bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Bundeli
/
Bundeli
/
Matthew 12
Matthew 12
Bundeli
← Chapter 11
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 13 →
1
यीशु सब्त के दिना खेतन में से होकें जा रओ हतो, और ऊके चेलन हां भूख लगी, और बे बालें तोड़ तोड़ के खान लगे।
2
फरीसियन ने जौ हेरो तो ऊसे कई, तक, तोरे चेला बो काम कर रए आंय, जो सब्त के दिना करबो सही नईंयां।
3
ऊने उन से कई; का तुम ने नईं पढ़ो, कि जब दाऊद और ऊके संगियन हां भूख लगी, तो ऊने का करो?
4
ऊने तो परमेसुर के मन्दर में पिड़के, भेंट की रोटियां खाईं, जिन हां खाबो न तो ऊके लाने और न ऊके संगियन के लाने, पर केवल याजकन के लाने सही हतो।
5
का तुम ने नैम की पोथी में नईं पढ़ो, कि याजक सब्त के दिना मन्दर में सब्त के नैम हां नईं मानत, फिन भी बरी माने जात आंय?
6
पर मैं तुम से कैत आंव, कि इते बो आय, जौन मन्दर से भी बढ़के आय।
7
अगर तुम ई को मतलब समझते कि मैं दया चाहत आंव, बलि नईं, तो बरी हां लांछन नईं लगाते।
8
मान्स कौ पूत सब्त के दिना कौ भी पिरभू आय।
9
उते से निकर के बो उन के प्रार्थना घरन में गओ।
10
और हेरो, उते सूखे हाथ वारो एक मान्स हतो; और उन ने यीशु पे लांछन लगाबे के लाने ऊसे पूछो, कि का सब्त के दिना साजो करबो सही आय?
11
ऊने उन से कई; तुम में ऐसो कौन आय, जीकी एक गाड़र होबै, और बो सब्त के दिना गड्ढा में गिर जाबे, तो बो ऊए पकड़ के बायरें न काड़े?
12
तो एक मान्स कौ मोल गाड़र से कितेक बढ़के आय; ई लाने सब्त के दिना भला करबो सजो आय: तब ऊने ऊ मान्स से कई, अपनो हाथ बढ़ा।
13
ऊने बढ़ाओ, और बो फिन दूसरे हाथ की भांत साजो हो गओ।
14
तब फरीसी बायरै कड़े और ऊके खिलाफ सलाह करी, कि ऊहां कैसऊ मार डारें।
15
जौ जानके यीशु उते से कड़ गओ; और बिलात लोग ऊके पाछें हो लए; और ऊने उन सब हां साजो करो।
16
और उन हां चिताओ, कि मोरे बारे में कछु न कहियो।
17
जीसे यशायाह आगमवकता ने जौन कहो हतो, बो पूरो होबै।
18
कि हेरो, जौ मोरो भक्त आय, जीहां मैं ने नबेरो आय; मोरो प्यारो, जीसे मोरो हिया खुस आय: मैं ऊपे अपनो आत्मा डार हों; और बो अन्य जातियन हां सही न्याव की खबर दै है।
19
बो न तो झगड़ा कर है, और न धूम मचा है; और न कोऊ ऊको बतकाओ गलियन में सुन है।
20
बो कुचले भए सरकन्डे हां न तोड़ है; और टिमटिमात भए उजयारे हां न बुझा है, जब लौ बो न्याव हां न जीत ले।
21
और ओई के नाओं में अन्य जातियन आस धर हैं।
22
तब यीशु के ऐंगर एक भूत लगो मान्स हां लाओ गओ, जौन अंधरा और बौरा हतो; और ऊने ऊहां साजो करो; और बो बौरा मान्स बोलन और हेरन लगो।
23
ई पे सबरे लोग अचरज करके कैन लगे, का जौ मान्स दाऊद के गोत्र कौ हो सकत आय?
24
पर जब फरीसियन ने जौ सुनो तो कई, जौ तो दुष्तआत्मन हां ऊके मुखिया शैतान की मदद से काड़त आय।
25
उन के मन की बात जानके ऊने कई; जी राज्य में फूट पड़ जात आय, बो नास हो जात आय, और जी नगर या गांव और घर में फूट हो जै है, बो टिक नईं सकत।
26
और अगर शैतान ही शैतान हां काड़ है, तो बो अपनो बिरोधी कहा है; फिन ऊको राज्य कैसो टिक पा है?
