bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Hindi
/
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
/
Genesis 34
Genesis 34
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
← Chapter 33
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 37
Chapter 38
Chapter 39
Chapter 40
Chapter 41
Chapter 42
Chapter 43
Chapter 44
Chapter 45
Chapter 46
Chapter 47
Chapter 48
Chapter 49
Chapter 50
Chapter 35 →
1
एक दिन लिआ की पुत्री दीना, जिसको उसने याकूब से जन्म दिया था, कनान देश की कन्याओं से भेंट करने गई।
2
उस देश के शासक का नाम हमोर था और हमोर के पुत्र का नाम शकेम था। वह हिव्वी जाति का था। जब शकेम ने दीना को देखा तब उसे पकड़ लिया। वह उसके साथ सोया और उसका शीलभंग कर दिया।
3
पर उसके प्राण याकूब की पुत्री पर मुग्ध हो गए। वह लड़की से प्रेम करने लगा। उसने उससे मधुर बातें कीं।
4
शकेम ने अपने पिता हमोर से कहा, ‘मुझे यह लड़की पत्नी के रूप में प्रदान कीजिए।’
5
याकूब ने सुना कि शकेम ने उसकी पुत्री दीना के साथ बलात्कार किया है। उस समय उसके पुत्र पशुओं के साथ चरागाह में थे। अत: वह उनके लौटने तक शान्त रहा।
6
शकेम का पिता हमोर याकूब से बातचीत करने के लिए उसके पास आया।
7
जब याकूब के पुत्रों ने उसके विषय में सुना तब वे दु:खित हुए। वे चरागाह से आए। वे बहुत क्रुद्ध थे; क्योंकि शकेम ने याकूब की पुत्री के साथ सोकर इस्राएली समाज में मूर्खतापूर्ण कार्य किया था। ऐसा कार्य नहीं किया जाना चाहिए था।
8
हमोर उनसे बोला, ‘मेरा पुत्र शकेम आपकी पुत्री से प्रेम करने लगा है। अतएव कृपया अपनी पुत्री को पत्नी के रूप में उसे प्रदान कीजिए।
9
हम लोगों से विवाह-सम्बन्ध स्थापित कीजिए। अपनी पुत्रियाँ हमें दीजिए, हमारी पुत्रियाँ आप लीजिए।
10
तब आप इस देश में रह सकेंगे। इसका द्वार आपके लिए खुल जाएगा। यहाँ रहिए और व्यापार कीजिए। धन-सम्पत्ति अर्जित कीजिए।’
11
शकेम ने भी दीना के पिता और भाइयों से कहा, ‘आप लोग मुझपर कृपा-दृष्टि कीजिए। जो कुछ भी आप मुझसे कहेंगे, वह मैं आपको दूँगा।
12
आप जितना भी अधिक दहेज और भेंट मांगेंगे, मैं आपके वचन के अनुसार दूँगा। आप केवल मुझे अपनी लड़की पत्नी के रूप में प्रदान कर दीजिए।’
13
याकूब के पुत्रों ने शकेम और उसके पिता हमोर को कपटपूर्ण उत्तर दिया; क्योंकि शकेम ने उनकी बहिन के साथ बलात्कार किया था।
14
वे उनसे बोले, ‘हम ऐसा नहीं कर सकते। हम उस पुरुष को अपनी बहिन नहीं दे सकते जिसका खतना नहीं हुआ है; क्योंकि वह हमारे लिए निन्दा की बात होगी।
15
हम केवल इस शर्त पर तुम्हारी बात स्वीकार कर सकते हैं कि तुम भी हमारे समान खतनावाले बनोगे। तुम्हारी जाति के प्रत्येक पुरुष का खतना किया जाए।
16
तब हम अपनी पुत्रियाँ तुम लोगों को देंगे और तुम्हारी पुत्रियाँ हम ग्रहण करेंगे। हम तुम्हारे साथ रहेंगे और हम सब एक ही जाति बन जाएँगे।
