bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Bundeli
/
Bundeli
/
Luke 16
Luke 16
Bundeli
← Chapter 15
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 17 →
1
फिन यीशु ने चेलन से सोई कओ; कोऊ मालपानू वारे कौ एक भण्डारी हतो, और मान्सन ने ऊके सामूं ऊ पे जौ लांछन लगाओ कि जौ तोरो मालपानू उड़ाए देत आय।
2
धनी ने ऊहां बुला के कओ, जौ काआय जो मैं तोरे बारे में सुन रओ आंव? अपने भण्डारी पन कौ लेखा दे; कायसे तें आंगू भण्डारी न रै है।
3
तब भण्डारी सोचन लगो, अब मैं का करों? कायसे अब मोरो मालक मोसे भण्डारी कौ काम छीन रओ आय: माटी तो मोसे खोदी नईं जात: और भीख मांगबे से मोय सरम आ है।
4
मैं समज गओ, कि का कर हों: जीसे जब मैं भण्डारी के काम से छुड़ाओ जांओं तो मान्स मोय अपने घरों में ले लेबें।
5
तब ऊ ने अपने मालक के दैनदारन हां एक एक कर के बुलाओ और पैले से पूंछो, कि तो पे मोरे मालक कौ कितेक कर्जा आय?
6
ऊ ने कओ, सौ मन तेल; तब भण्डारी ने ऊसे कओ, अपनो खाता बही ले और बैठ के पचास लिख दे।
7
फिन ऊ ने दूसरे से पूछो, तो पे कितेक कर्जा आय? ऊ ने कओ सौ मन गेंहूं; तब ऊ ने ऊसे कओ; अपनो खाता बही ले और अस्सी लिख दे।
8
मालक ने ऊ अधरमी भण्डारी हां सराहो कि ऊ ने चतुराई से काम करो आय; कायसे ई संसार के मान्स अपनी बेरा के मान्सन के संग्गै रीत व्यवहारों में ज्योत के मान्सन से ज्यादा चतुर आंय।
9
और मैं तुम से कैत आंव, कि अधरम के धन से अपने लाने मित्र बना लेओ; जीसे जब ऊ बड़ा जाबै, तो बे तुम हां हमेसा के लाने अपने घरों में अपना लेबें।
10
जौन तनक से तनक में सांचो आय, ऊ बिलात में सोई सांचो आय: और जौन तनक से तनक में अधरमी आय, ऊ बिलात में सोई अधरमी आय।
11
ई लाने कि जब तुम अधरम के धन में सांचे न ठैरे, तो सांसो धन तुम हां को दै है!
12
और जदि तुम पराए धन में सांचे न ठैरे, तो जौन तुमाओ आए, बो तुम हां को दै है?
13
कौनऊं चाकर दो मालकन की सेवा नईं कर सकत: कायसे बो एक से बैर और दूसरे से प्रेम कर है; या एक से मिलो रै है और दूसरे हां ओछो जान है: तुम परमेसुर और धन दोईयन की सेवा नईं कर सकत।
14
धरम पण्डत जौन लोभी हते, यीशु की सबरी बातें सुन के ताने मार के ऊ की हंसी करन लगे।
15
यीशु ने उन से कओ; तुम तो मान्सन के सामूं अपने आप हां धरमी ठैरात आव: पर परमेसुर तुमाए हिया हां जानत आय, कायसे जौन बस्त मान्सन के लेखे जसवारी आय, बो परमेसुर के लेखे ओछी आय।
16
नैम व्यवस्था और आगमवकता यूहन्ना तक रए, ऊ बेरा से परमेसुर के राज कौ भलो सन्देसो सुनाओ जा रओ आय, और हर कोऊ ऊ में जबरदस्ती पिड़त आय।
17
आकास और धरती कौ टल जाबो आसान आय, पर व्यवस्था कौ एक बिन्दु इतनो कठन आय कि बिना पूरो भओ न मिट है।
18
जौन कोऊ अपनी ब्यावता हां छोड़ के दूजी से ब्याओ करत आय, बो पर त्रिया भोग कौ पाप करत आय, और जौन कोऊ ऐसी छोड़ छुट्टीवारी से ब्याओ करत आय, ऊ सोई पर त्रिया भोग कौ पाप करत आय।
19
एक धनी मान्स हतो जौन रेशम और मलमल कौ उन्ना पैरत और रोज सुख विलास और धूम धाम से रैत हतो।
20
और लाजर नाओं कौ एक कंगाल जिए कुल्ल घाव हते धनी के दोरे पे छोड़ दओ जात हतो।
21
और लाजर चाहत हतो, कि धनी की मेज से जौन जूठन गिरे ऊसे ऊकौ पेट भरै; कूकर सोई लाजर लौ आके ऊके घाव चाटत हते।
22
और ऐसो भओ कि बो कंगाल लाजर मर गओ, और सरगदूतन ने ऊहां ले के इब्राहीम की गोदी में पोंचाओ; और बो धनवान सोई मरो; और गाड़ो गओ।
23
और ऊ ने अधोलोक में पीड़ा से तड़फत भए अपनी आंख उठाईं, और दूर से इब्राहीम की गोदी में लाजर हां तको।
24
तब ऊ ने टेर के कओ, हे बाप इब्राहीम, मो पे तरस खाके लाजर हां पठै दे, जीसे ऊ अपनी उंगरिया कौ सिरा पानू में भिंजो के मोरी जीभ हां ठण्डो करे, कायसे मैं ई ज्वाला में तड़प रओ आंव।
25
पर इब्राहीम ने कओ; हे पूत सुमरन कर, कि तें अपने जीयत में साजी बस्तें ले चुको आय, ऊंसई लाजर बुरई बस्तें: पर अब बो इते सान्ति पा रओ आय, और तें तड़प रओ आय।
26
इन सबरी बातन हां छोड़ हमाए और तुमाए मजारें एक भारी गढ्ढा ठैराओ गओ आय, कि जौन इते से ऊ पार तुमाए ऐंगर जाबो चाए, बे न जा सकें, और न कोऊ उते से ई पार हमाए ऐंगर आ सके।
27
ऊ ने कओ; तो हे पिता मैं तोसे बिन्तवाई करत आंव, कि तें ऊहां मोरे बाप के घरै पठै दे।
28
कायसे मोरे पांच भईया आंय, बो इन बातन की गवाई उन के सामूं देबे, ऐसो न होय कि बे सोई ई पीड़ा की जांगा में आएं।
29
इब्राहीम ने ऊसे कओ, उन के ऐंगर तो मूसा और आगमवकतन की पोथियां आंय, बे उन की सुनें।
30
ऊ ने कओ; नईं, हे पिता इब्राहीम; जदि कौनऊं मरे भयन में से जी उठे और उन के ऐंगर जाबे तो बे हिया फेर हैं।
31
इब्राहीम ने ऊसे कओ, कि जब बे मूसा और आगमवकतन की नईं सुनत, तो जदि भरे भयन में से कोऊ जी सोई जाबे तौ भी बे ऊ की न मान हैं।
← Chapter 15
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 17 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24