bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Bundeli
/
Bundeli
/
Revelation 18
Revelation 18
Bundeli
← Chapter 17
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 19 →
1
ईके पाछें मैंने एक सरगदूत हां सरग से उतरत तको, जो बहुत बली हतो; और धरती ऊके तेज से चमक उठी।
2
ऊ ने बड़ी जोर से कई, कि गिर गओ बड़ो बाबुल गिर गओ: और भूतन कौ घर, और दुष्ट आत्मा कौ अड्डा, और एक गन्दी और घिनी चिरईया कौ अड्डा हो गओ।
3
कायसे ऊके व्यभिचार की विकराल मदिरा के कारन सब जातियां गिर गईं आंय, और धरती के राजाओं ने ऊके संग्गै व्यभिचार करो आय; और धरती के महाजन ऊके मजा मौज से धनी हो गए।
4
फिन मैंने सरग से कोऊ कौ शब्द सुनो, कि हे मोरे जनो, ऊ में से कड़ आओ; कि तुम ऊके पापन में संग्गी न हो, कहूं ऐसो न होबै के ऊकी विपत तुम पे आ पड़े।
5
कायसे ऊके पाप सरग लौ पोंच गए आंय, और ऊके पाप और बुरय काम परमेसुर हां पता आंय।
6
जैसो ऊ ने तुमाए संग्गै करो, तुम सोई ऊके संग्गै ऊं सई करो, और जैसो ऊ ने काम करो आय ऊं सई ऊके कामन कौ दुगनो बदला दो, और जैसे ऊ ने अपने कटोरा से दूसरन हां पिलाओ ऊहां दुगनो पिलाओ।
7
जैसे मजा मौज में रैके ऊ ने अपने हां बड़ो दिखाओ; ऊं सई दुख और पिरातो ऊहां दो; कायसे बा अपने मन में कैत आय, मैं रानी बनी बैठी आंव, मैं बिधवा नईंयां; मैं कभऊं परेसानी में नईं पड़ हों।
8
सो एकई दिना में ऊ पे ऐसी विपत आ पड़ है, मानो मौत, दुख और अकाल; और बा आगी में बार दई जै है, कायसे ऊ को न्याय करबेवारो महाबली पिरभू परमेसुर आय।
9
और एक एक राजा जिन ने ऊके संग्गै व्यभिचार, और मजा मौज में संग्गी बने रहे, जब ऊके जलबे को धुआं तक हैं, तो ऊके लाने रो हैं, और छाती पीट हैं।
10
और जो पीड़ा ऊहां हुईये ऊसे घबरा के बे दूर ठांड़े होकें कै हैं, हे बड़े नगर, बाबुल! हे पक्के नगर, हाय! हाय! घड़ी भर में तोहां दण्ड मिल गओ आय।
11
और संसार के धंधा करबेवारे ऊके लाने रो हैं और किलप हैं, कायसे अब कोई उनको माल मोल न लै है।
12
जैसे सोनो, चान्दी, हीरा, मोती और मलमल के उन्ना, और बैजनी, किरमिची और रेशम के उन्ना, और अच्छी महकबेवारी लकड़ियां, और हांथीदांत की बस्तें, और मांगी लकड़ियां, और पीतल, और लोहे, और संगमरमर की बस्तें।
13
और दालचीनी, मसाले, धूप, इतर, लोबान, दारू, तेल, मैदा, पिसिया, गईयां, बैलवा, गाड़र, छिरियां, घुड़वा, रथ और नौकर, और मान्सन के प्रान।
14
और अब सबरे फल जो तें मन से चाहत हतो बे अब नईयां; और मजेदार वस्तें और मांगी बस्तें चली गईं, और बे सब फिन न मिल हैं।
15
बे व्यापारी जो इन बस्तों को ऊहां बेच के साहूकार बन गए हते, ऊके पिराते हां तक के और डरा के दूर ठांड़े हुईयें, और रोऊत और किलपत बे ऐसो कै हैं।
16
हाय! हाय! जा बाबुल नगरी जो मखमल, बेंजनी और किरमिजी उन्ना पैंरे हती, और सोने और हीरे जवाहरातन से सजी हती।
17
घड़ी भर में ऊ को ऐसो भारी धन चलो गओ: और समुन्दर से आके जो धंधो करत हते बे सब दूर ठांड़े हो गए।
18
और ऊके जलबे को धुआं देखत भए कै हैं, कि कौन सो नगर ई बड़े नगर जैसो आय?
19
और अपने मूड़ पै धूरा डाल के, रोते और किलपत भए चिल्लिया के कै हैं, हाय! हाय! जा बड़ी नगरी बाबुल जी में समुन्दर से आके जो धंधा करबेवारे धनी हो गए हते, बे घड़ी भर में उजड़ गए।
20
हे सरग और धरती पै रैवेबारे लोगो, प्रेरितन और अगमवकता, ऊ पे मजा करो, कायसे परमेसुर ने तुमाओ बदला ऊसे ले लओ।
21
फिन एक बली सरगदूत ने चकिया के पाट जैसो एक पथरा लैके समुन्दर में फेंक दओ, और ऐसो कहो कि जा बड़ी नगरी बाबुल ऐंसई गिराई जै है, और फिन कभऊं ऊ को पता न मिल है।
22
और वीणा और बांसली बजाबेवारे, और तुरही फूकबेवारन को गल्ला अब सुनाई न दै है, और कोऊ बस्त बनाबेवारो कारीगर और बेंचबेवारो इते कभऊं न मिल है; और चकिया चलाबे की आहट अब सुनाई न पड़ है।
23
और दिया को उजारो कभऊं तोय में न चमक है, और दूल्हा दुलईया को ब्याव होत न दिखा है; कायसे तोरे व्यापारी संसार भर में जाने जात हते, और तोरे टोना टोटका से सब जातियन भरमाई गईं हतीं।
24
और अगमवकतन और परमेसुर के जन, और धरती पै के सबरे मारे गए मान्सन को रकत ओई में पाओ गओ।
← Chapter 17
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 19 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22