bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Urdu
/
Urdu UCVD (उर्दू हमअस्र तरजुमा)
/
Luke 9
Luke 9
Urdu UCVD (उर्दू हमअस्र तरजुमा)
← Chapter 8
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 10 →
1
हुज़ूर ईसा ने अपने बारह रसूलों को बुलाया और उन्हें क़ुदरत और इख़्तियार बख़्शा के सारी बदरूहों को निकालें और बीमारीयों को दूर करूं।
2
और उन्हें रवाना किया ताके वह ख़ुदा की बादशाही की मुनादी करें और बीमारों को अच्छा करें
3
और उन से कहा: “रास्ते के लिये कुछ न लेना, न लाठी, न थैला, न रोटी, न नक़दी, न दो-दो कुर्ते।
4
तुम जिस घर में दाख़िल हो, उस शहर से रुख़्सत होने तक उसी घर में ठहरे रहना।
5
और जिस शहर में लोग तुम्हें क़बूल न करें तो उस शहर से निकलते वक़्त अपने पांव की गर्द भी झाड़ देना ताके वह उन के ख़िलाफ़ गवाही दे।”
6
पस वह रवाना हुए और गांव-गांव जा कर हर जगह ख़ुशख़बरी सुनाते और मरीज़ों को शिफ़ा देते फिरे।
7
हेरोदेस जो मुल्क के चौथाई हिस्से पर हुकूमत करता था ये बातें सुन कर घबरा गया। क्यूंके बाज़ का कहना था के हज़रत यहया मुर्दों में से जी उठा है,
8
और बाज़ कहते थे के एलियाह ज़ाहिर हुआ है, और बाज़ कहते थे के पुराने नबियों में से कोई नबी ज़िन्दा हो गया है।
9
मगर हेरोदेस ने कहा के, “हज़रत यहया का तो मैंने सर क़लम करवा दिया था। अब ये कौन है जिस के बारे में ऐसी बातें सुनने में आ रही हैं?” और वह हुज़ूर ईसा को देखने की कोशिश में लग गया।
10
रसूल वापस आये और जो कुछ उन्होंने काम किये आकर हुज़ूर ईसा से बयान किया और आप उन्हें साथ ले कर अलग बैतसैदा नाम एक शहर की तरफ़ रवाना हुए।
11
लेकिन लोगों को मालूम हो गया और वह आप का पीछा करने लगे। हुज़ूर ईसा ने ख़ुशी से उन से मुलाक़ात की और उन्हें ख़ुदा की बादशाही की बातें सुनाने लगे और जिन को शिफ़ा की ज़रूरत थी उन्हें शिफ़ा बख़्शी।
12
जब दिन ढलने लगा तो उन बारह रसूलों ने पास आकर आप से कहा, “इन लोगों को रुख़्सत कर दे ताके वह आस-पास के गांव और बस्तीयों में जा सकें और अपने खाने-पीने का इन्तिज़ाम करें, क्यूंके हम तो एक वीरान जगह में हैं।”
13
हुज़ूर ईसा ने उन से कहा, “तुम ही इन्हें कुछ खाने को दो।” उन्होंने कहा, “हमारे पास पांच रोटियों और दो मछलियों से ज़्यादा कुछ नहीं, जब तक के हम जा कर इन सब के लिये खाना ख़रीद न लायें।”
14
क्यूंके पांच हज़ार के क़रीब मर्द वहां मौजूद थे। लेकिन उस ने अपने शागिर्दों से कहा, “इन लोगों को पचास-पचास की क़तारों में बैठा दो।”
15
चुनांचे उन्होंने ऐसा ही किया, और सब को बैठा दिया।
16
हुज़ूर ईसा ने वह पांच रोटियां और दो मछलियां लीं और आसमान की तरफ़ नज़र उठाकर, उन पर बरकत मांगी फिर आप ने उन रोटियों के टुकड़े तोड़ कर शागिर्दों को दिये ताके वह उन्हें लोगों में तक़्सीम कर दीं।
17
सब लोग खाकर सेर हो गये और बचे हुए टुकड़ों की बारह टोकरियां भर कर उठाई गईं।
18
एक दफ़ा हुज़ूर ईसा तन्हाई में दुआ कर रहे थे और उन के शागिर्द उन के पास थे, आप ने उन से पूछा, “लोग मेरे बारे में, क्या कहते हैं के मैं कौन हूं?”
