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Acts 7
Hindi 2017 (नया नियम)
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1
तब महायाजक ने कहा, “क्या ये बातें सत्य है?”
2
उसने कहा, “हे भाइयो, और पितरो सुनो, हमारा पिता अब्राहम हारान में बसने से पहले जब मेसोपोटामिया में था; तो तेजोमय परमेश्वर ने उसे दर्शन दिया।
3
और उससे कहा, ‘तू अपने देश और अपने कुटुम्ब से निकलकर उस देश मे चला जा, जिसे मैं तुझे दिखाऊँगा।’
4
तब वह कसदियों के देश से निकलकर हारान में जा बसा; और उसके पिता की मृत्यु के बाद परमेश्वर ने उसको वहाँ से इस देश में लाकर बसाया जिसमें अब तुम बसते हो,
5
और परमेश्वर ने उसको कुछ मीरास न दी, वरन् पैर रखने भर की भी उसमें जगह न दी, यद्यपि उस समय उसके कोई पुत्र भी न था। फिर भी प्रतिज्ञा की, ‘कि मैं यह देश, तेरे और तेरे बाद तेरे वंश के हाथ कर दूँगा।’
6
और परमेश्वर ने यों कहा, ‘तेरी सन्तान के लोग पराये देश में परदेशी होंगे, और वे उन्हें दास बनाएँगे, और चार सौ वर्ष तक दु:ख देंगे।’
7
फिर परमेश्वर ने कहा, ‘जिस जाति के वे दास होंगे, उसको मैं दण्ड दूँगा; और इसके बाद वे निकलकर इसी जगह मेरी सेवा करेंगे।’
8
और उसने उससे खतने की वाचा बाँधी; और इसी दशा में इसहाक उससे उत्पन्न हुआ; और आठवें दिन उसका खतना किया गया; और इसहाक से याकूब और याकूब से बारह कुलपति उत्पन्न हुए।
9
और कुलपतियों ने यूसुफ से डाह करके उसे मिसर देश जानेवालों के हाथ बेचा; परन्तु परमेश्वर उसके साथ था।
10
और उसे उसके सब क्लेशों से छुड़ाकर मिसर के राजा फिरौन के आगे अनुग्रह और बुद्धि दी, और उसने उसे मिस्त्र पर और अपने सारे घर पर हाकिम ठहराया।
11
तब मिसर और कनान के सारे देश में अकाल पडा; जिस से भारी क्लेश हुआ, और हमारे बाप दादों (पूर्वज) को अन्न नहीं मिलता था।
12
परन्तु याकूब ने यह सुनकर, कि मिसर में अनाज है, हमारे बाप दादों को पहली बार भेजा।
13
और दूसरी बार यूसुफ अपने भाइयों पर प्रगट हो गया, और यूसुफ की जाति फिरौन को मालूम हो गई।
14
तब यूसुफ ने अपने पिता याकूब और अपने सारे कुटुम्ब को, जो पचहत्तर व्यक्ति थे, बुला भेजा।
15
तब याकूब मिसर में गया; और वहाँ वह और हमारे बापदादे मर गए।
16
उनके शव शकेम में पहुँचाए जाकर उस कब्र में रखे गए, जिसे अब्राहम ने चाँदी देकर शकेम में हमोर की सन्तान से मोल लिया था।
17
परन्तु जब उस प्रतिज्ञा के पूरे होने का समय निकट आया, जो परमेश्वर ने अब्राहम से की थी, तो मिसर में वे लोग बढ़ गए; और बहुत हो गए।
18
तब मिसर में दूसरा राजा हुआ जो यूसुफ को नहीं जानता था।
19
उसने हमारी जाति से चतुराई करके हमारे बाप दादों के साथ यहाँ तक बुरा व्यवहार किया, कि उन्हें अपने बालकों को फेंक देना पड़ा कि वे जीवित न रहें।
20
उस समय मूसा उत्पन्न हुआ; और वह परमेश्वर की दृष्टि में बहुत ही सुन्दर था; और वह तीन महीने तक अपने पिता के घर में पाला गया।
21
परन्तु जब फेंक दिया गया तो फिरौन की बेटी ने उसे उठा लिया, और अपना पुत्र करके पाला।
22
और मूसा को मिसरियों की सारी विद्या पढ़ाई गई, और वह बातों और कामों में सामर्थी था।
23
जब वह चालीस वर्ष का हुआ, तो उसके मन में आया कि मैं अपने इस्राएली भाइयों से भेंट करूँ।
24
और उसने एक व्यक्ति पर अन्याय होते देखकर, उसे बचाया, और मिसरी को मारकर सताए हुए का पलटा लिया।
25
उसने सोचा, कि मेरे भाई समझेंगे कि परमेश्वर मेरे हाथों से उन का उद्धार करेगा, परन्तु उन्होंने न समझा।
26
दूसरे दिन जब वे आपस में लड़ रहे थे, तो वह वहाँ जा पहुंचा; और यह कहके उन्हें मेल करने के लिये समझाया, कि हे पुरूषो, ‘तुम तो भाई-भाई हो, एक दूसरे पर क्यों अन्याय करते हो?’
