bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Hindi
/
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
/
Genesis 42
Genesis 42
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
← Chapter 41
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 37
Chapter 38
Chapter 39
Chapter 40
Chapter 41
Chapter 42
Chapter 43
Chapter 44
Chapter 45
Chapter 46
Chapter 47
Chapter 48
Chapter 49
Chapter 50
Chapter 43 →
1
जब याकूब ने देखा कि मिस्र देश में अन्न है तब उन्होंने अपने पुत्रों से कहा, ‘तुम एक-दूसरे का मुँह क्यों ताक रहे हो?
2
मैंने सुना है कि मिस्र देश में अन्न है। तुम वहाँ जाओ, और हमारे लिए अन्न खरीद कर लाओ, जिससे हम मरें नहीं वरन् जीवित रहें।’
3
अत: यूसुफ के दस भाई अन्न खरीदने के लिए मिस्र देश में आए।
4
याकूब ने यूसुफ के भाई बिन्यामिन को उसके भाइयों के साथ नहीं भेजा। उन्हें भय था कि कहीं बिन्यामिन पर कोई विपत्ति आ न पड़े।
5
आनेवालों में याकूब के पुत्र भी थे जो अनाज खरीदने आए थे, क्योंकि कनान देश में भी अकाल था।
6
यूसुफ मिस्र देश का प्रधान मन्त्री था। वह देश के सब लोगों का अन्न-विक्रेता था। यूसुफ के भाई आए। उन्होंने भूमि की ओर सिर झुका कर यूसुफ का अभिवादन किया।
7
यूसुफ ने अपने भाइयों को देखकर पहचान लिया, परन्तु उनसे अपरिचित-सा व्यवहार किया। उसने उनसे कठोरता से बातें कीं। यूसुफ ने उनसे पूछा, ‘तुम लोग कहाँ से आए हो?’ वे बोले, ‘हम भोजन-सामग्री खरीदने के लिए कनान देश से आए हैं।’
8
यूसुफ ने अपने भाइयों को पहचान लिया, पर उन्होंने उसे नहीं पहचाना।
9
यूसुफ को उन स्वप्नों का स्मरण हुआ, जो उसने अपने भाइयों के विषय में देखे थे। उसने उनसे कहा, ‘तुम लोग गुप्तचर हो, और मिस्र देश के असुरक्षित स्थानों का भेद लेने आए हो।’
10
वे यूसुफ से बोले, ‘नहीं, स्वामी! आपके सेवक भोजन-सामग्री खरीदने के लिए आए हैं।
11
हम सब एक ही पुरुष के पुत्र हैं। हम सच्चे लोग हैं। हम, आपके सेवक, गुप्तचर नहीं हैं।’
12
यूसुफ उनसे बोला, ‘नहीं, तुम लोग मिस्र देश के असुरक्षित स्थानों का भेद लेने आए हो।’
13
उन्होंने कहा, ‘हम आपके सेवक, बारह भाई हैं। हम कनान देश के एक ही पुरुष के पुत्र हैं। सबसे छोटा भाई इस समय हमारे पिता के साथ है, और एक भाई नहीं रहा।’
14
यूसुफ ने उनसे कहा, ‘जो बात मैंने तुमसे कही, वह ठीक है। तुम गुप्तचर हो।
15
तुम्हारी जाँच की जाएगी: फरओ के जीवन की सौगन्ध, जब तक तुम्हारा छोटा भाई यहाँ नहीं आएगा, तब तक तुम यहाँ से नहीं जा सकोगे।
16
तुम अपने में से किसी एक को भेजो कि वह तुम्हारे भाई को लाए। तब तक तुम बन्दी रहोगे जिससे तुम्हारे कथन की जाँच की जा सके कि तुममें सच्चाई है कि नहीं। फरओ के जीवन की सौगन्ध, तुम निश्चय ही गुप्तचर हो।’
17
यूसुफ ने उन सबको तीन दिन तक हिरासत में रखा।
18
यूसुफ ने तीसरे दिन उनसे कहा, ‘यह कार्य करो तो तुम जीवित रहोगे, क्योंकि मैं परमेश्वर से डरता हूँ।
19
यदि तुम सच्चे लोग हो तो तुम्हारा कोई एक भाई हवालात में रहे। शेष भाई अपने भूखे परिवार के लिए अन्न लेकर जाएँ,
20
और अपने सबसे छोटे भाई को मेरे पास लाएँ। इस प्रकार तुम्हारा कथन सच्चा सिद्ध होगा और तुम मरने से बच जाओगे।’ तब उन्होंने वैसा ही किया।
21
उन्होंने आपस में कहा, ‘निस्सन्देह, हम अपने भाई यूसुफ के प्रति दोषी हैं। हमने उसकी आत्मा का कष्ट देखा था। जब उसने हमसे दया की भीख मांगी तब हमने नहीं सुना। अतएव अब यह कष्ट हम पर आया है।’
