bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Urdu
/
Urdu UCVD (उर्दू हमअस्र तरजुमा)
/
Luke 23
Luke 23
Urdu UCVD (उर्दू हमअस्र तरजुमा)
← Chapter 22
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 24 →
1
तब पूरी मज्लिस उठी और हुज़ूर ईसा को पीलातुस के पास ले गई।
2
और आप पर ये कह कर इल्ज़ाम लगाने लगे, “के हम ने इसे हमारी क़ौम को बहकाते पाया है। वह क़ैसर को महसूल अदा करने से मना करता है और दावा करता है के मैं अलमसीह, और एक बादशाह हूं।”
3
तब पीलातुस ने हुज़ूर ईसा से पूछा, “क्या आप यहूदियों के बादशाह हैं?” हुज़ूर ईसा ने उसे जवाब दिया, “तुम ने ख़ुद ही कह दिया।”
4
पीलातुस ने अहम-काहिनों और अवाम से कहा, “मैं इस शख़्स में कोई क़ुसूर नहीं पाता।”
5
लेकिन वह इसरार कर के कहने लगे, “वह पूरे यहूदिया में गलील से ले कर यहां तक लोगों को अपनी तालीम से उकसाता है।”
6
जब पीलातुस ने ये सुना तो उस ने पूछा, क्या ये आदमी गलीली है?
7
और जूंही उसे मालूम हुआ के वह हेरोदेस की अमलदारी का है, उसे हेरोदेस के पास भेज दिया जो इन दिनों ख़ुद भी यरूशलेम में था।
8
जब हेरोदेस ने हुज़ूर ईसा को देखा, तो निहायत ख़ुश हुआ, इसलिये के उसे एक अर्से से हुज़ूर ईसा को देखने की ख़ाहिश थी और उस ने आप के बारे में बहुत सी बातें सुन रख्खी थीं और उसे उम्मीद थी के वह हुज़ूर ईसा का कोई मोजिज़ा भी देख सकेगा।
9
उस ने हुज़ूर ईसा से बहुत कुछ पूछा, लेकिन हुज़ूर ईसा ने उसे कोई जवाब न दिया।
10
और अहम-काहिन और शरीअत के आलिम वहां खड़े होकर, बड़ी सख़्ती से आप पर इल्ज़ाम लगा रहे थे।
11
तब हेरोदेस और उस के सिपाहियों ने साथ मिल कर हुज़ूर ईसा की बेइज़्ज़ती की और हंसी उड़ाई। फिर एक चमकदार लिबास पहना कर आप को पीलातुस के पास वापस भेज दिया।
12
उसी दिन पीलातुस और हेरोदेस एक दूसरे के दोस्त बन गये हालांके इस से पहले उन में दुश्मनी थी।
13
तब पीलातुस ने अहम-काहिनों, हुक्काम और अवाम को जमा किया
14
और उन से कहा, “तुम इस शख़्स को मेरे पास ये कहते हुए लाये के ये लोगों को बग़ावत करने के लिये बहकाता है। मैंने ख़ुद भी तुम्हारे सामने उस से बाज़पुर्स की मगर जिस जुर्म का इल्ज़ाम तुम उस पर लगाते, मैंने उसे क़ुसूरवार नहीं पाया है।
15
और न ही हेरोदेस ने, क्यूंके उस ने उसे हमारे पास वापस भेज दिया। देखो, इस ने कोई ऐसा काम नहीं किया है जो उसे क़त्ल के लाइक़ ठहराये।
16
लिहाज़ा, मैं इसे पिटवा कर छोड़ दूंगा।”
17
उसे लाज़िम था के ईद के मौक़े पर मुजरिमों में से किसी एक को उन की ख़ातिर रिहा कर दे।
18
लेकिन पूरी अवाम एक आवाज़ में चिल्लाने लगी, “के इस आदमी को मार डालो! हमारी ख़ातिर बरअब्बा को रिहा कर दे!”
