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John 3
John 3
Hindi HSB 2023 (नवीन हिंदी बाइबल)
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1
फरीसियों में से नीकुदेमुस नामक एक मनुष्य था, जो यहूदियों का एक अधिकारी था।
2
वह रात को यीशु के पास आया और उससे कहा, “हे रब्बी, हम जानते हैं कि तू परमेश्वर की ओर से आया हुआ गुरु है, क्योंकि जिन चिह्नों को तू दिखाता है उन्हें जब तक परमेश्वर साथ न हो, कोई दिखा नहीं सकता।”
3
इस पर यीशु ने उससे कहा, “मैं तुझसे सच-सच कहता हूँ, जब तक कोई नए सिरे से जन्म न ले, वह परमेश्वर के राज्य को नहीं देख सकता।”
4
नीकुदेमुस ने उससे पूछा, “मनुष्य बूढ़ा होकर कैसे जन्म ले सकता है? क्या वह अपनी माता के गर्भ में दुबारा प्रवेश करके जन्म ले सकता है?”
5
यीशु ने उत्तर दिया, “मैं तुझसे सच-सच कहता हूँ, जब तक कोई जल और आत्मा से जन्म न ले, वह परमेश्वर के राज्य में प्रवेश नहीं कर सकता।
6
जो शरीर से जन्मा है वह शरीर है और जो आत्मा से जन्मा है, वह आत्मा है।
7
आश्चर्य न कर कि मैंने तुझसे कहा, ‘तुम्हें नए सिरे से जन्म लेना अवश्य है।’
8
हवा जिधर चाहती है उधर चलती है और तू उसकी आवाज़ सुनता है, परंतु नहीं जानता कि वह कहाँ से आती और किधर जाती है। प्रत्येक जो आत्मा से जन्मा है वह ऐसा ही है।”
9
इस पर नीकुदेमुस ने उससे कहा, “यह सब कैसे हो सकता है?”
10
यीशु ने उसे उत्तर दिया, “तू इस्राएलियों का गुरु है, फिर भी इन बातों को नहीं समझता?
11
मैं तुझसे सच-सच कहता हूँ कि जो हम जानते हैं वह कहते हैं, और जो हमने देखा है उसकी साक्षी देते हैं, परंतु तुम हमारी साक्षी ग्रहण नहीं करते।
12
जब मैं तुमसे पृथ्वी की बातें कहता हूँ, तुम विश्वास नहीं करते, तो यदि मैं तुमसे स्वर्ग की बातें कहूँ तो तुम कैसे विश्वास करोगे?
13
कोई भी स्वर्ग पर नहीं चढ़ा, केवल वही जो स्वर्ग से उतरा, अर्थात् मनुष्य का पुत्र ।
14
जिस प्रकार मूसा ने जंगल में साँप को ऊँचे पर चढ़ाया, उसी प्रकार मनुष्य के पुत्र का ऊँचे पर चढ़ाया जाना अवश्य है,
15
ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वह अनंत जीवन पाए।
16
“क्योंकि परमेश्वर ने जगत से ऐसा प्रेम रखा कि उसने अपना एकलौता पुत्र दे दिया, ताकि जो कोई उस पर विश्वास करे वह नाश न हो, परंतु अनंत जीवन पाए।
17
परमेश्वर ने अपने पुत्र को जगत में इसलिए नहीं भेजा कि वह जगत को दोषी ठहराए, परंतु इसलिए कि जगत उसके द्वारा उद्धार पाए।
18
जो उस पर विश्वास करता है, वह दोषी नहीं ठहराया जाता, परंतु जो विश्वास नहीं करता, वह दोषी ठहराया जा चुका है; क्योंकि उसने परमेश्वर के एकलौते पुत्र के नाम पर विश्वास नहीं किया।
19
और दोष यह है कि ज्योति जगत में आ चुकी है, परंतु मनुष्यों ने अंधकार को ज्योति से अधिक प्रिय जाना, क्योंकि उनके कार्य बुरे थे।
20
क्योंकि प्रत्येक जो बुराई करता है, वह ज्योति से घृणा करता है और ज्योति के पास नहीं आता, जिससे उसके कार्य प्रकट न हो जाएँ।
21
परंतु जो सत्य पर चलता है, वह ज्योति के पास आता है, जिससे यह प्रकट हो जाए कि उसके कार्य परमेश्वर की ओर से किए गए हैं।”
22
इन बातों के बाद यीशु और उसके शिष्य यहूदिया प्रदेश में आए, और वह वहाँ उनके साथ रहकर बपतिस्मा देने लगा।
23
यूहन्ना भी शालेम के निकट ऐनोन में बपतिस्मा देता था, क्योंकि वहाँ पानी बहुत था, और लोग आकर बपतिस्मा लेते थे।
24
(तब तक यूहन्ना बंदीगृह में नहीं डाला गया था।)
25
फिर वहाँ यूहन्ना के शिष्यों का एक यहूदी के साथ शुद्धीकरण के विषय में वाद-विवाद हो गया।
26
उन्होंने यूहन्ना के पास आकर उससे कहा, “हे रब्बी, जो यरदन के उस पार तेरे साथ था और जिसकी साक्षी तूने दी है, देख, वह बपतिस्मा दे रहा है और सब लोग उसके पास जा रहे हैं।”
27
इस पर यूहन्ना ने कहा, “जब तक स्वर्ग से न दिया जाए, मनुष्य कुछ भी प्राप्त नहीं कर सकता।
28
तुम स्वयं मेरी साक्षी देते हो कि मैंने कहा था, ‘मैं मसीह नहीं हूँ, परंतु उसके आगे भेजा गया हूँ।’
29
जिसके पास दुल्हन है वही दूल्हा है, और दूल्हे का मित्र जो खड़ा हुआ उसकी सुनता है, वह दूल्हे की आवाज़ से बहुत आनंदित होता है। अतः मेरा यह आनंद पूरा हुआ है।
30
अवश्य है कि वह बढ़े और मैं घटूँ।”
31
जो ऊपर से आता है वह सब के ऊपर है। जो पृथ्वी से है वह पृथ्वी का है, और पृथ्वी की बातें कहता है। जो स्वर्ग से आता है, वह सब के ऊपर है।
32
जो उसने देखा और सुना है, उसकी वह साक्षी देता है। परंतु कोई भी उसकी साक्षी ग्रहण नहीं करता।
33
जिसने उसकी साक्षी ग्रहण कर ली, उसने इस बात पर मुहर लगा दी कि परमेश्वर सच्चा है।
34
क्योंकि जिसे परमेश्वर ने भेजा है, वह परमेश्वर की बातें कहता है, क्योंकि परमेश्वर उसे बिना नाप-तोल के आत्मा देता है।
35
पिता पुत्र से प्रेम रखता है, और उसने सब कुछ उसके हाथ में सौंप दिया है।
36
जो पुत्र पर विश्वास करता है, अनंत जीवन उसका है। परंतु जो पुत्र की नहीं मानता, वह जीवन को नहीं देखेगा, बल्कि परमेश्वर का प्रकोप उस पर बना रहता है।
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