22
रूबेन ने उनको उत्तर दिया, ‘क्या मैंने तुम लोगों से नहीं कहा था कि लड़के के विरुद्ध पाप न करो! परन्तु तुम लोगों ने मेरी बात नहीं सुनी। अब हमसे उसके रक्त का प्रतिशोध लिया जाएगा।’
23
वे नहीं जानते थे कि यूसुफ उनकी बातें समझ रहा है; क्योंकि उनके मध्य में एक दुभाषिया था।
24
यूसुफ उनके पास से हटकर रोने लगा। वह पुन: उनके पास लौटा और उनसे बातचीत की। यूसुफ ने उनमें से शिमोन को लेकर उनकी आंखों के सम्मुख उसे बन्दी बना लिया।
25
तत्पश्चात् उसने आज्ञा दी कि उनके बोरे अन्न से भर दिए जाएँ। प्रत्येक व्यक्ति के बोरे में उसके रुपए भी रखे जाएँ। उन्हें मार्ग के लिए भोजन-सामग्री भी दी जाए। उनके लिए ऐसा ही किया गया।
26
यूसुफ के भाई अन्न के बोरे अपने गधों पर लादकर चले।
27
जब उनमें से एक भाई ने सराय में अपने गधे को चारा देने के लिए अपना बोरा खोला, तब उसने बोरे के मुंह में अपने रुपए रखे हुए देखे।
28
वह अपने भाइयों से बोला, ‘मेरे रुपए लौटा दिए गए। देखो, ये मेरे बोरे में हैं।’ यह सुनकर वे अचरज में डूब गए। वे भयभीत होकर एक दूसरे को देखने लगे। उन्होंने कहा, ‘परमेश्वर ने हमारे साथ यह क्या किया?’
29
जब वे कनान देश में अपने पिता याकूब के पास आए तब उन्होंने अपने साथ घटी घटनाओं का उल्लेख उनसे किया। उन्होंने कहा,
30
‘मिस्र देश के स्वामी ने हमसे कठोरता से बातें कीं। उसने हमें उस देश में गुप्तचर समझा।
31
परन्तु हमने उससे कहा, “हम सच्चे लोग हैं। हम गुप्तचर नहीं हैं।
32
हम बारह भाई हैं। हम एक ही पिता के पुत्र हैं। एक भाई नहीं रहा। सबसे छोटा भाई इस समय कनान देश में हमारे पिता के पास है।”
33
तब उस देश के स्वामी ने हमसे कहा, “यदि तुम यह कार्य करो तो मुझे ज्ञात हो जाएगा कि तुम सच्चे लोग हो: तुम अपने भाइयों में से एक को मेरे पास छोड़ जाओ। तुम अपने भूखे परिवार के लिए अन्न लेकर जाओ,
34
और अपने सबसे छोटे भाई को मेरे पास लाओ। तब मुझे विश्वास होगा कि तुम गुप्तचर नहीं, वरन् सच्चे लोग हो। मैं तुम्हारे भाई को तुम्हें सौंप दूँगा। तब तुम इस देश में व्यापार भी कर सकोगे।” ’
35
उन्होंने अन्न के बोरे खोले तो देखा कि प्रत्येक व्यक्ति की रुपयों की थैली उसके बोरे में है। जब उन्होंने तथा उनके पिता ने रुपयों की थैलियाँ देखीं तब वे डर गए।
36
उनके पिता याकूब ने उनसे कहा, ‘तुम लोगों ने मुझे सन्तानहीन कर दिया। यूसुफ नहीं रहा। शिमोन भी नहीं रहा। अब तुम बिन्यामिन को ले जाओगे। ये सब विपत्तियाँ मुझ पर ही आ पड़ी हैं।’
37
रूबेन ने अपने पिता से कहा, ‘यदि मैं बिन्यामिन को वापस न लाऊं तो मेरे दोनों पुत्रों का वध कर देना। उसे मेरे हाथ में दीजिए। मैं उसे आपके पास वापस लाऊंगा।’
38
किन्तु याकूब ने कहा, ‘मेरा पुत्र बिन्यामिन तुम्हारे साथ नहीं जाएगा। उसका भाई यूसुफ तो मर चुका और वह अकेला बचा है। जिस मार्ग पर तुम जाओगे यदि उसमें बिन्यामिन पर कोई विपत्ति आ पड़े तो तुम लोग मुझ वृद्ध को शोक-सन्तप्त दशा में ही अधोलोक पहुँचा दोगे।’
← Chapter 41
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 37
Chapter 38
Chapter 39
Chapter 40
Chapter 41
Chapter 42
Chapter 43
Chapter 44
Chapter 45
Chapter 46
Chapter 47
Chapter 48
Chapter 49
Chapter 50
Chapter 43 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28
29
30
31
32
33
34
35
36
37
38
39
40
41
42
43
44
45
46
47
48
49
50