bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Maithili
/
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
/
Hebrews 7
Hebrews 7
Maithili - 2010 (Jivən Səndesh)
← Chapter 6
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 8 →
1
ई मलकीसेदेक शालेम नगरक राजा आ सर्वोच्च परमेश्वरक पुरोहित छलाह। अब्राहम जखन चारिटा राजा सभ केँ पराजित कऽ कऽ आबि रहल छलाह तखन मलकीसेदेक हुनका सँ भेँट कऽ आशीर्वाद देलथिन
2
और अब्राहम राजा सभ सँ जे धन-सम्पत्ति जिति कऽ अनने छलाह ताहि मे सँ दसम अंश मलकीसेदेक केँ देलथिन। मलकीसेदेकक नामक अर्थ अछि “धार्मिकताक राजा”। फेर, शालेमक अर्थ अछि “शान्ति”, तेँ शालेमक राजा होयबाक कारणेँ हुनकर नामक अर्थ “शान्तिक राजा” सेहो भेलनि।
3
मलकीसेदेकक माय-बाबू आ पूर्वज सभक सम्बन्ध मे किनको कोनो चर्चा नहि अछि आ ने हुनकर जन्म आ मृत्युक चर्चा अछि। ओ परमेश्वरक पुत्र जकाँ अनन्त कालक लेल पुरोहित छथि।
4
मलकीसेदेक कतेक पैघ छलाह ताहि पर ध्यान करू—अपना सभक कुल-पिता अब्राहमो जिति कऽ आनल सम्पत्ति मे सँ हुनका दसम अंश देलथिन।
5
लेवीक सन्तान सभ मे सँ जे सभ पुरोहित बनैत अछि तकरा सभ केँ इस्राएली समाजक लोक, अर्थात् अपना भाय-बन्धु सभ सँ दसम अंश लेबाक आज्ञा धर्म-नियम मे देल गेल छैक, जखन कि सभ अब्राहमेक वंशज अछि।
6
मुदा मलकीसेदेक जे लेवी वंशक नहि छलाह से स्वयं अब्राहम सँ दसम अंश लेलनि आ अब्राहम केँ, जिनका परमेश्वर अपन वचन देने छलाह, आशीर्वाद देलथिन।
7
ई निर्विवाद बात अछि जे आशीर्वाद देबऽ वला व्यक्ति आशीर्वाद पाबऽ वला व्यक्ति सँ पैघ होइत अछि।
8
एक दिस मरऽ वला मनुष्य, ⌞अर्थात् लेवी वंशज सभ,⌟ दसम अंश पबैत अछि, मुदा दोसर दिस वैह दसम अंश पौलनि जिनका सम्बन्ध मे साक्षी देल गेल अछि जे ओ जीवित छथि, ⌞अर्थात् मलकीसेदेक⌟।
9
एहि सँ इहो कहल जा सकैत अछि जे लेवी, जकर सन्तान सभ दसम अंश पबैत अछि सेहो अपन पूर्वज अब्राहमक माध्यम सँ दसम अंश देलक।
10
कारण मलकीसेदेक आ अब्राहमक भेँट जहिया भेलनि, लेवी तहिओ अपन पूर्वज अब्राहमक शरीर मे उपस्थित छल।
11
इस्राएली समाज केँ देल गेल धर्म-नियम तँ लेवीक कुलक पुरोहित वला व्यवस्था पर आधारित छल। तेँ ओहि पुरोहित वला व्यवस्था द्वारा जँ लोक परमेश्वरक नजरि मे धार्मिक ठहराओल जा सकैत छल, तँ अन्य प्रकारक पुरोहित अयबाक आवश्यकता किएक होइत जे लेवीक कुलक हारूनक अनुरूप नहि, बल्कि मलकीसेदेकक अनुरूप छथि?
