bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Marwari
/
Marwari Bible
/
Acts 28
Acts 28
Marwari Bible
← Chapter 27
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
1
जद म्हौ बच निकळिया, तो पतौ चालयौ की ओ टापू माल्टा कहीजै है।
2
उठै रै रैवासियो नै म्हौरै माथै अनोखी करपा की, मेंह बरसनै रै कारण ठंड ही, इण वास्तै उणौनै अग्नि सळगायनै म्हौ सगळौ नै ठैराया।
3
जद पौलुस नै लकड़ियो रौ गटो भेळौ करनै अग्नि माथै राख्यौ, तो एक सांप तपती ऊं बारै निकळयौ अर उणरै हाथ नै डस नै लटक गियौ।
4
जद उण रैवासियो नै सांप नै उणरै हाथ ऊं लटकियोड़ो देख्यौ, तो आपस में कयौ, “साचांणी ओ मिनख खूनी है की जे समंदर ऊं बच गियौ, तौभी न्याव रौ देवता इणनै जीवतौ रैवण नीं दैला।”
5
तद पौलुस सांप नै अग्नि में झटक दियौ, पण पौलुस नै कीं नुकसाण नीं होयौ।
6
पण वे बाट जोहता हा की वो सूज जावैला या एकाएक पड़नै मर जावैला, पण जद वे सगळा घणी जेज तांई देखता रिया अर देख्यौ की उणरौ कीं भी नीं बिगड़यौ, तो अपणौ विचार बदळनै कयौ, “ओ तो कोई देवता है।”
7
उण जगा रै आजू-बाजू उण टापू रै परधान पुबलियुस री धरती ही। उणै म्हौ नै आपरै घर ले जायनै तीन दिन मित्रभाव ऊं सेवा-चाकरी करी।
8
पुबलियुस रौ पिता ताव अर पेचिस ऊं बीमार पड़ियौ हो। तो पौलुस नै उणरै घर में जायनै पराथना की, अर उण माथै हाथ राखनै पराथना की अर उणनै सावळ कियो।
9
जद ऐड़ौ होयौ तो उण टापू रा बाकी बीमार आया अर उणौनै सावळ किया।
10
उणौनै म्हौरौ घणौ ही आदर कियो, अर जद म्हौ चालनै लागा तो जिकौ कीं म्हौरै लिए जरुरी हो, वो जहाज माथै राख दिया।
11
तीन महीना रै पछै म्हौ सिकन्दरिया रै एक जहाज में चाल निकळिया, जिकौ उण टापू में जहाज ठंडी में रुकयोड़ौ हो, अर जिणरौ चिन्ह दियुसकूरी हो।
12
सुरकूसा नगरी में जा पूगा उठै म्हौ तीन दिन ठैरया।
13
उठै ऊं म्हौ फिरनै रेगियुम नगरी में आया, अर एक दिन रै पछै दखण हवा चाली, तद म्हौ दूजै दिन पुतियुली नगरी में आया।
14
उठै म्हौ नै विसवासी भाई मिळिया, अर उणौरै कैवण ऊं म्हौ उणौरै उठै सात दिन तांई रिया, अर इण रीति ऊं म्हौ रोम चालया।
15
उठै ऊं विसवासी भाई म्हौरा समाचार सुणनै अप्पियुस रै चौक अर तीन-सराय तांई म्हौरै ऊं मिळनै आया, जिणौनै देखनै पौलुस नै परमेसर रौ धन्यवाद कियो अर हीमत बांधी।
16
जद म्हौ रोम में पूगा, तो पौलुस नै अलग ऊं रैवण री आग्या दे दी ही अर उणरी निगरानी में एक सैनिक राख दियौ हो।
17
तीन दिन रै पछै पौलुस यहूदियो रै मुखिया लोगां नै बुलाया, अर जद वे भेळा होया तो उण ऊं कयौ, “हे भाइयो, म्हैं अपणै लोगां रै या बापदादों रै व्यवहारों रै विरोध में कीं भी नीं कियो, तौभी बंदी बणायनै यरुसलेम ऊं रोमियो रै हाथ सूंप दियौ।
18
उणौ म्हनै जांच नै छोड़ दैणौ चाहयौ, क्यूंकै म्हारै में मारणै रै लायक कोई दोस नीं हो।
19
पण जद यहूदी इणरै विरोध में बोलण लागा, तो म्हनै कैसर री विनती करणी पड़ी। आ कोनीं की म्हनै अपणै लोगां माथै कोई दोस लगाणौ हो।
20
इण वास्तै म्हैं थनै बुलायौ है की थारै ऊं मिळूं अर बातचीत करूं, क्यूंकै इजरायल रै मसीहा री आसा रै खातर म्हैं इण जंजीर ऊं बंधयोड़ौ हूं।”
21
उणौनै उण ऊं कयौ, “नीं म्हौ थारै बारै में यहूदी मुखियां ऊं चिठ्ठियो पाई, अर नीं भाइयो में ऊं किणी नै आयनै थारै बारै में कीं बतायौ अर नीं भूंडौ कयौ।
22
पण थारौ विचार कांई है? वोहीज म्हौ थारै ऊं सुणणौ चावौ हो, क्यूंकै म्हौ जांणौ हो की हरैक जगा मसीह मत रै विरोध में लोग बातां करै है।”
23
तद उणौनै उणरै लियै एक दिन ठैरायौ, अर घणाहारा लोग उणरै उठै भेळा होया। अर वो परमेसर रै राज री गवाई देता होया, अर मूसा री व्यवस्था अर भविसयदाताओ री किताबो ऊं यीसु रै बारै में समझा-समझायनै सवार ऊं सिंझ्या तांई वरणन करतौ रियौ।
24
तद कईक नै उण बातां नै मांन ली, अर कईको नै विसवास नीं कियो।
25
जद वे आपस में एक मत नीं होया, तो पौलुस री इण बात रै कैवण ऊपर चाल दिया। “पवितर आतमा नै यसायाह भविसयदाता रै द्धारा थौरे बापदादों ऊं ठीक ही कयौ,
26
‘जायनै इण लोगां ऊं कैह, “की सुणता तो रैवौला, पण नीं समझोला, अर देखता तो रैवौला, पण थांनै दिखाई नीं दैला।”
27
क्यूंकै इण लोगां रौ मन मोटा अर उणौरा कांन भारी हो गिया है, अर उणौनै आपरी आंख बंद की है, ऐड़ौ नीं हो की वे कदैई आंखों ऊं देखे, अर कांनो ऊं सुणै अर मन ऊं समझै अर फिरै, अर म्हैं परमेसर आत्मिक चंगा भला करूंला।’
28
“अतस थै जांणौ की परमेसर रै इण उद्धार री कथा दूजी जातियो रै खनै भेजी गी है, अर वे सुणैला।”
29
जद उणै ओ कयौ तो यहूदी आपस में घणौ विवाद करनै लागा अर उठै ऊं चाल दिया।
30
पौलुस पूरै दो बरस अपणै भाड़ै रै घर में रियौ, अर जिकौ उणरै खनै आता हा, पौलुस सबां ऊं मिळतौ रियौ।
31
अर बिना रोक-टोक घणौ निडर होयनै परमेसर रै राज रौ परचार करतौ अर परभु यीसु मसीह री बातां सिखातौ रियौ।
← Chapter 27
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28