19
उन्होंने जवाब दिया, “कुछ हज़रत यहया पाक-ग़ुस्ल देने वाला; लेकिन बाज़ एलियाह और बाज़ का ख़्याल है के पुराने नबियों में से कोई नबी जी उठा है।”
20
तब आप ने उन से पूछा, “तुम मुझे क्या कहते हो? मैं कौन हूं?” पतरस ने जवाब दिया, “आप ख़ुदा के अलमसीह हैं।”
21
इस पर हुज़ूर ईसा ने उन्हें ताकीद कर के हुक्म दिया के ये बात किसी से न कहना।
22
और ये भी कहा, “इब्न-ए-आदम को कई तकालीफ़ का सामना करना पड़ेगा। वह बुज़ुर्गों, अहम-काहिनों और फ़क़ीहों की जानिब से रद्द कर दिया जायेगा, वह उसे क़त्ल कर डालेंगे लेकिन वह तीसरे दिन ज़िन्दा हो जायेगा।”
23
फिर हुज़ूर ईसा ने उन सब से कहा: “अगर कोई मेरी पैरवी करना चाहे तो वह अपनी ख़ुदी का इन्कार करे और रोज़ाना अपनी सलीब उठाये और मेरे पीछे हो ले।
24
क्यूंके जो कोई अपनी जान को बाक़ी रखना चाहता है वह उसे खोयेगा लेकिन जो कोई मेरी ख़ातिर अपनी जान खोयेगा वह उसे महफ़ूज़ रखेगा।
25
आदमी अगर सारी दुनिया हासिल कर ले मगर अपना नुक़्सान कर ले या ख़ुद को खो बैठे तो क्या फ़ायदा?
26
क्यूंके जो कोई मुझ से और मेरे कलाम से शरमाएगा तो इब्न-ए-आदम भी जब वह अपने, और बाप के जलाल में मुक़द्दस फ़रिश्तों के साथ आयेगा तो उस से शरमाएगा।
27
“लेकिन मैं तुम से सच कहता हूं के बाज़ लोग जो यहां खड़े हैं, जब तक वह ख़ुदा की बादशाही को देख न लेंगे, मौत का मज़ा न चखने पायेंगे।”
28
इन बातों के तक़रीबन आठ दिन बाद ऐसा हुआ के हुज़ूर ईसा, पतरस, यूहन्ना और याक़ूब को साथ ले कर एक पहाड़ पर दुआ करने की ग़रज़ से गये।
29
और जब वह दुआ कर रहे थे तो उन की सूरत बदल गई और उन की पोशाक सफ़ैद होकर बिजली की मानिन्द चमकने लगी।
30
और देखो दो आदमी हुज़ूर ईसा से बातें कर रहे थे। ये हज़रत मूसा और हज़रत एलियाह थे।
31
जो जलाल में ज़ाहिर होकर हुज़ूर ईसा के आसमान पर उठाये जाने का ज़िक्र कर रहे थे जो यरूशलेम में वाक़े होने वाला था।
32
लेकिन पतरस और इस के साथियों की आंखें नींद से भारी हो रही थीं। जब वह जागे तो उन्होंने हुज़ूर ईसा का जलाल देखा और उन दो आदमियों पर भी उन की नज़र पड़ी जो उन के साथ खड़े थे।
33
जब वह हुज़ूर ईसा के पास से जाने लगे तो पतरस ने हुज़ूर ईसा से कहा, “आक़ा! हमारा यहां रहना अच्छा है। क्यूं न हम यहां तीन डेरे खड़े करें, एक आप के लिये, एक हज़रत मूसा और एक हज़रत एलियाह के लिये।” (उसे पता न था के वह क्या कह रहा है।)
34
वह ये कह ही रहा था के, एक बदली उन पर छा गई, और वह उस में घिर गये और ख़ौफ़ज़दा हो गये।
35
तब उस बदली में से आवाज़ आई के, “ये मेरा प्यारा बेटा है, जिसे मैंने चुन लिया है; तुम उस की सुनो।”
36
और आवाज़ आने के बाद, हुज़ूर ईसा तन्हा दिखाई दिये। शागिर्दों ने ये बात अपने तक ही रख्खी और उन दिनों जो कुछ देखा था उस का ज़िक्र किसी से न किया।
37
अगले दिन ऐसा हुआ के जब वो पहाड़ से नीचे आये तो लोगों का एक बड़ा हुजूम उन से मिला।
38
एक आदमी ने उस हुजूम में से चिल्ला कर कहा, “ऐ उस्ताद, मैं आप की मिन्नत करता हूं के मेरे बेटे पर नज़र कर, वह मेरा इकलौता बेटा है।
39
एक बदरूह उसे क़ब्ज़े में ले लेती है और वह यकायक चिल्लाने लगता है; और उस को ऐसा मरोड़ती है के उस के मुंह से झाग निकलने लगता है। बदरूह उसे ज़ख़़्मी कर के मुश्किल से छोड़ती है।
40
मैंने आप के शागिर्दों से इल्तिजा की थी के वह बदरूह को निकाल दें, लेकिन वह नहीं निकाल सके।”
41
हुज़ूर ईसा ने जवाब में कहा, “ऐ बेएतक़ाद और गुमराह लोगो, मैं कब तक तुम्हारे साथ रहूंगा और तुम्हारी बर्दाश्त करता रहूंगा? अपने बेटे को यहां ले आओ।”
42
अभी वह लड़का आ ही रहा था के, बदरूह ने उसे मरोड़ कर ज़मीन पर दे पटका। लेकिन हुज़ूर ईसा ने बदरूह को झिड़का और लड़के को शिफ़ा बख़्शी और उसे उस के बाप के हवाले कर दिया।
43
और सब लोग ख़ुदा की क़ुदरत देखकर हैरान रह गये। जब सब लोग उन कामों पर जो हुज़ूर ईसा करते थे तअज्जुब का इज़हार कर रहे थे तो हुज़ूर ने अपने शागिर्दों से कहा,
44
“मेरी इन बातों को कानों में डाल लो क्यूंके: इब्न-ए-आदम आदमियों के हवाले किया जायेगा।”
45
लेकिन वह इस बात का मतलब न समझ सके। क्यूंके वह उन से पोशीदा रख्खी गई थी ताके वह उसे समझ न सकें; और वह इस के बारे में उन से पूछने से भी डरते थे।
46
फिर शागिर्दों में ये बहस छिड़ गई के हम में सब से बड़ा कौन है?
