bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Awadhi
/
Awadhi
/
Deuteronomy 13
Deuteronomy 13
Awadhi
← Chapter 12
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 14 →
1
“कउनो नबी या सपन क फले क जानइवाला तोहरे लगे आइ सकत ह। उ इ कहि सकत ह कि उ कछू दैवी चीन्हा या अचरजवाला काम देखाइ।
2
उ दैवी चीन्हा या अचरजवाला काम, जेकरे बारे मँ उ तू पचन्क बताएस ह, उ सही होइ सकत ह। तब उ तू पचन्स कहि सकत ह कि तू पचे दूसर देवतन क माना (जेनका तू पचे नाहीं जानत अहा।) उ तू पचन्स कहि सकत ह, ‘आवा हम ओन देवतन क सेवा करी।’
3
उ नबी या सपन काल क बातन क जिन सुना। काहेकि यहोवा तोहार परमेस्सर तोहार परीच्छा लेत अहइ। उ इ जानइ चाहत ह कि तू पचे पूरे हिरदय अउ आतिमा स पिरेम करत अहा कि नाहीं।
4
तू पचन्क यहोवा आपन परमेस्सर क अनुसरण करइ चाही। तू पचन्क ओकर सम्मान करइ चाही। यहोवा क आदेसन क माना अउर उ करा जउन उ कहत ह। यहोवा क सेवा करा अउ ओका कबहुँ जिन तजा।
5
उ नबी या सपन फले क जानइवाला मार दीन्ह जाइ चाही। काहेकि उ ही न तू पचन्स यहोवा तोहरे परमेस्सर क रास्तन स भटकत ह। यहोवा तू पचन्क मिस्र स बाहेर लिआवा। यहोवा तू पचन्क हुआँ क दासता क जिन्नगी स अजाद किहेस। उ ही अहइ जउन तोहका रोकइ क कोसिस करत अहइ कि तू पचे यहोवा आपन आदेस क मुताबिक जिन्नगी जिन बितावा। एह बरे आपन लोगन स बुरा मानुस क जरुर बरबाद करइ चाही।
6
“तोहार आपन भाइ, बेट्वा, बिटिया, तोहार पियारी मेहरारु या तोहार पियारा दोस्त छुपाइ के कहि सकत है, ‘आवा चली, दूसर देवतन क सेवा करी।’ (इ सबई वइसेन देवतन अहइँ जेनका तू पचे अउ तोहार पुरखन कबहुँ नाहीं जानेन।
7
उ सबइ ओन लोगन क देवता अहइँ जउन तोहरे चारिहुँ कइँती दूसर देसन मँ रहत हीं, कछू निचके अउ कछू दूर।)
8
तू पचन्क उ मनई क संग राजी नाहीं होइ चाही। ओकर बात जिन सुना। ओह पइ दया न देखावा। ओका आजादी स जिन जाइ द्या। ओकर रच्छा जिन करा।
9
तू पचन्क ओका मारि डावइ चाही। पाथर उठावइ वालन मँ स तू पचन्क पहिला होइ चाही अउर ओका मारइ चाही। तब सबहिं मनइयन क ओका मारि देइ क बरे ओह पइ पाथर लोकावइ चाही। काहेकि उ मनई तू पचन्क यहोवा तोहरे परमेस्सर स दूर हटावइ क कोसिस किहस। यहोवा सिरिफ एक अहइ जउन तोहे सबन्क मिस्र स लिआवा, जहाँ तू पचे दास रह्या।
11
तब इस्राएल क सबहिं लोग सुनिहीं अउ डेराइ जइहीं अउर उ सबइ तोहरे पचन्क बीच अउर जियादा इ तरह क बुरा काम फुरइ स करिहीं।
12
“यहोवा तोहार परमेस्सर तू पचन्क रहइ बरे सहरन दिहे अहइ। कबहुँ-कबहुँ तू पचे सहरन मँ स कउनो क बारे मँ बुरी खबर सुन सकत ह। तू सबइ सुनि सकत ह कि
13
तोहारे पचन्क आपन रास्ट्र मँ ही कछू बुरे लोग आपन सहर क लोगन्क बुरी बातन बरे तइयार करत अहइ। उ पचे आपन सहर क लोगन स कहि सकत हीं, ‘आवा चली, दूसर देवतन क सेवा करी।’ (इ सबइ अइसे देवता होइहीं जेनका तू पचे पहिले नाहीं जान्या ह।)
14
तब तोहका सबइ चिजियन क पूरी तरह निरिच्छन करइ चाही। अगर तू पावत ह कि इ सही अहइ, तउ तू साबित कइ सकत ह कि सचमुच अइसा भयंकर बात भइ,
15
तब तू पचन्क उ सहर क लोगन्क निहचय ही स जरूर मारिइ चाही। उ सहर अउ ओकर सबइ चिजियन क, गिरुअन सहित बरबाद करइ चाही।
16
तब तू पचन्क सबहिं कीमती चीजन्क बटोरइ चाही अउर ओका सहर क बीच लइ जाइ चाही अउर सब चिजियन क सहर क संग बारि देइ चाही। इ तोहरे परमेस्स यहोवा बरे होमबलि होइ। सहर क सदा बरे राख क ढेर होइ जाइ चाही। इ कबहुँ दोबारा नाहीं बनावा जाइ चाही।
17
एह बरे तू पचन्क कउनो चीज आपन बरे नाहीं राखइ चाही। अगर तू पचे इ हुकुम क मानत अहा तउ यहोवा तू पचन्पइ कोहाइ स रोकि देइ। यहोवा तोहे पचन्पइ दाया करी अउ तरस खाइ। उ तोहरे पचन्क रास्ट्र क वइसा बड़का बनाइ जइसा उ तोहरे पुरखन क बचन दिहे रहा।
18
इ तब होइ जब तू पचे यहोवा आपन परमेस्सर क बात सुनब्या यानी अगर तू पचे ओन हुकुमन क मनब्या जेनका मइँ तू पचन्क आजु दइ देत अहउँ। अउर तू पचन्क उहइ करइ चाही जेका यहोवा तोहार परमेस्सर उचित बतावत ह।
← Chapter 12
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 14 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28
29
30
31
32
33
34
Recommended Reading
Commentary
Deuteronomy Commentaries
→
Devotional
Deuteronomy Devotional Guide
→
Get This Bible
Awadhi Study Bible
→