bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Urdu
/
Urdu UCVD (उर्दू हमअस्र तरजुमा)
/
Hebrews 4
Hebrews 4
Urdu UCVD (उर्दू हमअस्र तरजुमा)
← Chapter 3
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 5 →
1
पस जब ख़ुदा के आराम में दाख़िल होने का वादा अभी तक बाक़ी है तो हमें ख़बरदार रहना चाहिये ताके कहीं ऐसा न हो के तुम में से कोई उस में दाख़िल होने से महरूम रह जाये।
2
क्यूंके हमें भी उन ही की तरह इलाही ख़ुशख़बरी सुनाई गई थी जैसे उन्हें सुनाया गया था, लेकिन जो पैग़ाम उन्होंने सुना वो उन के लिये बेफ़ाइदा साबित हुआ क्यूंके उन का ईमान ख़ुदा के फ़रमांबरदार लोगों के ईमान जैसा नहीं था।
3
और अब हम जो ईमान ला चुके हैं, ख़ुदा के इस आरामगाह में दाख़िल होते हैं, जैसा के ख़ुदा ने फ़रमाया है, “इसलिये मैंने अपने क़हर में क़सम खाई के, ‘ये लोग मेरे इस आरामगाह में हरगिज़ दाख़िल न होंगे। ’ ” हालांके काइनात के ख़ल्क़ के वक़्त से ही ख़ुदा के काम पूरे हो चुके थे।
4
क्यूंके ख़ुदा के सातवें दिन की बाबत किताब-ए-मुक़द्दस में यूं फ़रमाया, “चुनांचे सातवें दिन वो अपने सारे काम से फ़ारिग़ हुआ।”
5
और फिर दूसरे मक़ाम पर फ़रमाता है, “ये लोग मेरी उस आरामगाह में हरगिज़ दाख़िल न होंगे।”
6
चुनांचे जब अभी भी बाज़ लोग इस आराम में दाख़िल हो सकते हैं, लेकिन जिन्होंने पहले ये ख़ुशख़बरी सुनी वो अपनी नाफ़रमानी के सबब से दाख़िल न हो सके।
7
तो फिर यही वजह है के ख़ुदा फिर एक ख़ास दिन मुक़र्रर करता है, जिसे वह “आज का दिन” कहता है और कई मुद्दत के बाद वह हज़रत दाऊद की किताब ज़बूर में उसे “आज का दिन” कहता है जैसा पहले ज़िक्र हो चुका है के, “अगर, आज तुम उस की आवाज़ सुनो, तो अपने दिलों को सख़्त न करो।”
8
और अगर यशु-अ ने उन्हें आराम दिया होता तो ख़ुदा उस के बाद एक और दिन का ज़िक्र न करता।
9
लिहाज़ा ख़ुदा के लोगों के लिये सबत का आराम बाक़ी है।
10
क्यूंके जो कोई ख़ुदा के आराम में दाख़िल होता है वह ख़ुदा की तरह अपने कामों को पूरा कर के आराम करता है।
11
लिहाज़ा आओ! हम उस आराम में दाख़िल होने की पूरी कोशिश करें ताके कोई शख़्स उन की तरह नाफ़रमानी कर के हलाक न हो जाये।
12
क्यूंके ख़ुदा का कलाम ज़िन्दा, मोअस्सर और हर दो धारी तलवार से ज़्यादा तेज़ है जो हमारे अन्दर जा कर हमारी रूह, जान, बन्द-बन्द और गूदे-गूदे को चीरता हुआ गुज़र जाता है और हमारे दिल के ख़यालों और इरादों को जांचता है।
13
और काइनात की कोई चीज़ ख़ुदा की नज़र से पोशीदा नहीं है और उस की आंखों के सामने हर चीज़ खुली और बेपर्दा है जिसे हमें भी हिसाब देना है।
14
पस जब हमारा एक ऐसा आला काहिन ख़ुदा का बेटा हुज़ूर ईसा हैं जो आलमे-बाला पर ख़ुदा की हुज़ूरी में पहुंच चुके हैं, तो आओ हम अपने ईमान पर मज़बूती से क़ाइम रहें।
15
क्यूंके हमारा आला काहिन ऐसा नहीं जो हमारी कमज़ोरियों में हमारा हमदर्द न हो सके बल्के वह सब बातों में हमारी तरह आज़माया गया तो भी बेगुनाह रहा।
16
लिहाज़ा हम ख़ुदा के फ़ज़ल के तख़्त के पास दिलेरी से चलें ताके हम पर रहम हो, और वह फ़ज़ल हासिल करें जो ज़रूरत के वक़्त हमारी मदद करे।
← Chapter 3
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 5 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13