bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Hindi
/
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
/
Exodus 21
Exodus 21
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
← Chapter 20
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 37
Chapter 38
Chapter 39
Chapter 40
Chapter 22 →
1
‘तुझे ये न्याय-सिद्धान्त इस्राएली समाज के सम्मुख स्थापित करने हैं:
2
‘जब तू इब्रानी जाति का गुलाम खरीदे तब वह छ: वर्ष तक गुलामी करेगा। वह सातवें वर्ष बिना मूल्य चुकाए स्वतन्त्र होकर जा सकेगा।
3
यदि वह अविवाहित आया है तो अविवाहित ही स्वतन्त्र होकर जाए। किन्तु यदि वह पत्नी सहित आया है तो उसके साथ उसकी पत्नी भी जाए।
4
यदि उसके स्वामी ने उसे स्त्री प्रदान की है, और स्त्री ने उससे पुत्र अथवा पुत्रियाँ उत्पन्न की हैं तो स्त्री तथा उसकी सन्तान स्वामी की होंगी, और वह अकेला स्वतन्त्र होकर जाएगा।
5
किन्तु यदि गुलाम दृढ़ता से कहे, “मैं अपने स्वामी, अपनी पत्नी और अपने बच्चों से प्रेम करता हूं। मैं स्वतन्त्र होकर नहीं जाऊंगा”,
6
तो उसका स्वामी उसे परमेश्वर के निकट लाएगा। उसका स्वामी उसे द्वार अथवा चौखट के निकट लाकर सूजे से उसका कान छेदेगा। तत्पश्चात् वह अपने स्वामी की सदा गुलामी करेगा।
7
‘जब कोई व्यक्ति अपनी पुत्री को दासी के रूप में बेचेगा, तब वह पुरुष-दासों के सदृश स्वतन्त्र होकर न जा सकेगी।
8
यदि वह अपने स्वामी को, जिसने उसे अपने लिए खरीदा है, प्रसन्न न रख सके तो स्वामी उसका मूल्य लेकर उसे स्वतन्त्र कर दे। उसको विदेशी के हाथ में बेचने का अधिकार न होगा। अन्यथा यह उसके साथ विश्वासघात होगा।
9
किन्तु यदि स्वामी ने अपने पुत्र के लिए उसे खरीदा है तो वह उसके साथ पुत्रीवत् व्यवहार करेगा।
10
यदि वह दूसरी स्त्री रखता है तो इस दासी को भोजन, वस्त्र और सहवास-सुख से वंचित नहीं करेगा।
11
यदि स्वामी उसके लिए इन तीन बातों की व्यवस्था नहीं करता तो वह बिना मूल्य चुकाए चली जाएगी।
12
‘जो कोई किसी व्यक्ति पर ऐसा प्रहार करे कि वह मर जाए तो उसे निश्चय ही मृत्यु-दण्ड दिया जाएगा।
13
पर यदि उसने घात लगाकर प्रहार नहीं किया था, वरन् दुर्घटनावश ऐसा हो गया था, तो मैं तुम्हारे लिए एक स्थान निश्चित करूंगा, जहाँ वह भाग सकेगा।
14
पर यदि कोई अपने पड़ोसी की कपटपूर्ण हत्या के अभिप्राय से आघात करे, तो तू उसका वध करने के लिए मेरी वेदी से भी उसे घसीट कर ले जाना।
15
‘जो कोई अपने माता-पिता पर प्रहार करे, उसे निश्चय ही मृत्यु-दण्ड दिया जाएगा।
16
‘जो कोई किसी व्यक्ति का अपहरण करे, और उसको बेच दे अथवा अपहृत व्यक्ति उसके अधिकार में पाया जाए, तो उसे निश्चय ही मृत्यु-दण्ड दिया जाएगा।
17
‘अपने माता-पिता को अपशब्द कहने वाले व्यक्ति को निश्चय ही मृत्यु-दण्ड दिया जाएगा।
18
‘जब मनुष्य झगड़ा करें और एक मनुष्य अपने पड़ोसी पर पत्थर से प्रहार करे, या घूंसा मारे और उसकी मृत्यु न हो, वरन उसे प्रहार के कारण शय्या पर लेटना पड़े,
19
यदि वह पुन: उठकर अपनी सोंटी के सहारे बाहर चलने-फिरने लगे, तो प्रहार करने वाला व्यक्ति दण्ड से मुक्त माना जाएगा। उसे केवल उसके नष्ट समय की क्षति-पूर्ति करना तथा उसको पूर्ण स्वस्थ करवाना होगा।
