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Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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2 Chronicles 36
2 Chronicles 36
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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Chapter 36
1
यहूदा प्रदेश की जनता ने योशियाह के पुत्र यहोआहाज को चुना और उन्होंने यरूशलेम में उसके पिता के स्थान पर उसको राजा बनाया।
2
जब यहोआहाज ने राज्य करना आरम्भ किया तब वह तेईस वर्ष का था। उसने राजधानी यरूशलेम में तीन महीने तक राज्य किया।
3
तब मिस्र के राजा नको ने यरूशलेम में उसको राजगद्दी से उतार दिया, और उसके देश पर जुर्माना किया कि वह साढ़े तीन हजार किलो चांदी और पैंतीस किलो सोना देगा।
4
मिस्र देश के राजा ने यहोआहाज के भाई एलयाकीम को उसके स्थान पर यहूदा प्रदेश तथा यरूशलेम का राजा बनाया। उसने एलयाकीम का नाम बदल कर “यहोयाकीम” रखा। किन्तु नको उसके भाई यहोआहाज को बन्दी बना कर मिस्र देश ले गया।
5
जब यहोयाकीम ने राज्य करना आरम्भ किया तब वह पच्चीस वर्ष का था। उसने राजधानी यरूशलेम में ग्यारह वर्ष तक राज्य किया। उसने अपने प्रभु परमेश्वर की दृष्टि में दुष्कर्म किए।
6
उसके राज्यकाल में बेबीलोन के राजा नबूकदनेस्सर ने उस पर आक्रमण किया, और उसको जंजीरों में जकड़कर अपने देश की राजधानी बेबीलोन ले गया।
7
राजा नबूकदनेस्सर प्रभु के भवन के कुछ पात्र भी ले गया, और उनको अपने महल में रख दिया।
8
यहोयाकीम के शेष कार्यों का विवरण, वस्तुत: उसके सब घृणित कार्यों का विवरण, उस पर आरोपित समस्त बुरे कार्यों का विवरण ‘इस्राएल तथा यहूदा प्रदेशों के राजाओं का इतिहास-ग्रंथ’ में लिखा हुआ है। उसका पुत्र यहोयाकीन उसके स्थान पर राज्य करने लगा।
9
जब यहोयाकीन राजा बना तब वह अठारह वर्ष का था। उसने तीन महीने और दस दिन तक राजधानी यरूशलेम में राज्य किया। उसने प्रभु की दृष्टि में दुष्कर्म किए।
10
वसन्त के दिनों में बेबीलोन के राजा नबूकदनेस्सर ने अपने सैनिक भेजे और उसको बेबीलोन में ले आया। इसके अतिरिक्त वह प्रभु के भवन के समस्त बहुमूल्य पात्र बेबीलोन ले गया। उसने उसके भाई सिदकियाह को यहूदा प्रदेश तथा यरूशलेम का राजा बनाया।
11
जब सिदकियाह राजा बना तब वह इक्कीस वर्ष का था। उसने ग्यारह वर्ष तक राजधानी यरूशलेम में राज्य किया।
12
उसने अपने प्रभु परमेश्वर की दृष्टि में दुष्कर्म किए। प्रभु ने नबी यिर्मयाह के माध्यम से उस को सन्देश दिया था। किन्तु उसने स्वयं को विनम्र नहीं किया।
13
राजा नबूकदनेस्सर ने उसको परमेश्वर की शपथ दी थी कि वह उससे विद्रोह नहीं करेगा। तो भी उसने परमेश्वर की शपथ की उपेक्षा की और राजा नबूकदनेस्सर से विद्रोह किया। उसने इस्राएली राष्ट्र के प्रभु परमेश्वर के प्रति अपने हृदय को कठोर बना लिया था। हठ से उसकी गर्दन ऐंठ गई थी, और वह प्रभु से विमुख हो गया था।
14
यहाँ तक कि प्रमुख पुरोहित और जनता के प्रतिष्ठित लोग भी विभिन्न जातियों की घृणित प्रथाओं को मानने लगे थे, और यों प्रभु के प्रति बहुत विश्वासघात करते थे। प्रभु परमेश्वर ने अपनी उपस्थिति से यरूशलेम में अपने भवन को पवित्र किया था, किन्तु उन्होंने उसको अपवित्र कर दिया।
15
फिर भी उनके पूर्वजों का प्रभु परमेश्वर अपने निज लोगों तथा अपने निवास-स्थान पर दयापूर्ण दृष्टि करता रहा। इसलिए वह उनको समझाने के लिए निरन्तर अपने सन्देश-वाहक भेजता रहा।
16
किन्तु वे परमेश्वर के सन्देश-वाहकों का मजाक उड़ाते रहे। उन्होंने परमेश्वर के सन्देश को तुच्छ समझा; उसके नबियों की हंसी की। तब अन्त में प्रभु की क्रोधाग्नि अपने निज लोगों पर भड़क उठी; और उसको बुझाने का किसी में सामर्थ्य न था: कोई इलाज न रह गया।
17
अत: प्रभु ने अपने निज लोगों के विरुद्ध कसदी कौम के राजा को बुलाया, जिसने उनके युवकों को पवित्र स्थान में तलवार से मौत के घाट उतार दिया। राजा ने किसी पर दया नहीं की, न बच्चों पर न कन्याओं पर, न प्रौढ़ों पर न वृद्धों पर। प्रभु ने उन सबको कसदी कौम के राजा के हाथ में सौंप दिया।
18
वह परमेश्वर के भवन के सब छोटे-बड़े पात्र, प्रभु-भवन का सम्पूर्ण कोष, यहूदा प्रदेश के राजा और उसके उच्चाधिकारियों का खजाना लूट कर बेबीलोन ले गया।
19
उसके सैनिकों ने परमेश्वर के भवन में आग लगा दी। उन्होंने यरूशलेम की शहरपनाह तोड़ दी। उन्होंने यरूशलेम नगर के सब महलों को आग में भस्म कर दिया और उसके बहुमूल्य पात्रों को नष्ट कर दिया।
20
जो तलवार की मार से बच गए थे, वह उनको बन्दी बना कर बेबीलोन ले गया। जब तक फारस राज्य की स्थापना न हुई वे कसदी कौम के राजाओं के गुलाम बने रहे।
21
यह सब इसलिए हुआ, क्योंकि प्रभु ने अपने नबी यिर्मयाह के माध्यम से ऐसा ही कहा था। विश्राम-कालों का पालन न करने के कारण अब इस्राएल देश को विश्राम मिला। सत्तर वर्ष तक देश उजाड़ पड़ा रहा, और उसने विश्राम मनाया।
22
फारस देश के सम्राट कुस्रू के राज्यकाल का प्रथम वर्ष था। उस वर्ष प्रभु ने नबी यिर्मयाह के मुख से कहे गए अपने वचन को पूरा करने के लिए सम्राट कुस्रू के हृदय को उत्प्रेरित किया कि वह अपने समस्त साम्राज्य में यह घोषणा करे, और उसको लिपिबद्ध कर ले:
23
‘फारस देश के सम्राट कुस्रू का यह आदेश है: स्वर्ग के परमेश्वर, प्रभु ने पृथ्वी के समस्त राज्य मुझे प्रदान किए और मुझे यह आज्ञा दी कि मैं यहूदा प्रदेश के यरूशलेम नगर में उसके लिए एक भवन बनाऊं। उसके निज लोगों में से जो कोई भी तुम्हारे मध्य निवास कर रहे हैं, वे यरूशलेम नगर को जाएं। उनके साथ प्रभु परमेश्वर हो।’
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