bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Bundeli
/
Bundeli
/
Luke 12
Luke 12
Bundeli
← Chapter 11
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 13 →
1
इतने में जब हजारन की भीड़ लग गई, इते लौ कि बे एक दूसरे पे गिरे पड़त हते, तो यीशु सब से पेंला अपने चेलन से कैन लगो, फरीसियन के खमीर जाने के उन के कपट से होसियार रईयो।
2
कछु ढ़पो नईंयां, जौन खोलो न जै है; और न कछु लुको आय, जौन जानो न जै है।
3
ई लाने जौन कछु तुम ने अंधयारे में कओ आय, बो उजाले में सुनो जै है: और जौन कछु तुम ने कोठरियों में कानों कान कओ आय, बो कोठों में परचार करो जै है।
4
पर मैं तुम से जौन मोरे मित्र आव कैत आंव, जौन देयां हां घात करत आंय पर ऊके पछारें कछु नईं कर सकत, उन से न डरो।
5
मैं तुम हां होसियार करत आंव कि तुम हां की से डरो चईये, घात करबे के पाछें जी हां नरक में डालबे कौ अधकार आय, ओई से डरो: मैं तुम से कैत आंव ओई से डरो।
6
का दो पईसा की पांच गौरईयां नईं बिकत? पर परमेसुर उन में से एकऊ हां नईं बिसरत।
7
तुमाए मूड़ के सबरे बाल सोई गिने भए आंय, सो डरो नईं, तुम बिलात गौरईयन से बढ़ के आव।
8
मैं तुम से कैत आंव जौन कोऊ मान्सन के सामूं मोहां मान लै है, ऊ ए मान्स कौ पूत सोई परमेसुर के सरगदूतन के सामूं मान लै है।
9
पर जौन कोऊ मान्सन के सामूं मोय नकार दै है, परमेसुर के सरगदूतन के सामूं ऊहां नकार दओ जै है।
10
जौन कोऊ मान्स के पूत के बिरोध में कोई बात कै है, ऊकौ पाप छिमा करो जै है, पर जौन कोऊ पवित्तर आत्मा की निन्दा कर है, ऊकौ पाप छिमा न करो जै है।
11
जब मान्स तुम हां सभाओं और हाकमों और अधिकारियन के सामूं ले जाएं, तो सोस न करियो कि हम कौन भांत से या का उत्तर दें, या का कैबें।
12
कायसे पवित्तर आत्मा ओई बेरा तुम हां सिखा दै है, कि का कैबो चईये।
13
फिन भीड़ में से एक ने ऊसे कओ, हे गुरु, मोरे भाई से कै, कि बाप की सम्पत्ति-धन मोय बांट दे।
14
यीशु ने ऊसे कओ; हे मान्स, की ने मोय तुमाओ न्यायी या बटईया ठैराओ आय?
15
और यीशु ने ऊसे कओ, होसयार रओ, और सब भांत के लोभ लालच से अपने हां बचाए रखो: कायसे कोई कौ जीवन ऊ की मालपानू के अधक होबे से नईं होत।
16
यीशु ने उन से एक कनौत कई, कोई धनी के खेतन में बिलात खेती भई।
17
तब बो अपने हिये में सोसन लगो, कि मैं का करों, कायसे मोरे ऐंगर जांगा नईंयां, जिते अपनो पजो भओ नांज हां धरों।
18
और ऊ ने कओ; कि मैं अपने बखरी हां तोड़ के उन से बड़ी बखरी बना हों।
19
और उते अपनी सबरी पज और मालपानू धर हों: और अपने प्रान से कै हों, कि प्रान, तोरे ऐंगर बिलात बरसन के लाने बिलात मालपानू धरो आय; सो चैन कर, खा, पी, सुख से रै।
20
पर परमेसुर ने ऊसे कओ; हे मूरख, ऐई रात तोरो प्रान तो से लै लओ जै है: तब जौन कछु तेंने जोड़ धरो आय, बो की कौ हुईये?
21
ऐसई बो मान्स सोई आय जौन अपने लाने धन बटोरत आय, पर परमेसुर के लेखे में धनी नईंयां।
22
फिन यीशु ने अपने चेलन से कओ; ई लाने मैं तुम से कैत आंव, अपने प्रान की चिन्ता सोस न करो, कि हम का खा हैं; और न अपनी देयां की, कि हम का पैर हैं।
23
कायसे भोजन से प्रान और उन्ना से देयां बढ़ के आय।
24
कउअन पे गौर करो; बे न बोत आंय, न काटत; न उन के बखरी और न खत्ता होत आय; पर परमेसुर उन हां पालत आय; तुमाओ दाम पंछियन से क ऊं बढ़ के आय।
25
तुम में ऐसो को आय, जौन चिन्ता सोस करबे से अपनी आयु में एक घड़ी भी बढ़ा सकत आय?
26
ई लाने जब तुम सब से हलको भी काम नईं कर सकत, तो और बातन के लाने काय चिन्ता सोस करत आव?