27
अगर मैं शैतान के सहारे भूतन हां काड़त आंव, तो तुमाए पूत कौन की मदद से काड़त आंय? ई लाने बेई तुमाओ न्याव कर हैं।
28
पर जदि मैं परमेसुर के आत्मा के द्वारा दुष्टआत्मन हां काड़त आंव, तो परमेसुर कौ राज्य तुमाए ऐंगर आ पोंचो आय।
29
का कोऊ बलवान मान्स के घर में पिड़के ऊको माल लूट लै है, जब लौ पेंला बे ऊ बलवान हां बांध न लेबें? और तब बो ऊको घर लूट सकत आय।
30
जौन मोरे संग्गै नईंयां, बो मोरे बिरोध में आय; और जौन मोरे संग्गै नईं बटोरत, बो बिखेरत आय।
31
ई लाने मैं तुम से कहत आंव, कि मान्स कौ हर पाप और निन्दा क्षमा करी जै है, पर पवित्र आत्मा की निन्दा क्षमा नईं करी जै है।
32
और जो कोऊ मान्स के पूत के बिरोध में कोऊ बात कै है, ऊको जौ पाप क्षमा करो जै है, पर जौन कोनऊ पवित्र आत्मा के बिरोध में कछु कै है, ऊको पाप न तो ई जुग में और न आबेवारे जुग में क्षमा करो जै है।
33
जदि पेड़ हां उमदा कहो, तो ऊके फल हां सोऊ उमदा कहो; या पेड़ हां बुरओ कहो, तो ऊके फल हां सोऊ बुरओ कहो; कायसे पेड़ अपने फल से ही चीनो जात आय।
34
हे सांप के बच्चो, तुम दुष्ट होत भए भी भली बातें कैसे कह सकत आव? कायसे, जौन मन में भरो आय, ओई मों पे आत है।
35
भलो मान्स अपने हिये के भले भण्डार से नोंनी बातें काड़त आय; और बुरओ मान्स अपने भण्डार से बुरई बातें काड़त आय।
36
मैं तुम से कहत आंव, कि जौन भी बुरई बात मान्स कै हैं, न्याव के दिना बो ऊकौ हिसाब दै हैं।
37
कायसे तें अपनी बातन से बरी और अपनी बातन से पापी ठहराओ जै है।
38
तब कछु शास्त्री और फरीसियन ने ऊसे कई, हे गुरू, हम तोसे एक चिन्ह देखबो चाहत आंय।
39
ऊने उन हां उत्तर दओ, की ई जुग के दुष्ट और व्यभिचारी मान्स चिन्ह हेरबे की मनसा धरत आंय; पर यूनुस आगमवकता के चिन्ह हां छोड़ और कोऊ चिन्ह उन हां न दओ जै है।
40
कायसे यूनुस तीन दिना और तीन रात बड़ी मछरिया के पेट में रहो, ओई तरहां मान्स कौ पूत भी तीन दिना और तीन रात धरती के भीतर रै है।
41
न्याव के दिना, नीनवे के लोग ई पीढ़ी के लोगन के संग्गै उठके उन हां पापी कै हैं, कायसे उन ने यूनुस कौ प्रचार सुनके, मन फिराओ और तको, इते बो आय जौन यूनुस से भी बढ़के आय।
42
न्याव के दिना, दक्खिन की रानी, ई पीढ़ी के लोगन के संग्गै ठांड़ी हुईये और इन हां पापी ठहरा है, कायसे बो सुलैमान कौ ज्ञान सुनबे हां धरती के छोर से आई, और तको, इते बो आय, जौन सुलैमान से भी बढ़के आय।
43
जब अशुद्ध आत्मा मान्स में से कड़ जात आय, तो सुस्ताबे की खोज में सूनी जांगह ढूंढ़त फिरत आय, और पाती नईंयां।
44
तब बो कहत आय, जौन घर से मैं आई हती, अपने ओई घर हां लौट जै हों, और जब बो लौट के आत आय तो ऊहां सूनो, झाड़ो-बुहारो और सजो-संवरो पात आय।
45
तब बो जाके अपने से बिलात बुरई सात आत्मन हां अपने संग्गै ले आत आय, और ब ऊ में पिड़के उते रहन लगत आंय, और ऊ मान्स की दसा पेंलई से बुरई हो जात आय; ई बुरई पीढ़ी के लोगन के संग्गै भी ऐसई हुईये।
46
जब बो मान्सन से बातें कर रओ हतो, तो तको, ऊकी मताई और भईया बायरें ठांड़े हते, और ऊसे बातें करबो चाहत हते।
47
और कोऊ ने यीशु से कई; हेर तोरी मताई और तोरे भईया बायरें ठांड़े आंय, और तोसे बातें करबो चाहत आंय।
48
जौ सुन के कहबेवारे हां उत्तर दओ; को आय मोरी मताई?
49
और को आय मोरो भईया? और अपने चेलन की कोद हाथ बढ़ाके ऊने कई; हेरो; मोरी मताई और मोरे भईया जे आंय।
50
कायसे जौन कोऊ मोरे बाप हां जौन सरग में आय उनकी मनसा पूरी करत आय, ओई मोरो भईया और मोरी बहन और मोरी मताई आय।
← Chapter 11
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 13 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28