27
परन्तु जो अपने पड़ोसी पर अन्याय कर रहा था, उसने उसे यह कहकर हटा दिया, ‘तुझे किस ने हम पर हाकिम और न्यायाधीश ठहराया है?
28
क्या जिस रीति से तूने कल मिस्त्री को मार डाला मुझे भी मार डालना चाहता है?’
29
यह बात सुनकर, मूसा भागा और मिद्यान देश में परदेशी होकर रहने लगा: और वहाँ उसके दो पुत्र उत्पन्न हुए।
30
जब पूरे चालीस वर्ष बीत गए, तो एक स्वर्गदूत ने सीनै पहाड़ के जंगल में उसे जलती हुई झाड़ी की ज्वाला में दर्शन दिया।
31
मूसा ने उस दर्शन को देखकर अचम्भा किया, और जब देखने के लिये पास गया, तो प्रभु की यह वाणी सुनाई दी,
32
“मैं तेरे पूर्वज, अब्राहम, इसहाक और याकूब का परमेश्वर हूँ।” तब तो मूसा काँप उठा, यहाँ तक कि उसे देखने का हियाव न रहा।
33
तब प्रभु ने उससे कहा, ‘अपने पाँवों से जूती उतार ले, क्योंकि जिस जगह तू खड़ा है, वह पवित्र भूमि है।
34
मैंने सचमुच अपने लोगों की दुर्दशा को जो मिसर में है, देखी है; और उनकी आहें और उन का रोना सुन लिया है; इसलिये उन्हें छुड़ाने के लिये उतरा हूँ। अब आ, मैं तुझे मिस्त्र में भेजूँगा।
35
जिस मूसा को उन्होंने यह कहकर नकारा था, ‘तुझे किस ने हम पर हाकिम और न्यायाधीश ठहराया है?’ उसी को परमेश्वर ने हाकिम और छुड़ानेवाला ठहराकर, उस स्वर्गदूत के द्वारा जिस ने उसे झाड़ी में दर्शन दिया था, भेजा।
36
यही व्यक्ति मिसर और लाल समुद्र और जंगल में चालीस वर्ष तक अद्भुत काम और चिन्ह दिखा दिखाकर उन्हें निकाल लाया।
37
यह वही मूसा है, जिस ने इस्राएलियों से कहा, ‘परमेश्वर तुम्हारे भाइयों में से तुम्हारे लिये मुझ सा एक भविष्यद्वक्ता उठाएगा।’
38
यह वही है, जिस ने जंगल में कलीसिया के बीच उस स्वर्गदूत के साथ सीनै पहाड़ पर उससे बातें की, और हमारे पूर्वजों के साथ था, उसी को जीवित वचन मिले, कि हम तक पहुँचाए।
39
परन्तु हमारे बापदादों ने उसकी मानना न चाहा; वरन् उसे हटाकर अपने मन मिसर की ओर फेरे,
40
और हारून से कहा, ‘हमारे लिये ऐसा देवता बना, जो हमारे आगे-आगे चलें; क्योंकि यह मूसा जो हमें मिसर देश से निकाल लाया, हम नहीं जानते उसे क्या हुआ?’