47
हुज़ूर ईसा ने उन के दिल की बात मालूम कर के, एक बच्चे को लिया और उसे अपने पास खड़ा किया।
48
और अपने शागिर्दों से कहा, “जो कोई इस बच्चे को मेरे नाम पर क़बूल करता है वह मुझे क़बूल करता है; और जो मुझे क़बूल करता है वह मेरे भेजने वाले को क़बूल करता है। क्यूंके जो तुम में सब से छोटा है वोही सब से बड़ा है।”
49
तब यूहन्ना ने हुज़ूर ईसा से कहा, “ऐ आक़ा! हम ने एक शख़्स को आप के नाम से बदरूहें निकालते देखा तो उसे मना किया क्यूंके वह हम में से एक नहीं है।”
50
लेकिन हुज़ूर ईसा ने उस से कहा, “उसे मना न करना क्यूंके जो तुम्हारे ख़िलाफ़ नहीं वह तुम्हारी तरफ़ है।”
51
जब हुज़ूर ईसा के आसमान पर उठाये जाने के दिन नज़दीक आ गये तो, आप ने पुख़्ता इरादे के साथ यरूशलेम का रुख़ किया।
52
और अपने आगे क़ासिद रवाना कर दिये, ये क़ासिद गये और सामरियों के एक गांव में दाख़िल हुए ताके हुज़ूर ईसा के आने की तय्यारी करें;
53
लेकिन वहां के लोगों ने उन का इस्तिक़्बाल न किया, क्यूंके हुज़ूर ईसा यरूशलेम जा रहे थे।
54
ये देखकर आप के शागिर्द याक़ूब और यूहन्ना कहने लगे, “ऐ ख़ुदावन्द, आप हुक्म दें तो हम आसमान से आग नाज़िल करवा कर इन लोगों को भस्म कर दें?”
55
लेकिन हुज़ूर ईसा ने मुड़ कर देखा और उन्हें झिड़का।
56
तब वह किसी दूसरे गांव की तरफ़ रवाना हो गये।
57
जब वह रास्ते में चले जा रहे थे तो, किसी ने हुज़ूर ईसा से कहा, “आप जहां भी जायेंगे मैं आप की पैरवी करूंगा।”
58
हुज़ूर ईसा ने उसे जवाब दिया, “लोमड़ियों के भी भट और हवा के परिन्दों के घोंसले होते हैं, लेकिन इब्न-ए-आदम के लिये कोई जगह नहीं जहां वह अपना सर भी रख सके।”
59
फिर हुज़ूर ने एक और से कहा, “मेरे पीछे हो ले।” लेकिन उस ने कहा, “ऐ ख़ुदावन्द, पहले मुझे इजाज़त दें के मैं जा कर अपने बाप को दफ़न कर लूं।”
60
हुज़ूर ईसा ने उस से कहा, “मुर्दों को अपने मुर्दे दफ़न करने दें, लेकिन आप जायें और ख़ुदा की बादशाही की मुनादी करें।”
61
एक और शख़्स ने कहा, “ख़ुदावन्द, मैं आप के पीछे चलूंगा; लेकिन पहले मुझे इजाज़त दें के मैं अपने घर वालों से रुख़्सत हो आऊं।”
62
हुज़ूर ईसा ने उसे जवाब दिया, “जो कोई हल पर हाथ रखकर पीछे की तरफ़ देखता है वह ख़ुदा की बादशाही में ख़िदमत के लाइक़ नहीं।”
← Chapter 8
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 10 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24