bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Kumaoni
/
kumaoni
/
Matthew 18
Matthew 18
kumaoni
← Chapter 17
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 19 →
1
उ बखत शिष्य यीशु का पास आभेरन पुछून लागनान, “स्वर्ग का राज्य में भटे सबून है ठूलो को छै।”
2
यो सुणिभेरन यीशु ले एक नानतिनास पास बुलाभेरन उनार बीच में ठाँड़ करछ्य,
3
और क्योछ, “मैं तुमूनथैं सच्ची कुछूँ, अगर तुम अपून पापून को पश्चाताप करभेरन नान-नानतिना का समान बनला, तभै तुम स्वर्ग का राज्य में जा सकला।
4
जो कोई अपून आपस यो नन्तिनाका नियाति नानो करोलो, उ स्वर्ग का राज्य में ठूलो होलो।
5
जो कोई म्यारा नाम ले इसा नान नानतिनास अपनूछो और उकी मद्दत करछो, मैंस अपनूछो और जो म्येरो स्वागत करछो।
6
फिर यीशु ले क्योछ, जो कोई इन नान है नान मैंमें विश्वास करनान, कैथैं ले पाप करून को कारण बननान, उ खिन यो निको छै, कि उ गाल में एक ठूलो ढूंगो बाँदीभेरन झील में फटंग हाँड़ो।
7
ठोकरून का कारण ले संसार में धिक्कार! ठोकरून को लागून जरूरी छै; लेकिन धिक्कार छै उ आदिमी खिन जैका दवारा ठोकर लागछी।
8
अगर तेरो हात या तेरो खुटो तैथैं पाप करूँछो, त उनून काटिभेरन खिती दे, टुण्डो या डुणो हो भेरन तैं परमेश्वरा का राज्य में जाले यो तैखिन निको छै। इसो नै हो कि तुम द्वी हात और द्वी खुटान लीभेरन हमेशा की आग में खिती जला, जांक आग में तैंस हमेशा तलक जलनै रौला।
9
अगर तेरो आँख तैथैं पाप करूँछो, त ऊस निकालभेरन खिती दी, क्याखिनकि एक आँख लीभेरन तैं परमेश्वरा का राज्य में जाले यो तैखिन निको छै। इसो नै हो कि तैं द्वी आँख लीभेरन नरक की आग में खिती जला, जांक आग में तुम हमेशा तलक जलनै रौला।
10
देखा, तुम इन नान है-नान स कैसे ले तुच्छ जन समझया; क्याखिनकि मैं तुमूनथैं कुंछू कि स्वर्ग में उक स्वर्गदूत हमेशा म्यारा पिता का सामुनि ठाड़ रूनान।
11
क्याखिनकि मैं आदिमी को च्योलो भटकिना का लोगून बचुन खिन आ रियो छै।
12
तुम कि सोचछा? अगर कोई आदिमी का सौ भेड़ हुन, उमें भटे एक हरा जौ, तो क्या उ उन निन्यानबे भेड़ू अपून दगाड़ वाला का पास सुरक्षित जॉगा में छोड़भेरन उ हराईना कि भेड़स खोजन खिन नी जालो?