17
पर यदि तुम हमारी बात नहीं सुनोगे, और खतना नहीं कराओगे तो हम अपनी लड़की को लेकर यहाँ से चले जाएँगे।’
18
उनकी बातों से हमोर और उसका पुत्र शकेम प्रसन्न हुए।
19
युवक शकेम ने उसकी मांग को पूरा करने में विलम्ब नहीं किया; क्योंकि वह याकूब की पुत्री को बहुत चाहता था। वह अपने पिता के समस्त परिवार में सर्वाधिक सम्मानित व्यक्ति था।
20
हमोर और उसका पुत्र शकेम नगर में प्रवेश-द्वार पर आए। उन्होंने नगर-निवासियों से कहा,
21
‘ये व्यक्ति हमारे साथ मित्रतापूर्ण व्यवहार करते हैं। इन्हें इस देश में रहने और व्यापार करने दो। देखो, इनके लिए भी यह देश बहुत विस्तृत है। आओ,हम इनकी पुत्रियों से विवाह करें, और अपनी पुत्रियाँ इन्हें प्रदान करें।
22
ये इस शर्त पर हमारे साथ रहने को और एक ही जाति बनने को सहमत हैं कि जैसे इनका खतना हुआ है वैसे ही हममें से प्रत्येक पुरुष का खतना किया जाए।
23
तब इनके पालतू पशु, इनकी धन-सम्पत्ति और वन पशु हमारे हो जाएंगे। हम केवल इनकी शर्त को स्वीकार कर लें। तब ये हमारे साथ रहने लगेंगे।’
24
नगर के प्रवेश-द्वार पर आए सब लोगों ने हमोर और उसके पुत्र शकेम की बातें मान लीं। प्रत्येक पुरुष ने जो नगर-द्वार पर आया था, अपना खतना करवाया।
25
जब तीसरे दिन वे सब पीड़ित पड़े थे तब दीना के भाई, अर्थात् याकूब के दो पुत्र शिमोन और लेवी, तलवार लेकर नगर पर अचानक चढ़ आए। उन्होंने सब पुरुषों को मार डाला।
26
उन्होंने हमोर और उसके पुत्र शकेम का भी वध कर दिया। वे शकेम के घर से दीना को लेकर चले गए।
27
याकूब के अन्य पुत्र मृतकों के पास गए। उन्होंने नगर को लूट लिया; क्योंकि उनकी बहिन के साथ बलात्कार किया गया था।
28
याकूब के पुत्रों ने उनकी भेड़-बकरी, गाय-बैल, गधे, अर्थात् जो कुछ नगर और मैदान में था, सब लूट लिया।
29
उनकी धन-सम्पत्ति, उनके बाल-बच्चे, उनकी स्त्रियाँ और जो कुछ उनके घरों में था, सब को लूटकर अपने अधिकार में कर लिया।
30
याकूब ने शिमोन और लेवी से कहा, ‘तुम लोगों ने मुझे इस देश के निवासियों में−कनानी तथा परिज्जी जातियों में, अप्रिय बनाकर आपत्ति मोल ली है। मेरे पास बहुत कम व्यक्ति हैं। यदि वे परस्पर एकत्रित होकर मुझपर आक्रमण करें तो सारे परिवार सहित मैं नष्ट हो जाऊंगा।’
31
परन्तु उन्होंने कहा, ‘क्या शकेम को हमारी बहिन के साथ वेश्या के समान व्यवहार करना चाहिए था?’
← Chapter 33
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 37
Chapter 38
Chapter 39
Chapter 40
Chapter 41
Chapter 42
Chapter 43
Chapter 44
Chapter 45
Chapter 46
Chapter 47
Chapter 48
Chapter 49
Chapter 50
Chapter 35 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28
29
30
31
32
33
34
35
36
37
38
39
40
41
42
43
44
45
46
47
48
49
50