41
उन दिनों में उन्होंने एक बछड़ा बनाकर, उसकी मूरत के आगे बलि चढ़ाया; और अपने हाथों के कामों में मग्न होने लगे।
42
अतः परमेश्वर ने मुँह मोड़कर उन्हें छोड़ दिया, कि आकाशगण पूजें, जैसा भविष्यद्वक्ताओं की पुस्तक में लिखा है, ‘हे इस्राएल के घराने, क्या तुम जंगल में चालीस वर्ष तक पशुबलि और अन्नबलि मुझ ही को चढ़ाते रहे?’
43
और तुम मोलेक के तम्बू और रिफान देवता के तारे को लिए फिरते थे, अर्थात् उन मूर्तियों को जिन्हें तुम ने दण्डवत करने के लिये बनाया था। अतः मैं तुम्हें बाबुल के परे ले जाकर बसाऊँगा।
44
साक्षी का तम्बू जंगल में हमारे बापदादों के बीच में था; जैसा उसने ठहराया, जिस ने मूसा से कहा, ‘जो आकार तू ने देखा है, उसके अनुसार इसे बना।’
45
उसी तम्बू को हमारे बापदादे पूर्वकाल से पाकर यहोशू के साथ यहाँ ले आए; जिस समय कि उन्होंने उन अन्यजातियों पर अधिकार पाया, जिन्हें परमेश्वर ने हमारे बापदादों के सामने से निकाल दिया, और वह दाऊद के समय तक रहा।
46
उस पर परमेश्वर ने अनुग्रह किया; अतः उसने विनती की, कि मैं याकूब के परमेश्वर के लिये निवास स्थान बनाऊँ।
47
परन्तु सुलैमान ने उसके लिये घर बनाया।
48
परन्तु परम प्रधान हाथ के बनाए घरों में नहीं रहता, जैसा कि भविष्यद्वक्ता ने कहा,
49
‘प्रभु कहता है, स्वर्ग मेरा सिहांसन और पृथ्वी मेरे पाँवों तले की पीढ़ी है, मेरे लिये तुम किस प्रकार का घर बनाओगे? और मेरे विश्राम का कौन सा स्थान होगा?
50
क्या ये सब वस्तुएँ मेरे हाथ की बनाई नहीं?’
51
“हे हठीले, और मन और कान के खतनारहित लोगो, तुम सदा पवित्र आत्मा का विरोध करते हो। जैसा तुम्हारे पूर्वज करते थे, वैसे ही तुम भी करते हो।
52
भविष्यवक्ताओं में से किसको तुम्हारे बापदादों ने नहीं सताया? और उन्होंने उस धर्मी के आगमन का पूर्वकाल से सन्देश देनेवालों को मार डाला, और अब तुम भी उसके पकड़वाने वाले और मार डालने वाले हुए।
53
तुम ने स्वर्गदूतों के द्वारा ठहराई हुई व्यवस्था तो पाई, परन्तु उसका पालन नहीं किया।”
54
ये बातें सुनकर वे जल गए और उस पर दाँत पीसने लगे।
55
परन्तु उसने पवित्र आत्मा से परिपूर्ण होकर स्वर्ग की ओर देखा और परमेश्वर की महिमा को और यीशु को परमेश्वर की दाहिनी ओर खड़ा देखकर
56
कहा, “देखों, मैं स्वर्ग को खुला हुआ, और मनुष्य के पुत्र को परमेश्वर के दाहिनी ओर खड़ा हुआ देखता हूँ।”
57
तब उन्होंने बड़े शब्द से चिल्लाकर कान बन्द कर लिए, और एक चित्त होकर उस पर झपटे।
58
और उसे नगर के बाहर निकालकर पत्थराव करने लगे, और गवाहों ने अपने कपड़े शाऊल नामक एक जवान के पाँवों के पास उतार कर रखे।
59
और वे स्तिफनुस को पत्थराव करते रहे, और वह यह कहकर प्रार्थना करता रहा, “हे प्रभु यीशु, मेरी आत्मा को ग्रहण कर।”
60
फिर घुटने टेककर ऊँचे शब्द से पुकारा, “हे प्रभु, यह पाप उन पर मत लगा।” और यह कहकर सो गया। और शाऊल उसके वध में सहमत था।
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