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Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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Hebrews 13
Hebrews 13
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
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1
अहाँ सभ एक-दोसर केँ अपन लोक मानि प्रेम करैत रहू।
2
अनचिन्हारो सभक अतिथि-सत्कार कयनाइ नहि बिसरू, कारण, एहि तरहेँ किछु लोक बिनु जनने स्वर्गदूत सभक सेवा-सत्कार कयने छथि।
3
जहल मे राखल लोक सभक ओहिना सुधि लिअ जेना अहाँ अपने ओकरा संग जहल मे राखल होइ। जे सभ सताओल जाइत अछि तकरो सभ पर ध्यान दिअ कारण, अहूँ सभ ओकरे सभ जकाँ हाड़-माँसुक छी।
4
सभ केओ विवाह-बन्धन केँ आदरक दृष्टि सँ देखथि। वैवाहिक सम्बन्ध दुषित नहि कयल जाय कारण, जे अनैतिक सम्बन्ध रखैत अछि, चाहे ओ विवाहित होअय वा अविवाहित, परमेश्वर तकरा दण्ड देताह।
5
अहाँ सभ धनक लोभ सँ मुक्त रहू। जे किछु अहाँ लग अछि ताहि सँ सन्तुष्ट रहू, कारण परमेश्वर कहने छथि, “हम तोहर संग कहियो नहि छोड़बह कहियो तोरा नहि त्यागबह।”
6
तेँ अपना सभ साहसक संग कहैत छी, “प्रभु हमर सहायता कयनिहार छथि, हम कोनो बात सँ नहि डेरायब। मनुष्य हमरा करत की?”
7
अहाँ सभ अगुआ सभक ओहि पहिल समूहक स्मरण करू जे सभ अहाँ सभ केँ परमेश्वरक वचन सुनौलनि। हुनका सभक जीवन-शैली आ तकर परिणाम की भेल ताहि पर विचार करू। जाहि तरहेँ ओ सभ परमेश्वर पर भरोसा रखलनि, ताही तरहेँ अहूँ सभ हुनका पर भरोसा राखू।
8
यीशु मसीह काल्हि, आइ आ अनन्त काल तक एक समान छथि।
9
अनेक प्रकारक विचित्र शिक्षाक फेरी मे नहि पड़ू। नीक ई अछि जे अपना सभ अपन हृदय केँ परमेश्वरक कृपा सँ बलगर बनाबी, नहि कि खान-पान सम्बन्धी नियम सभ सँ, किएक तँ ओहन नियम मानऽ वला लोक सभ केँ कहियो ओहि सँ कोनो लाभ नहि होइत छैक।
10
अपना सभ केँ एक वेदी अछि जाहि पर एहन बलि चढ़ाओल गेल छथि जाहि मे भाग लेबाक अधिकार तकरा सभ केँ नहि छैक जे सभ एखनो मूसाक धर्म-नियम मानि मिलाप-मण्डप मे सेवा-काज करैत अछि।
11
महापुरोहित बलिपशु सभक खून पापक प्रायश्चित्तक लेल परमपवित्र स्थान मे लऽ जाइत छथि, मुदा ओहि पशु सभक लास बस्ती सँ बाहर जराओल जाइत अछि।
12
तहिना यीशु सेहो अपना खून द्वारा लोक सभ केँ पवित्र करबाक लेल नगरक छहरदेवाली सँ बाहरे दुःख भोगलनि।
13
तेँ अपनो सभ हुनका संग कयल गेल अपमान अपना पर स्वीकार कऽ कऽ हुनका लग, मानू बस्ती सँ बाहर, चली।
14
कारण, एहि पृथ्वी पर अपना सभक कोनो स्थायी नगर नहि अछि, बल्कि अपना सभ ओहि नगरक बाट तकैत छी जे भविष्य मे आबऽ वला अछि।
15
तेँ अपना सभ यीशुक माध्यम सँ परमेश्वर केँ स्तुति-बलिदान सदत चढ़बैत रही, अर्थात् मुँह सँ हुनकर नामक गुणगान रूपी चढ़ौना।
16
आ तकरा संग अहाँ सभ भलाइक काज कयनाइ आ अपन चीज-वस्तु सँ दोसराक सहायता कयनाइ नहि बिसरू, कारण एहन बलिदान सँ परमेश्वर प्रसन्न होइत छथि।
17
अहाँ सभ अपन अगुआ सभक आज्ञा मानू आ हुनका सभक अधीन मे रहू। कारण, अहाँ सभक लेल लेखा देबऽ पड़तनि से जानि हुनका सभ केँ दिन-राति अहाँ सभक आत्मिक कल्याणक चिन्ता रहैत छनि। हुनका सभक अधीन मे रहू, जाहि सँ ओ सभ अपन कर्तव्य आनन्दक संग पूरा कऽ सकथि, नहि कि दुःखक संग, किएक तँ ओहि सँ अहाँ सभ केँ कोनो लाभ नहि होइत।
18
हमरा सभक लेल प्रार्थना करैत रहू, कारण, हम सभ अपन मोन शुद्ध बुझैत छी। हम सभ हर बात मे वैह करऽ चाहैत छी जे सही अछि।
19
हम जल्दिए अहाँ सभक बीच फेर आबि सकी, ताहि लेल प्रार्थना करबाक लेल हम विशेष रूप सँ आग्रह करैत छी।
20
शान्ति देबऽ वला परमेश्वर अहाँ सभ केँ सभ प्रकारक नीक गुण सँ सम्पन्न करथि जाहि सँ अहाँ सभ हुनकर इच्छा पूरा कऽ सकियनि। ओ तँ वैह छथि जे भेँड़ा सभक ओहि महान् चरबाह केँ, अर्थात् अपना सभक प्रभु यीशु केँ, हुनकर बहाओल खूनक आधार पर मृत्यु सँ फेर जिऔलथिन और ओहि खून द्वारा अपना लोकक संग अनन्त कालीन विशेष सम्बन्ध स्थापित कयलनि। जाहि काज सँ हुनका प्रसन्नता भेटैत छनि तकरा ओ यीशु मसीहक माध्यम सँ अपना सभ मे सम्पन्न करथि। यीशु मसीहक गुणगान अनन्त काल धरि होनि! आमीन।
22
यौ भाइ लोकनि, अहाँ सभ हमर एहि उपदेश पर धैर्यपूर्बक ध्यान दिअ, से हमर आग्रह अछि, कारण, हम अहाँ सभ केँ एक छोटेटा पत्र लिखलहुँ।
23
एकटा ई समाचार सुनबैत छी जे अपना सभक भाय तिमुथियुस केँ जहल सँ छोड़ि देल गेलनि। ओ जँ जल्दी एतऽ पहुँचताह तँ हम हुनका संग लऽ कऽ अहाँ सभ सँ भेँट करबाक लेल आयब।
24
अहाँ सभ अपन अगुआ लोकनि आ प्रभुक सभ लोक केँ हमरा सभक नमस्कार कहिऔन। इटली देशक भाय सभ सेहो अहाँ सभ केँ अपन नमस्कार पठबैत छथि।
25
अहाँ सभ गोटे पर परमेश्वरक कृपा बनल रहय। आमीन।
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