20
‘यदि कोई व्यक्ति अपने गुलाम पर, चाहे वह स्त्री अथवा पुरुष हो, लाठी से प्रहार करे, और वह उसके हाथ से मर जाए, तो उसे निश्चय ही दण्ड दिया जाएगा।
21
किन्तु यदि गुलाम एक अथवा दो दिन जीवित रहे तो उसे दण्ड नहीं दिया जाएगा; क्योंकि गुलाम उसका धन है।
22
‘जब मनुष्य मार-पीट करें, और गर्भिणी स्त्री को इतनी चोट लगे कि उसका गर्भपात हो जाए परन्तु और कुछ हानि न हो, तब स्त्री के पति की मांग के अनुसार मारनेवाले व्यक्ति को अर्थ-दण्ड दिया जाएगा। जितना पंच निश्चित करेंगे, उतना उसे देना होगा।
23
‘यदि मार-पीट में किसी की मृत्यु हो जाए तो तुझे प्राण के बदले प्राण देना होगा;
24
अथवा किसी प्रकार की हानि होती है तो आंख के बदले आंख, दांत के बदले दांत, हाथ के बदले हाथ, पैर के बदले पैर,
25
दाह के बदले दाह, घाव के बदले घाव, आघात के बदले आघात का दण्ड।
26
‘जब कोई व्यक्ति अपने गुलाम की, चाहे वह स्त्री अथवा पुरुष हो, आंख पर प्रहार करे और वह फूट जाए, तब स्वामी उस आंख के बदले गुलाम को स्वतन्त्र करके जाने देगा।
27
यदि वह अपने गुलाम का, चाहे वह स्त्री अथवा पुरुष हो, दांत तोड़ता है तो उस दांत के बदले गुलाम को स्वतन्त्र करके जाने देगा।
28
‘यदि बैल किसी स्त्री अथव पुरुष को सींग से मार डाले तो पत्थर मारकर उसका वध किया जाएगा। ऐसे बैल का मांस नहीं खाया जाएगा। बैल का स्वामी दण्ड-मुक्त माना जाएगा।
29
किन्तु यदि बैल को पहले से ही सींग से मारने की आदत पड़ी है और उसके स्वामी को चेतावनी देने पर भी उसने उसको बान्ध कर नहीं रखा और स्त्री अथवा पुरुष को बैल मार डालता है, तो पत्थरों से मारकर उस बैल का वध किया जाए। उसके स्वामी को भी मृत्यु-दण्ड दिया जाएगा।
30
यदि उस पर उद्धार का शुल्क निश्चित किया जाए, तो उसे अपने प्राण के विमोचन के लिए निश्चित किया गया शुल्क देना होगा।
31
यदि बैल किसी मनुष्य के पुत्र अथवा पुत्री को सींग से मार डालता है, तो इसी न्याय-सिद्धान्त के अनुसार उससे व्यवहार किया जाएगा।
32
यदि बैल किसी गुलाम को, चाहे वह स्त्री अथवा पुरुष हो, सींग से मार डालता है तो उसका मालिक चांदी के तीस सिक्के गुलाम के स्वामी को देगा तथा पत्थर मार कर बैल का वध किया जाएगा।
33
‘जब कोई मनुष्य गड्ढे को खुला रहने दे, अथवा यदि वह गड्ढा खोदे पर उसे नहीं ढांपे और उसमें बैल या गधा गिर जाए,
34
तब गड्ढे का स्वामी क्षतिपूर्ति करेगा। वह पशु के स्वामी को उसका मूल्य लौटाएगा, परन्तु लोथ पर उसका अधिकार होगा।
35
‘जब किसी मनुष्य का बैल पड़ोसी के बैल को इतना मारे कि वह मर जाए, तब वे जीवित बैल को बेचकर उसका मूल्य आधा-आधा बांट लेंगे। वे लोथ को भी आपस में बांट लेंगे।
36
यदि यह बात सर्व विदित है कि बैल को पहले से ही सींग से मारने की आदत थी और उसके स्वामी ने उसको बान्धकर नहीं रखा, तो वह बैल के बदले बैल देकर क्षति-पूर्ति करेगा, परन्तु लोथ पर उसका अधिकार होगा।
← Chapter 20
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 37
Chapter 38
Chapter 39
Chapter 40
Chapter 22 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28
29
30
31
32
33
34
35
36
37
38
39
40