bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Awadhi
/
Awadhi
/
Isaiah 59
Isaiah 59
Awadhi
← Chapter 58
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 37
Chapter 38
Chapter 39
Chapter 40
Chapter 41
Chapter 42
Chapter 43
Chapter 44
Chapter 45
Chapter 46
Chapter 47
Chapter 48
Chapter 49
Chapter 50
Chapter 51
Chapter 52
Chapter 53
Chapter 54
Chapter 55
Chapter 56
Chapter 57
Chapter 58
Chapter 59
Chapter 60
Chapter 61
Chapter 62
Chapter 63
Chapter 64
Chapter 65
Chapter 66
Chapter 60 →
1
लखा, तोहार रच्छा बरे यहोवा क सक्ति काफी अहइ। जब तू मदद बरे ओका गोहरावत ह तउ उ तोहार सुन सकत ह।
2
किन्तु तोहार पचन्क पाप तू पचन्क परमेस्सर स अलग करत हीं अउर इहइ बरे उ तोहरे पचन्क तरफ स कान बन्द कइ लेत ह।
3
तोहार पचन्क हाथ गन्दा अहइँ, उ सबइ खून स सने भए अहइँ। तोहार पचन्क अँगुरियन अपराधन स भरी अहइँ। आपन मुँहे स तू पचे झूठ बोलत अहा। तोहार पचन्क जिभियन बुरी बातन करत हीं।
4
दूसर मनइ क बारे मँ कउनो मनई फुरइ नाहीं बोलत। लोग अदालत मँ एक दूसर क खिलाफ मुकद्दमा करत हीं। आपन मुकद्दमा जीतइ बरे उ पचे झूठे तर्कन पइ आसरा करत हीं। उ पचे एक दूसर क बारे मँ परस्पर झूठ बोलत हीं। उ पचे कस्ट क गर्भ मँ धारण करत हीं अउर बुराइयन क जनम देत हीं।
5
उ पचे सरप क बिख भरे अण्डन क समान बुराई क सेवत हीं। अगर ओनमाँ स तू एक अण्डा भी खाइ ल्या तउ तोहार मउत होइ जाइ अउर अगर तू ओनमाँ स एक अण्डा फोड़ द्या तउ एक जहरीला नाग बाहेर निकरि पड़इ। लोग झूठ बोलत हीं। इ झूठ मकड़ी क जालन जइसी कपड़े नाहीं बन सकतेन।
6
ओन जालन स तू आपन क ढाँपि नाहीं सकतेन। कछू लोग बदी करत हीं अउर आपन हाथन स दूसरन क नोस्कान पहोंचावत हीं।
7
अइसी लोग आपन गोड़न क प्रयोग बदी क लगे पहोंचइ बरे करत हीं। इ सबइ लोग निर्दोख मनइयन क मारि डावइ क जल्दी मँ रहत हीं। उ पचे बुरे विचारन मँ पड़े रहत हीं। उ पचे जहाँ जात हीं बिनास अउ बिध्वंस फइलावत हीं।
8
अइसे लोग सान्ति क मारग नाहीं जानतेन। ओनकर जिन्नगी मँ नेकी तउ होत ही नाहीं। ओनकर रास्तन ईमानदारी क नाहीं होतेन। कउनो भी मनई जउन ओनके जइसा जिन्नगी जिअत ह, आपन जिन्नगी मँ कबहुँ सान्ति नाहीं पाई।
9
एह बरे परमेस्सर क निआव अउर मुक्ति हम स दूर अहइ। हम प्रकास क बाट जोहत अही। पर बस केवल अन्धकार फइला अहइ। हमका चमकत प्रकास क आसा अहइ। किन्तु हम अँधियारा मँ चलत अही।
10
हम अइसे लोग अही जेनके लगे आँखिन नाहीं अहइँ। नेत्रहीन लोगन क तरह हम देवारन क टटोरित चलत अही। हम ठोकर खात अही अउर गिर जात अही जइसे इ रात होइ। दिन क प्रकास मँ भी हम मुर्दन क भाँति गिर पड़ित ह।
11