19
(बरअब्बा शहर में बग़ावत, और ख़ून के इल्ज़ाम में क़ैद किया गया था।)
20
पीलातुस ने हुज़ूर ईसा को रिहा करने के इरादे से, उन से दुबारा पूछा।
21
लेकिन वह चिल्लाने लगे, “के इसे मस्लूब करो! इसे मस्लूब करो!”
22
तब उस ने उन से तीसरी बार पूछा: “क्यूं? आख़िर इस ने कौन सा जुर्म किया है? मैंने इस में ऐसा कोई क़ुसूर नहीं पाया के वह सज़ा-ए-मौत का मुस्तहिक़ हो। इसलिये में इसे पिटवा कर छोड़ देता हूं।”
23
लेकिन वह चिल्ला-चिल्ला कर मुतालबा करने लगे के वह मस्लूब किया जाये और उन का चिल्लाना कारगर साबित हुआ।
24
पस पीलातुस ने उन की दरख़्वास्त के मुताबिक़ मौत का हुक्म सादर कर दिया।
25
और जो आदमी बग़ावत और ख़ून के जुर्म में क़ैद में था जिस की रिहाई उन्होंने मांगी थी, उसे छोड़ दिया गया, और हुज़ूर ईसा को उन की मर्ज़ी के मुवाफ़िक़ उन के हवाले कर दिया।
26
जब फ़ौजी हुज़ूर ईसा को लिये जा रहे थे, तो उन्होंने शमऊन कुरेनी को जो अपने गांव से आ रहा था पकड़ लिया, और सलीब उस पर रख दी ताके वह उसे उठाकर हुज़ूर ईसा के पीछे-पीछे ले चले।
27
लोगों का एक बड़ा हुजूम आप के पीछे हो लिया, और हुजूम में कई औरतें भी थीं जो आप के लिये नोहा और मातम कर रही थीं।
28
हुज़ूर ईसा ने मुड़ कर उन से कहा, “ऐ यरूशलेम की बेटीयों! मेरे लिये मत रोओ; बल्के अपने लिये और अपने बच्चों के लिये रोओ।
29
क्यूंके वह दिन आने वाले हैं जब तुम ये कहोगी, ‘के वह बांझ औरतें मुबारक हैं जिन के रहम बच्चों से ख़ाली रहे, और जिन की छातियों ने दूध नहीं पिलाया!’
30
तब “ ‘वह पहाड़ों से कहेंगे, “हम पर गिर पड़ो!” और टीलों से, “के हमें छुपा लो!” ’
31
क्यूंके, जब लोग हरे दरख़्त के साथ ऐसा सुलूक करते हैं, तो फिर सूखे दरख़्त के साथ क्या करेंगे?”
32
दो और मुजरिम आदमी भी थे जिन्हें हुज़ूर ईसा के साथ ले जाया जा रहा था, ताके उन्हें भी क़त्ल किया जाये।
33
जब वो सब खोपड़ी नामी जगह पर पहुंचे, तो वहां उन्होंने हुज़ूर ईसा को दो मुजरिमों के दरमियान में एक को आप के दाईं तरफ़, और दूसरे को बाईं तरफ़ मस्लूब किया।
34
हुज़ूर ईसा ने दुआ की, “ऐ बाप, इन्हें मुआफ़ कर, क्यूंके ये नहीं जानते के क्या कर रहे हैं।” और उन्होंने आप के कपड़ों पर क़ुरा डाल कर आपस में तक़्सीम कर लिया।
35
लोग खड़े-खड़े ये सब कुछ देख रहे थे और रहनुमा लोग भी हुज़ूर पर ताना कसते थे और कहते थे, “इस ने औरों को बचाया; अगर ये ख़ुदा का अलमसीह, जो बरगुज़ीदा है तो अपने आप को बचा ले।”
36
सिपाहियों ने भी आकर आप की हंसी उड़ाया और पीने के लिये आप को सिरका दिया।
37
और कहा, “अगर तू यहूदियों का बादशाह है, तो अपने आप को बचा ले।”
38
हुज़ूर के सर के ऊपर एक नविश्ता भी लगाया गया था के ये: यहूदियों का बादशाह है।
39
दो मुजरिम जो मस्लूब किये गये थे, उन में से एक ने हुज़ूर ईसा को लान-तान करते हुए कहा: “अगर तू अलमसीह है? तू अपने आप को और हमें बचा!”
