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Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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1 John 3
1 John 3
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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1
पिता ने हमसे कितना महान प्रेम किया है। हम परमेश्वर की सन्तान कहलाते हैं और हम वास्तव में वही हैं। संसार हमें नहीं जानता, क्योंकि उसने परमेश्वर को नहीं जाना है।
2
प्रियो! अब हम परमेश्वर की सन्तान हैं, किन्तु यह अभी तक प्रकट नहीं हुआ कि हम क्या बनेंगे। हम इतना ही जानते कि जब मसीह प्रकट होंगे, तो हम उनके सदृश बन जायेंगे; क्योंकि हम उनको वैसा ही देखेंगे जैसा कि वह वास्तव में हैं।
3
जो कोई मसीह से ऐसी आशा करता है, उसे वैसा ही पवित्र बनना चाहिए, जैसा कि वह पवित्र हैं।
4
जो व्यक्ति पाप करता है, वह अधर्म का कार्य करता है; क्योंकि पाप का अर्थ है अधर्म का साथ देना।
5
तुम जानते हो कि मसीह हमारे पाप हरने के लिए प्रकट हुए। उन में कोई पाप नहीं है।
6
जो कोई उन में निवास करता है, वह पाप नहीं करता। जो कोई पाप करता है, उसने उन्हें नहीं देखा है और वह उन्हें नहीं जानता।
7
बच्चो! कोई तुम्हें बहकाये नहीं। जो धर्माचरण करता है, वह मसीह की तरह धार्मिक है।
8
जो पाप करता है, वह शैतान से है; क्योंकि शैतान प्रारम्भ से पाप करता आया है। परमेश्वर का पुत्र इसीलिए प्रकट हुआ कि वह शैतान के कार्य समाप्त कर दे।
9
जो कोई परमेश्वर से उत्पन्न हुआ है, वह पाप नहीं करता; क्योंकि परमेश्वर का बीज-रूपी वचन उसमें बना रहता है। वह पाप नहीं कर सकता, क्योंकि वह परमेश्वर से उत्पन्न हुआ है।
10
परमेश्वर की सन्तान और शैतान की सन्तान की पहचान यह है: जो भी व्यक्ति धर्माचरण नहीं करता, वह परमेश्वर की सन्तान नहीं है और वह भी नहीं, जो अपने भाई अथवा बहिन से प्रेम नहीं करता।
11
जो सन्देश तुम ने प्रारम्भ से सुना है, वह यह है कि हमें एक दूसरे से प्रेम करना चाहिए।
12
हम काइन की तरह नहीं बनें। वह दुष्ट की सन्तान था और उसने अपने भाई की हत्या की। उसने उसकी हत्या क्यों कर दी? क्योंकि उसके अपने कर्म बुरे थे और उसके भाई के कर्म धार्मिक।
13
भाइयो और बहिनो! यदि संसार तुम से बैर करे, तो उस पर आश्चर्य मत करो।
14
हम जानते हैं कि हमने मृत्यु से निकल कर जीवन में प्रवेश किया है; क्योंकि हम अपने भाई-बहिनों से प्रेम करते हैं। जो प्रेम नहीं करता, वह मृत्यु में बना रहता है।
15
जो कोई अपने भाई अथवा बहिन से बैर करता है, वह हत्यारा है और तुम जानते हो कि किसी भी हत्यारे में शाश्वत जीवन नहीं होता।
16
हम प्रेम का मर्म इसी से पहचान गये कि येशु ने हमारे लिए अपना प्राण अर्पित किया तो हमें भी अपने भाई-बहिनों के लिए अपना प्राण अर्पित करना चाहिए।
17
किसी के पास संसार की धन-दौलत हो और वह अपने भाई अथवा बहिन को तंगहाली में देख कर उस पर दया न करे, तो परमेश्वर का प्रेम उस में कैसे बना रह सकता है?
18
बच्चो! हम शब्दों और बातों से नहीं, किन्तु कामों और सत्य द्वारा प्रेम करें।
19
इसी से हम जान जायेंगे कि हम सत्य की सन्तान हैं। और जब कभी हमारा अन्त:करण हम पर दोष लगायेगा, तो हम परमेश्वर के सामने अपने को आश्वासन दे सकेंगे;
20
क्योंकि परमेश्वर हमारे अन्त:करण से बड़ा है और वह सब कुछ जानता है।
21
प्रियो! यदि हमारा अन्त:करण हम पर दोष नहीं लगाता है, तो हम परमेश्वर पर पूरा भरोसा रख सकते हैं।
22
हम उस से जो कुछ माँगेंगे, वह हमें वही प्रदान करेगा; क्योंकि हम उसकी आज्ञाओं का पालन करते हैं और वही करते हैं, जो उसे अच्छा लगता है।
23
और उसकी आज्ञा यह है कि हम उसके पुत्र येशु मसीह के नाम में विश्वास करें और एक दूसरे से प्रेम करें, जैसा कि मसीह ने हमें आज्ञा दी है।
24
जो परमेश्वर की आज्ञाओं का पालन करता है, वह परमेश्वर में निवास करता है और परमेश्वर उस में। और हम जानते हैं कि वह हम में निवास करता है, क्योंकि उसने हम को अपना आत्मा प्रदान किया है।
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