऊ ऊ जनावर और ऊ की मूरत हां पूजे, और अपने हाथ और माथे पे ऊ की छाप लगाए।
10
तो ऐसो जनो परमेसुर की गुन्स से भरे कटोरा में से पी है, और पवित्तर सरगदूतन और मेमने के सामूं आग और गन्धक की पीड़ा में डालो जै है।
11
और ऊ आग और गन्धक को धुआं हमेसा लौ निकलत रै है, और जो ऊ जनावर और ऊ की मूरत की पूजा कर हैं, और ऊ की छाप हां लगा हैं, उन हां रात दिना कभऊं चैन न मिल है।
12
पवित्र लोकन कौ धीरज ऐई में आय, जो परमेसुर की सीख मानत और पिरभु यीशु मसीह पै बिसवास रखत आंय।
13
मैंने सरग से ऐसो शब्द सुनो, कि लिख; जो मान्स पिरभू में मरत आंय, बे अब से धन्न आंय, आत्मा ने सोई कई कि जौन मेहनत से काम उन ने करो आय उन हां इनाम मिल है, और बे आराम कर हैं।
14
फिन मैंने तको, एक उजरो बादल आय, और ऊ बादरे पै मनुष्य के पुत्र जैसो कोई बिराजो आय, जीके मूड़ पै सोने कौ मुकुट और हाथ में एक तेज हंसिया आय।
15
फिन एक और सरगदूत ने मन्दर से कड़ के, ऊसे जो बादल पै बिराजो हतो, कई कि अपनो हंसिया लैके काटो, कायसे कटनी के दिना आ गए आंय, कायसे संसार की खेती पक गई आय।
16
सो जो बादल पै बिराजे हते, उन ने धरती पै अपनो हंसिया लगा के कटाई करी।
17
फिन एक और सरगदूत ऊ मन्दर से कड़ो, जो सरग में आय, ऊके ऐंगर सोई तेज हंसिया हतो।
18
फिन एक और सरगदूत जीहां आगी पै अधकार हतो, बेदी में से कड़ो, और जीके ऐंगर तेज हंसिया हतो, ऊसे कहो; कि अपने तेज हंसिया से धरती पै जो दाखलता के गुच्छा आंय उन हां काट ले; कायसे उनकी दाखें पक गईं आंय।
19
और ऊ सरगदूत ने अपने हंसिया से धरती पै की दाखें काट के, और उन हां परमेसुर के कोप कुण्ड में डाल दओ।
20
और नगर के बायरें ऊ रस कुण्ड में दाखें कुचली गईं, और रस के कुण्ड में से इतनो रकत निकलो, कि नदिया घाईं सौ कोस लौ बहो, और इतनो गैरो हतो कि ठांड़े घुड़वन की लगाम लौ पहुंचो।
← Chapter 13
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 15 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22