27
सोसनों के पेड़ों पे गौर करो कि बे कौन भांत बढ़त आंय; बे न मैनत करत, न कातत आंय; पर मैं तुम से कैत आंव, कि सुलैमान भी, अपने सबरे ठाट बाट में, उन में से कौनऊ एक के बिरोबर उन्ना न पैरें हतो।
28
ई लाने जदि परमेसुर मैदान की घांस हां जौन आज आय, और कल भाड़ में झौंकी जै है, ऐसो पैराऊ त आय; तो हे बिसवास में कम मान्सन, तो बौ तुम हां काय न पहिना है।
29
और तुम ई बात की खोज में न रओ, कि का खै हैं और का पी हैं, और न सक सन्देह करो।
30
कायसे संसार की जातियां इन सब बस्तन की खोज में रैत आंय: और तुमाओ बाप जानत आय, कि जे बस्तें तुम हां चाने आंय।
31
पर ऊके राज की खोज में रओ, तो जे बस्तें सोई तुम हां मिल जै हैं।
32
हे हलके झुण्ड़, न डर; कायसे तुमाए बाप हां जौ साजो लगो आय, कि राज तुम हां दे।
33
अपनो मालपानू बेच के दान में दे देओ; और अपने लाने ऐसे बटुए बना लेओ, जौन पुराने नईं होत, जाने के सरग पे ऐसो धन जोड़ो जौन घटत नईंयां और भड़या ऊके ऐंगर नईं जात, और कीड़ा नईं बिगाड़त।
34
कायसे जिते तुमाओ धन आय, उतईं तुमाओ हिया सोई लगो रै है।
35
तुमाई कमर बन्धी रएं, और तुमाए दिये जलत रएं।
36
और तुम उन मान्सन घाईं बनो, जौन अपने मालक की बाट तक रए होबें, कि बो ब्याओ से कबै लौट है; कि जब बो आन के दोरो खटखटाए, तो तुरतऊं ऊके लाने खोल देओ।
37
धन्न आंय बे चाकर, जिन हां उन कौ मालक आके जागत पाबे; मैं तुम से सांसी कैत आंव, कि बो कमर बान्ध के उन हां भोजन कराबे हां बैठा है, और ऐंगर आन के उन की सेवा कर है।
38
जदि बो रात के दूसरे पहर या तीसरे पहर में आन के उन हां जागत पाबे, तो बे चाकर धन्न आंय।
39
पर तुम जौ जान राखो, कि जदि घर कौ मालक जानत, कि भड़या कौन बेरा आ है, तो जागत रैतो, और अपने घर में सेंध न लगन देतो।
40
तुम सोई तईयार रओ; कायसे जौन बेरा तुम सोचत लौ नईंयां, ओई बेरा मान्स कौ पूत आ जै है।
41
तब पतरस ने कओ, हे पिरभु, का जा कनौत तें हम से या सब से कैत आय?
42
यीशु ने कओ; बो बिसवास जोग और समजवारो भण्डारी को आय, जी कौ मालक ऊहां नौकर, चाकरों पे अधकारी ठैराए कि उन हां खैबे पीबे हां भोजन और सामान ठीक बेरा पे देबे।
43
धन्न आय बो चाकर, जीहां ऊकौ मालक आके एैसई करत पाबै।
44
मैं तुम से सांसी कैत आंव; बो ऊहां अपने सबरे मालपानू पे मुखिया ठैरा है।
45
पर ऊ चाकर जदि जौ सोचन लगै, कि मोरो मालक तो आबे में अबेर कर रओ आय, और नौकरन और नौकरानियन हां मारन-पीटन लगे और खाबे-पीबे और पियक्कड़ होन लगे।
46
तो ऊ चाकर कौ मालक ऐसे दिना जीकी ऊ सोचत लौ न होय, और ऐसी बेरा जिए बो जानत न हो आ है, और कुल्ल दांड़ देकें ऊकौ हींसा बिसवास न करबेवारन के संग्गै ठैरा है।
47
और बो चाकर जौन अपने मालक की मनसा जानत हतो, पर तईयार न रओ और न ऊ की मनसा के अनसार चलो बिलात मार खा है।
48
पर जौन न जानत भए मार खाबे के जोग काम करे बो तनक मार खा है, ई लाने जीहां बिलात दओ गओ आय, ऊसे बिलात मांगो जै है, और जिए बिलात सौंपो गओ आय, ऊसे बिलात मांग है।
49
मैं धरती पे आग लगाबे हां आओ हों; और का चाहत आंव बस जा अबई सुलग जाती!
50
मोय एक बपतिस्मा लेने आय, और जब लौ बो न हो ले तब तक मैं कैसी दुबधा में रै हों?
51
का तुम समजत आव कि मैं धरती पे मेल करवाबे हां आओ हों? मैं तुम से कैत आंव; नईं, पर अलैदा करवाबे हां आओ हों।
52
कायसे अब से एक घर में पांच जनें आपस में बैर धर हैं, तीन दो से और दो तीन से।
53
बाप बेटा से, और बेटा बाप से बैर राख है; मां बेटी से, और बेटी मां से, सास बहू से और बहू सास से बैर राख है।
54
और यीशु ने भीड़ से सोई कओ, जब तुम बादल हां पश्चिम से उठत तकत आव, तो तुरतऊं कैत आव, कि पानू बरस है; और ऐसई होत आय।
55
और जब दक्खिनी बैहर चलत आय, तो कैत आव कै लू चल है, और ऐसई होत आय।
56
हे कपटियो, तुम धरती और आकास के रंग रूप में भेद कर सकत आव, पर ई जुग के बारे में भेद काय नईं करबो जानत?
57
तुम खुद सुलजा काय नईं लेत, कि सई का आय?
58
जब तें अपने मु ई के संग्गै हाकम के ऐंगर जा रओ आय, तो गैल में ऊसे छूटबे कौ जतन कर, ऐसो न हो, कि बो तोहां न्यायधीश के सामूं ले जाबे, और न्यायधीश तोहां सिपाई हां सौंपे और सिपाई तोहां जेहल में डाले।
59
मैं तुम से कैत आंव, कि जब लौ तें एक एक पईसा न भर दै है तब तक उते से छूटने न पा है।
← Chapter 11
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 13 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24