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Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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2 Chronicles 21
2 Chronicles 21
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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1
यहोशाफट अपने मृत पूर्वजों के साथ सो गया। उसे उसके पूर्वजों के साथ दाऊदपुर में गाड़ा गया। उसके स्थान पर उसका पुत्र योराम राज्य करने लगा।
2
योराम के छ: भाई थे। राजा यहोशाफट के अन्य पुत्रों के ये नाम हैं: अजर्याह, यहीएल, जकर्याह, अजर्याह, मीखाएल और शपत्याह। ये सब यहूदा प्रदेश के राजा यहोशाफट के पुत्र थे।
3
उसने अपने इन पुत्रों को अपार धन-सम्पत्ति, सोना-चांदी तथा बहुमूल्य वस्तुएं दी थीं। उसने उन्हें यहूदा प्रदेश के किलाबन्द नगर भी दिये थे। किन्तु उसने योराम को अपना राज्य दिया था; क्योंकि वह उसका ज्येष्ठ पुत्र था।
4
जब योराम अपने पिता के सिंहासन पर बैठा, और जब उसकी राजसत्ता जम गई, तब उसने अपने सब भाइयों तथा देश के कुछ उच्चाधिकारियों का तलवार से वध कर दिया।
5
जब योराम राजा बना तब उसकी उम्र बत्तीस वर्ष की थी। उसने आठ वर्ष तक राजधानी यरूशलेम में राज्य किया।
6
वह इस्राएल प्रदेश के राजाओं के मार्ग पर चला। जैसा अहाब के राजपरिवार ने किया था, वैसा ही उसने भी किया; क्योंकि अहाब की पुत्री उसकी पत्नी थी। जो कार्य प्रभु की दृष्टि में बुरा है उसने वही किया।
7
फिर भी प्रभु ने योराम को, जो दाऊद का वंशज था, नष्ट नहीं किया; क्योंकि प्रभु ने दाऊद के साथ विधान का सम्बन्ध स्थापित किया था। उसने दाऊद को वचन दिया था कि तेरे और तेरे वंश का दीपक कभी नहीं बुझेगा।
8
योराम के राज्य-काल में एदोम राज्य ने यहूदा राज्य से विद्रोह कर दिया और उसने अपना राजा नियुक्त कर लिया।
9
योराम ने अपने सेना-नायकों तथा समस्त रथों के साथ प्रस्थान किया। एदोमी सैनिकों ने उसको घेर लिया। तब योराम और उसके सारथी रात में उठे और उन्होंने एदोमी सैनिकों का वध कर दिया, जिन्होंने उनको घेर लिया था।
10
किन्तु एदोम राज्य आज भी यहूदा राज्य से विद्रोह किये हुए है। उन्हीं दिनों में लिबना राज्य ने भी विद्रोह कर दिया; क्योंकि योराम ने अपने पूर्वजों के प्रभु परमेश्वर को त्याग दिया था।
11
इसके अतिरिक्त राजा योराम ने यहूदा प्रदेश के पहाड़ी शिखरों पर पूजागृह बनाए थे। उसके इन्हीं दुष्कर्मों के कारण राजधानी यरूशलेम के निवासी तथा यहूदा प्रदेश की सब जनता प्रभु के प्रति विश्वासघाती हो गई और वह प्रभु के मार्ग से भटक गई।
12
नबी एलियाह ने योराम के इन कार्यों के सम्बन्ध में उसको एक पत्र भेजा। पत्र में यह लिखा था, ‘महाराज, आपके पूर्वज दाऊद का प्रभु परमेश्वर यों कहता है: “तूने न तो अपने पिता यहोशाफट के सदृश आचरण किया और न ही यहूदा प्रदेश के राजा आसा के आचरण के सदृश।
13
किन्तु तूने इस्राएल प्रदेश के राजाओं के आचरण का अनुसरण किया, और यहूदा प्रदेश की जनता तथा यरूशलेम के निवासियों को मुझसे विश्वास-घात करने के लिए बहकाया। ऐसा ही विश्वास-घात करने के लिए अहाब के राजपरिवार के लोगों ने इस्राएल प्रदेश की जनता को बहकाया था। तूने अपने ही पिता के पुत्रों की, अपने सगे भाइयों की हत्या की, जो तुझ से अच्छे थे।
14
इसलिए, देख, प्रभु तेरी समस्त प्रजा पर, तेरे बच्चों और तेरी स्त्रियों पर, तथा तेरी समस्त धन-सम्पत्ति पर एक महामारी भेजेगा।
15
तू स्वयं अंतड़ियों के रोग से बहुत पीड़ित होगा, और उस रोग के कारण धीरे-धीरे तेरी सब अंतड़ियां बाहर निकल आएंगी” ।’
16
प्रभु ने योराम के विरुद्ध पलिश्तियों को तथा इथियोपिया देश के समीप रहने वाले अरबियों को विद्रोह के लिए उभाड़ा।
17
उन्होंने यहूदा प्रदेश पर आक्रमण कर दिया। वे यहूदा प्रदेश के निवासियों पर टूट पड़े और राजभवन की समस्त धन-सम्पत्ति को लूट लिया। वे राजा योराम के पुत्रों और रानियों को बन्दी बनाकर ले गए। उसके पास उसका सबसे छोटा पुत्र अहज्याह ही रह गया, शेष सब पुत्र बन्दी बनकर चले गए।
18
इतना ही नहीं, इसके बाद प्रभु ने उसको अंतड़ियों के असाध्य रोग से पीड़ित कर दिया।
19
धीरे-धीरे दो वर्ष के बाद उस असाध्य रोग के कारण उसकी अंतड़ियां बाहर आ गईं, और वह घोर पीड़ा सहते-सहते मर गया। उसकी प्रजा ने उसके सम्मान में सुगन्धित आग नहीं जलायी, जैसी उसके पूर्वजों के लिए जलायी थी।
20
जब योराम बत्तीस वर्ष का था तब से उसने राज्य करना आरम्भ किया था और उसने आठ वर्ष तक राजधानी यरूशलेम में राज्य किया। उसके मरने पर किसी ने शोक नहीं मनाया। उसको दाऊदपुर में गाड़ा गया, किन्तु राजाओं के कब्रिस्तान में नहीं।
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