13
और उ ऊस मिल जौ, त मैं तुमूनथैं सच्ची कुंछू उ उन निन्यानबे भेड़ून खिन जो हराईना का नी छ्या, उ पाईना का भेड़ खिन ज्यादा खुशी मनालो।
14
इसो तुमोरो स्वर्गीय पिता ले नै चानो कि कोई नान है-नानो ले नाश हो।
15
अगर एक विश्वासी भाई तेखिन बुरो करो, त जाभेरन एकला में उक दगाड़ बात कर और ऊस समझो; और अगर उ विश्वासी भाई पश्चताप करो, तो तैले अपून भाई वापस पा हालछै।
16
अगर उ तेरि बात नै माननो, त अपून दगाड़ एक-द्वी जन लिजा, क्याखिनकि मूसा का नियम का अनुसार, कोई ले आरोपस द्वी या उ है ज्यादा गवैन का द्वारा ठीक साबित करि जान चैंछो।”
17
अगर उ उनेरि ले नै सुणो तो विश्वासीन की मण्डली थैं कै दे, अगर उ मण्डली कि ले नै सुणो, तो उक दगाड़ ऊसोई ब्यवहार कर जसो तुम गैर-यहूदी या चुंगी लीनवालान का दगाड़ करछा।
18
मैं तुमूनथैं सच्ची कुछूँ, जो ले तुम धरती में बांधला, उ स्वर्ग में बाँदि जालो। और जो कुछ तुम धरती में खोलला, उ स्वर्ग में खुलि जालो।
19
मैं तुमूनथैं फिर कुछूँ, अगर तुमून में भटे द्वी जन धरती में कोई विनती खिन एक मन हो त, उ म्यारा स्वर्गीय पिता तरफ भटे उनून खिन पुरी हो जालि
20
क्याखिनकि जाँ द्वी या तीन म्यारा नाम में जामा हुनान, वाँ में उनार बीच में छूँ।
21
तब पतरस ले पास आभेरन यीशु थैं क्योछ, “प्रभु अगर कोई विश्वासी भाई म्यारा विरूद्ध बुराई करनै रौ, त मैंस ऊस कतुक बार माफ करूँ, क्या सात बार तक?”
22
यीशु ले उथैं क्योछ, “मैं तैथैं यो नै कुनूं कि सात बार तक बल्कि सात बाराका सत्तर गुना तक माफ कर।”
23
स्वर्ग राज्य उ राजा जसो छै, जेले अपून दासूनथैं लेखा लीन चाँछ।
24
जब उ हिसाब लीन लागछ्यो, त एक आदिमी उक सामुनि आछ जैमें सुना का सिक्कान को दस हजार बोरिन को कर्जदार छ्यो।
25
लेकिन जब उक पास कर्ज चुकून खिन के नी छ्यो त उक राजा ले आज्ञा दीछ कि ऊस और उकी स्यैनि, नान्तिनान, और जो कुछ उक पास छै, सब बेचिभेरन कर्ज चुका दी जौ
26
येक कारण उ दास ले राजा का खुटान में पड़भेरन ऊस प्रणाम करछ्य, और क्योछ, मालिक धैर्य रखा। मैं सब कुछ चुका द्यूलो।
27
तब राजा ले उ दास में तरस खाभेरन ऊस छोड़ दीछ, और उको सब कर्ज माफ कर दीछ
28
लेकिन उ दास भ्यार निकलछ्य, त उकी मुलाकात अपून दगड़िया दासून में भटे एक थैं भैछ जो उको सौ चाँदी का सिक्कान को कर्जदार छ्यो; उले ऊस पकडछ्य और उको गलो दबाभेरन क्योछ, “म्येरो कर्ज चुकौ।”
29
तब उको दगड़िया दास उ पड़भेरन विनती करून लागछ्य, धैर्य राख, मैं सब कुछ द्यूलो।
30
फिरले उ नै मानियो और ऊस तब तक खिन जेल में डाल दीछ, जब तक उले कर्ज चुका नै दीयो।
31
यो देखिभेरन उक दगड़िया दास भौत दुखी भ्यान, और उनूनले जाभेरन राजा स यो घटना बताछ।
32
तब उक राजा ले ऊस बुलाभेरन क्योछ, हे दुष्ट दास! तैले जो मैंथै विनती करछ्य, तो मैंले तेरो सब कर्ज माफ कर दीछ।
33
येका कारण जसी दया मैंले तैंमें करछ्य, क्या तैले अपून दगड़िया दास में दया नै करून चैछी?
34
और राजा ले क्रोध में आभेरन ऊस सजा दिनवालान का हात में सौप दीछ, कि कर्ज चुकूनो तब तक उनार हातून में रौ।
35
इसीकैं अगर तुमून में भटे हरेक अपून विश्वासी भाई मन है माफ नै करोलो त म्येरो स्वर्गीय पिता ले तुमार दगाड़ ऊसो करोलो।
← Chapter 17
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 19 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28