हम सब बहोत दुःखी अही। हम सब अइसे कराहत अही जइसे कउनो रीछ अउर कउनो कबूतर कराहत ह। हम अइसे उ समय क बाट जोहत अही जब लोग निस्पच्छ होइहीं किन्तु अबहिं तलक तउ कतहूँ भी नेकी नाहीं अहइ। हम उद्धार क बाट जोहत अही किन्तु उद्धार बहोत-बहोत दूर अहइ।
12
काहेकि हम आपन परमेस्सर क विरोध मँ बहोत पाप किहे अही। हमार पाप बतावत हीं कि हम बहोत बुरे अही। हमका एकर पता अहइ कि हम एन बुरे करमन क करइ क अपराधी अही।
13
हम पाप किहे रहे अउर हम आपन यहोवा स मुँह मोड़ लिहे रहे। यहोवा स हम विमुख भए अउर ओका तजि दीन्ह। हम बुरे करमन क जोजना बनाए रहे। हम अइसी ओन बातन क जोजना बनाए रहे जउन हमरे परमेस्सर क विरोध मँ रही। हम पचे उ सबइ बातन सोचे रहे अउर दूसरन क सतावइ क जोजना बनाए रहे।
14
हमसे नेकी क पाछे ढकेला गवा। निस्पच्छता दूर ही खड़ी रही। गलियन मँ सच्चाई गिर पड़ी रही माना नगर मँ अच्छाई क प्रवेस नाहीं भवा।
15
सच्चाई चली गइ अउर उ सबइ लोग लूटे गएन जउन भला करइ चाहत रहेन। यहोवा हेरे रहा किन्तु कउनो भी, कहीं भी अच्छाई न मिल पाई।
16
यहोवा हेर लखेस किन्तु ओका कउनो मनई नाहीं मिला जउन लोगन क संग खड़ा होइ अउर ओनका सहारा देइ। एह बरे खुद आपन सक्ति क अउर खुद आपन नेकी क प्रयोग किहस अउर यहोवा लोगन क बचाइ लिहस।
17
यहोवा नेकी क कवच, उद्धार क सिरस्त्रण (टोप), दण्ड क वस्त्र, अउर आपन मज़बूत पिरेम क चोगा पहिरेस।
18
यहोवा आपन दुस्मन पइ कोहान अहइ तउ यहोवा ओनका अइसा दण्ड देइ जइसा ओनका मिलइ चाही। यहोवा आपन दुस्मनन स कोहान अहइ तउ यहोवा सबहिं दूर-दूर क देसन क लोगन क सजा देइ। यहोवा ओनका वइसा दण्ड देइ जइसा ओनका मिलइ चाही।
19
फुन पच्छिम क लोग यहोवा क नाम क आदर देइहीं अउर पूरब क लोग यहोवा क महिमा स भय विम्हित होइ जइहीं। यहोवा अइसे ही हाली आइ जाइ जइसे तेज नदी बहत भइ आइ जात ह। इ उ तेज हवा क रप्तार सा होइ जेका यहोवा उ नदी क तूफान बहावइ बरे पठवत ह।
20
तब सिय्योन पर्वत पइ एक छुड़ावइवाला आइ। उ याकूब क ओन लोगन क लगे आइ जउन पाप तउ किहे रहेन, किन्तु जउन परमेस्सर कइँती लउटि आए रहेन। यहोवा इ सबइ बातन क कहेस।
21
यहोवा कहत ह, “मइँ ओन लोगन क संग एक वाचा करब। मइँ बचन देत हउँ मोर आतिमा अउर मोरे सब्द जेनका मइँ तोहरे मुखे मँ रखत हउँ तोहका कबहुँ नाहीं छोड़िहीं। उ पचे तोर संतानन अउर तोहार बच्चन क बच्चन क संग रहिहीं। उ पचे आजु तोहरे साथ रहिहीं अउर सदा-सदा तोहरे साथ रहिहीं।”
← Chapter 58
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 37
Chapter 38
Chapter 39
Chapter 40
Chapter 41
Chapter 42
Chapter 43
Chapter 44
Chapter 45
Chapter 46
Chapter 47
Chapter 48
Chapter 49
Chapter 50
Chapter 51
Chapter 52
Chapter 53
Chapter 54
Chapter 55
Chapter 56
Chapter 57
Chapter 58
Chapter 59
Chapter 60
Chapter 61
Chapter 62
Chapter 63
Chapter 64
Chapter 65
Chapter 66
Chapter 60 →