12
जखन पुरोहित वला व्यवस्था बदलि जाइत अछि तखन ई आवश्यक अछि जे धर्म-नियम केँ सेहो बदलल जाय।
13
अपना सभक प्रभु, जिनका विषय मे ई बात सभ कहल गेल, से एक दोसर कुलक छथि जाहि मे सँ कहियो केओ पुरोहितक रूप मे बलि-वेदी लग सेवा नहि कयलक।
14
कारण, ई स्पष्ट अछि जे हुनकर जन्म यहूदाक कुल मे भेलनि और मूसा जखन पुरोहितक पदक विषय मे लिखैत छलाह तँ एहि कुलक कोनो चर्चा नहि कयलनि।
15
ई बात आरो स्पष्ट भऽ जाइत अछि जखन अपना सभ देखैत छी जे मलकीसेदेकक अनुरूप दोसर पुरोहित ठाढ़ भेलाह
16
जे कोनो वंश-क्रम पर आधारित नियमक अनुसार नहि, बल्कि अविनाशी जीवनक सामर्थ्यक आधार पर पुरोहित बनल छथि।
17
कारण, हुनका विषय मे यैह गवाही देल गेल अछि जे, “जाहि व्यवस्थाक अनुसार मलकीसेदेक पुरोहित भेलाह, ताही व्यवस्थाक अनुसार अहाँ पुरोहित भऽ अनन्त समयक लेल पुरोहित छी।”
18
एहि तरहेँ पहिलुका नियम निर्बल आ अनुपयोगी होयबाक कारणेँ रद्द कऽ देल गेल,
19
कारण, ओहि धर्म-नियम द्वारा केओ धार्मिक नहि भऽ सकैत छल। और आब ओकरा बदला मे ओहि सँ नीक बात देल गेल अछि, अर्थात्, ओ आशा जकरा द्वारा अपना सभ परमेश्वर लग अबैत छी।
20
परमेश्वर बिनु सपत खा कऽ पुरोहितक पद यीशु केँ नहि देलनि। आन पुरोहित सभ बिनु सपतक नियुक्त कयल गेल।
21
मुदा यीशु सपतक संग पुरोहित बनाओल गेलाह जखन परमेश्वर हुनका कहलथिन, “प्रभु सपत खयने छथि आ अपना विचार सँ ओ फिरताह नहि—अहाँ अनन्त समयक लेल पुरोहित छी।”
22
एहि सपत द्वारा यीशु परमेश्वर आ लोकक बीच एक एहन नव सम्बन्धक जमानत भेल छथि जे पहिल सम्बन्ध सँ श्रेष्ठ अछि।
23
एतबे नहि, ओहि पुरोहित सभक संख्या विशेष भेल, कारण मृत्यु ओकरा सभ केँ स्थायी नहि रहऽ देलक।
24
मुदा यीशु सदाकालक लेल जीवित छथि आ तेँ हुनकर पुरोहितक पद स्थायी छनि।
25
निष्कर्ष ई जे, जे सभ यीशु द्वारा परमेश्वर लग अबैत अछि तकरा सभक पूरा-पूरा उद्धार करऽ मे यीशु सामर्थी छथि, कारण, ओ ओकरा सभक पक्ष सँ निवेदन करबाक लेल सर्वदा जीवित छथि।
26
एहि तरहेँ अपना सभ केँ जाहि प्रकारक महापुरोहितक आवश्यकता अछि, यीशु ठीक ओहने महापुरोहित छथि। ओ पवित्र, निर्दोष, निष्कलंक छथि, पापी सभ सँ अलग कयल और सर्वोच्च स्वर्ग मे प्रतिष्ठित कयल गेल छथि।
27
आन महापुरोहित सभ जकाँ हुनका प्रतिदिन पहिने अपना पापक लेल तखन फेर लोक सभक पापक लेल बलि चढ़ाबऽ नहि पड़ैत छनि। ओ अपने केँ बलि चढ़ा कऽ एके बेर मे सदाकालक लेल बलि चढ़ौलनि।
28
धर्म-नियम द्वारा महापुरोहित सभ मनुष्ये सभ मे सँ नियुक्त कयल जाइत अछि, और मनुष्य निर्बल अछि, मुदा ओ सपत जे धर्म-नियमक बाद खायल गेल, ताहि सपत द्वारा परमेश्वरक पुत्र नियुक्त कयल गेलाह आ ओ सदाकालक लेल सिद्ध बनाओल गेल छथि।
← Chapter 6
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 8 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13