40
लेकिन दूसरे ने उसे डांटा और कहा, “क्या तुझे ख़ुदा का ख़ौफ़ नहीं हालांके तो ख़ुद भी वोही सज़ा पा रहा है!
41
हम तो अपने जराइम की वजह से सज़ा पा रहे हैं, और हमारा क़त्ल किया जाना वाजिब है लेकिन इस इन्सान ने कोई ग़लत काम नहीं किया है।”
42
तब उस ने कहा, “ऐ हुज़ूर ईसा! जब आप अपनी बादशाही में आयें तो मुझे याद करना।”
43
हुज़ूर ईसा ने उसे जवाब दिया, “मैं तुझे यक़ीन दिलाता हूं के तू आज ही मेरे साथ फ़िरदौस में होगा।”
44
तक़रीबन दोपहर का वक़्त था, के चारों तरफ़ अन्धेरा छा गया और तीन बजे तक पूरे मुल्क की यही हालत रही।
45
सूरज तारीक हो गया और बैतुलमुक़द्दस का पर्दा फट कर दो टुकड़े हो गया
46
और हुज़ूर ईसा ने ऊंची आवाज़ से पुकार कर कहा, “ऐ बाप! मैं अपनी जान तुम्हारे हाथों में सौंपता हूं” और ये कह कर दम तोड़ दिया।
47
जब फ़ौजी अफ़सर ने ये माजरा देखा, तो ख़ुदा की तम्जीद करते हुए कहा, “ये शख़्स वाक़ई रास्तबाज़ था।”
48
और सारे लोग जो वहां जमा थे ये मंज़र देखकर, सीना-कूबी करते हुए लौट गये।
49
लेकिन हुज़ूर ईसा के सारे जान पहचान वाले और वह औरतें जो सूबे गलील से आप के पीछे-पीछे आई थीं, कुछ फ़ासिले पर खड़ी ये सब देख रही थीं।
50
यूसुफ़ नाम का एक आदमी था, वह यहूदियों की अदालते-आलिया का एक रुक्न था और बड़ा नेक और रास्तबाज़ था,
51
वह अदालते-आलिया के अराकीन के फ़ैसला और अमल के हक़ में न था। वह यहूदियों के शहर अरिमतियाह का बाशिन्दा था, और ख़ुदा की बादशाही का मुन्तज़िर था।
52
उस ने पीलातुस के पास जा कर हुज़ूर ईसा की लाश मांगी।
53
और लाश को सलीब पर से उतार कर महीन सूती चादर में कफ़्नाया, और उसे एक क़ब्र में रख दिया, जो चट्टान में खोदी गई थी, जिस में कभी किसी को दफ़नाया नहीं गया था।
54
वह तय्यारी का दिन था, और सबत का दिन शुरू होने ही वाला था।
55
वह औरतें जो गलील से हुज़ूर ईसा के साथ आई थीं, यूसुफ़ के पीछे-पीछे गईं और उन्होंने उस क़ब्र को और हुज़ूर ईसा की लाश को देखा के किस तरह उस में रख्खा गया है।
56
तब वह घर लौट गईं और उन्होंने ख़ुश्बूदार मसाले और इत्र तय्यार किया और शरीअत के हुक्म के मुताबिक़ सबत के दिन आराम किया।
← Chapter 22
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 24 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24