bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Bundeli
/
Bundeli
/
Matthew 10
Matthew 10
Bundeli
← Chapter 9
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 11 →
1
तब यीशु ने अपने बारह चेलन हां टेर के, उन हां असुद्ध आत्मन पे हक दओ, कि उन हां काड़ें और सब तरहां की बीमारियन और सब तरहां की कमजोरियन हां हटा दें।
2
बारह प्रेरितन के नाम जे आंय: पेंला शिमौन, जौन पतरस कहाऊ त आय, और ऊको भईया अन्द्रियास; जब्दी कौ पूत याकूब, और ऊको भईया यूहन्ना;
3
फिलिपुस और बर-तुल्मै, थोमा और चुंगी लेबेवारो मत्ती, हल्फै कौ पूत याकूब और तद्दै।
4
शिमौन कनानी, और यूहदा इस्करियोती, जीने ऊहां पकड़वा सोऊ दओ।
5
इन बारह हां यीशु ने जौ हुकुम दैके पठैव कि अन्यजातियन के ऐंगर न जईयो, और न सामरियन के नगर में पिड़ियो।
6
पर इस्राएल के घराने की हिराई भई गाड़रन के ऐंगर जईयो।
7
और गैल चलत चलत तुम प्रचार करत कहियो कि सरग कौ राज्य ऐंगर आ गओ आय।
8
बीमारन हां साजो करियो: मरे भयन हां जिलाईयो: कोढ़ियन हां शुद्ध करियो: दुष्ट आत्मन हां काड़ियो: तुम ने सेंतमेंत पाओ आय, सेंतमेंत दईयो।
9
अपने बटुआ में न सोनो, न चांदी, और न तांबा धरियो।
10
गैल के लाने न झोला धरोे, और न दो कुरता, न पनईंयां और न लठिया लईयो, कायसे मजूर हां ऊकौ भोजन मिलबो चईये।
11
जो कोऊ नगर या गांव में तुम पिड़ो, तो पूंछतांछ करियो कि उते कोऊ भलो जनो है? और विदा होबे लौ, ओई के इते रहियो।
12
जब तुम ऊ घर में पिड़ो, तो सान्ति की आसीष दईयो।
13
जदि ऊ घर में लायक हुईयें तो तुमाई सान्ति उते बनी रै है, पर लायक न हुईयें तो सान्ति कौ तुमाओ सन्देस तुमाए ऐंगर लौट आ है।
14
जो कोऊ तुम हां न माने, और न तुमाई बातन सुने, तो तुम ऊ घर या नगर से कड़त भए अपने गोड़न की धूरा झार डारियो।
15
मैं तुम से सांची कहत आंव, कि न्याव के दिना ऊ नगर की दसा सदोम और अमोरा देश की दसा से बिलात सहबे लाक हुईये।
16
हेरो, मैं तुम हां भेड़न जैसो बिगना के मजारें पठैत आंव, ई लाने सांपन की भांत चतुर और परेवा जैसो भोलो बनियो।
17
मगर मान्सन से होसियार रहियो, कायसे बे तुम हां कचहरियन में सौंप हैं, और अपनी कचहरियन में कोड़े लगवा हैं।
18
तुम मोरे लाने हाकमन और राजन के आंगू पेस करे जै हौ, कि उन पे और अन्यजातियन पे गवाही होबे।
19
जब बे तुम हां पकरवाएं तो चिन्ता न करियो, कि हम की विधी से; या का कै हैं: कायसे जो कछु तुम हां कहने हुईये, बो ओई बेरा तुम हां बता दओ जै है।
20
कायसे बोलबेवारे तुम नईं आव पर तुमाए बाप कौ आत्मा तुम में बोलत आय।
21
भईया, भईया को और बाप अपने बच्चन हां, मार डालबे के लाने पकरवा दै हैं, और लरकावारे मताई-बाप के बिरोध में ठांड़े होकें उन हां मरवा डार हैं।
22
मोरे नाओं के काजें सब तुम से बैर कर हैं, पर जौन अन्त लौ गम खै है ओई की मुक्ति हुईये।
23
जब बे एक नगर में तुम हां सताएं, तो दूसरी जांगह भग जईयो। कायसे मैं तुम से सांची कैत हों, तुम इस्राएल के सब नगरन में न फिर पा हौ, मान्स कौ पूत आ जै है।
24
न चेला अपने गुरू से, और न चाकर अपने मालक से बढ़के होत आय।
25
चेले हां अपने गुरू के, और चाकर हां अपने मालक के बरोबर होबो कठन है; जब उन ने घर के मालक हां शैतान कई तो का ऊके घरवाले कछु न कै हैं?
26
ई लाने उन से न डरियो, कायसे कछु ढको नईंयां, जौन उगारो न जै है; और न कछु लुको आय, जौन जानो न जै है।
27
जौन मैं तुम से अन्धयारे में कहत आंव, ऊहां तुम उजयारे में कहियो; और जौन तुम कानों कान सुनत आव, ऊहां छत पे चढ़के बतईयो।
28
उन से न डरियो, जौन शरीर हां मार डारत आंय, बे आत्मा हां घात नईं कर सकत आंय, बल्कि उन से डरियो, जो आत्मा और सरीर दोई हां नरक में नास कर सकत आय।
29
का एक पईसा में दो गौरईंयां नईं बिकत? तौभी तुमाए बाप की मनसा के बिना उन में से एक भी धरती पे नईं गिर सकत आय।
30
तुमाए मूंड़ के बाल लौ गिने भए आंय।
31
ई लाने न डरिया; तुम बिलात गौरईंयन से बढ़ के आव।
32
ई लाने जौन मान्सन के आंगू मोहां मान लै हैं, मैं भी ऊहां अपने बाप के आंगू जौन सरग में आय, मान लै हों।
33
पर जौन मान्सन के आंगू मोय नईं मान है, मैं भी ऊहां अपने बाप के आंगू जौन सरग में आय नईं मान हों।
34
जौ न समझो, कि मैं धरती पे मेल कराबे आओ हों; मैं मेल कराबे नईं, बल्कि तलवार चलवाबे हां आओ हों।
35
मैं तो ई लाने आओ कि मान्स हां, ऊके बाप, बिटिया हां ऊकी मताई से, और बहू हां ऊकी सास के खिलाफ कर देओं।
36
और मान्स के बैरी ऊके घरई के लोग हुईयें।
37
जौन मोय से बढ़के अपने मताई या बाप से प्रेम करत आय, बो मोरे लायक नईंयां जौन मोय से बढ़के अपने बिटवा और बिटियन से प्रेम करत आय, बो मोरे जोग नईंयां।
38
और जौन अपनो क्रूस उठाके मोरे पाछें नईं निंगत, बो मोरे लायक नईंयां।
39
जौन अपनो प्राण बचात आय, बो ऊहां खो है; और जौन कोऊ मोरे काजें अपनो प्राण खोत आय, बो ऊहां पा है।
40
जौन तुम हां अपनात आय, बो मोय अपनात आय; और जौन मोय अपनात आय, बो मोरे पठैबेवारे हां अपनात आय।
41
जौन आगमवकता हां, आगमवकता जानके अपनात है, बो आगमवकता कौ फल पा है; और जौन धर्मी हां धर्मी जानके अपना है, बो धर्मी कौ फल पा है।
42
जौन कोऊ इन हल्कन में से एक हां चेला जानके ठंड़ो पानू पीबे हां दै है, मैं तुम से सांची कैत आंव, कि बो अपनो जस कभऊं नईं खो है।
← Chapter 9
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 11 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28