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Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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2 Chronicles 28
2 Chronicles 28
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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1
जब आहाज ने राज्य करना आरम्भ किया तब वह बीस वर्ष का था। उसने सोलह वर्ष तक राजधानी यरूशलेम में राज्य किया। उसने अपने पूर्वज दाऊद के आचरण का अनुसरण नहीं किया। उसने वे कार्य नहीं किये जो प्रभु की दृष्टि में उचित हैं।
2
वह इस्राएल प्रदेश के राजाओं के मार्ग पर चला। उसने बअल देवता की मूर्तियाँ भी बनाईं।
3
जिन जातियों को प्रभु ने इस्राएली लोगों को बसाने के लिए कनान देश से निकाल दिया था, उनकी घृणित प्रथा के अनुसार वह हिन्नोम की घाटी में सुगन्धित धूप-द्रव्य जलाता था, और उसने अपने पुत्रों को अग्नि में बलि के रूप में भी चढ़ाया।
4
वह पहाड़ी शिखर की वेदियों पर, पहाड़ियों पर तथा प्रत्येक हरे वृक्ष के नीचे पशु-बलि चढ़ाता और सुगन्धित धूप-द्रव्य जलाता था।
5
अत: आहाज के प्रभु परमेश्वर ने उसको सीरिया के राजा के हाथ में सौंप दिया। सीरिया के राजा ने उसको पराजित कर दिया, और उसके राज्य के हजारों निवासियों को बन्दी बनाकर राजधानी दमिश्क में ले गया। प्रभु परमेश्वर ने उसको इस्राएल प्रदेश के राजा के हाथ में भी सौंप दिया, जिसने उसकी सेना का महासंहार किया, और उसको परास्त कर दिया।
6
इस्राएल प्रदेश के राजा पेकह बेन-रमलयाह ने यहूदा प्रदेश में एक दिन में ही एक लाख बीस हजार सैनिकों का वध कर दिया। ये सब सशक्त योद्धा थे। इन्होंने अपने पूर्वजों के प्रभु परमेश्वर को त्याग दिया था, इसलिए ये मौत के घाट उतार दिये गए।
7
एफ्रइम-निवासी जिक्री नामक एक शूरवीर योद्धा था। उसने राजपुत्र मासेयाह, राजमहल के सेना-नायक अज्रीकाम और एलकाना को मार डाला। एलकाना राजा आहाज का दाहिना हाथ था।
8
इस्राएली सैनिक अपने जाति-बन्धुओं के स्त्री-पुरुषों और पुत्र-पुत्रियों को बन्दी बनाकर सामरी नगर ले गए। बन्दियों की संख्या दो लाख थी। वे अपने जाति भाई-बन्धुओं की धन-सम्पत्ति भी लूटकर ले गए।
9
उनके मध्य वहाँ प्रभु का एक नबी था। उसका नाम ओबेद था। जब इस्राएली प्रदेश के सैनिक सामरी नगर में पहुंचे, तब वह उनसे मिलने के लिए गया। नबी ओबेद ने उनसे कहा, ‘यह सच है कि तुम्हारा प्रभु परमेश्वर यहूदा प्रदेश के निवासियों से क्रुद्ध था; और इसलिए उसने तुम्हारे हाथ में उनको सौंप दिया। किन्तु तुमने निर्दयता से उनका महासंहार किया। उनकी करुण चीत्कार परमेश्वर के पास स्वर्ग तक पहुँची है।
10
और अब तुम यहूदा प्रदेश और यरूशलेम के स्त्री-पुरुषों को गुलाम बनाकर अपने अधीन रखना चाहते हो। यह अपराध करके क्या तुम अपने प्रभु परमेश्वर की दृष्टि में अपने विरुद्ध पाप नहीं कर रहे हो?
11
अब तुम मेरी बात सुनो, और अपने जाति भाई-बन्धुओं को, जिन्हें तुमने बन्दी बना लिया है, वापस यहूदा प्रदेश भेज दो; क्योंकि प्रभु की भयंकर क्रोधाग्नि तुम पर भड़कनेवाली है।’
12
वहाँ एफ्रइम कुल-क्षेत्र के कुछ अगुए थे। उनके नाम इस प्रकार हैं: अजर्याह बेन-योहानान, बेरेक्याह बेन-मशिल्लेमोत, यहिजकियाह बेन-शल्लूम, और अमासा बेन-हद्लै। ये अगुए युद्ध से लौटनेवाले इस्राएली सैनिकों के सम्मुख खड़े हो गए।
13
उन्होंने उनसे कहा, ‘तुम इन बन्दियों को हमारे प्रदेश में यहाँ मत लाओ। तुम्हारे इस कार्य के कारण हम प्रभु के प्रति दोषी ठहरेंगे। हम प्रभु के प्रति अपराधी और दोषी हैं ही। उनमें एक और अपराध जुड़ जाएगा। हम प्रभु के प्रति महाअपराध कर चुके हैं; और उसकी क्रोधाग्नि हम इस्राएलियों पर भड़की हुई है।’
14
अत: सशस्त्र सैनिकों ने उच्चाधिकारियों और जनता के सामने अपने बन्दियों को छोड़ दिया। उन्होंने लूट भी वहीं छोड़ दी।
15
एफ्रइम कुल-क्षेत्र के अगुए, जिनके नाम ऊपर लिखे हुए हैं, उठे, और उन्होंने बन्दियों को संभाला। उनमें अनेक बन्दी नंगे थे। उनको अगुओं ने लूट के माल से वस्त्र पहिनाए। उन्होंने न केवल कपड़े पहिनाए, वरन् पैरों में जूते भी पहिनाए। उनको खाने को भोजन दिया, और पीने को पानी। उनके सिर पर तेल मल। कमजोर और बीमारों को गधे पर बैठाया, और सब बन्दी जनों को उनके जाति भाई-बन्धुओं के पास खजूर वृक्षों के नगर यरीहो पहुंचा दिया। तत्पश्चात् अगुए सामरी नगर को लौट गए।
16
उस समय राजा आहाज ने सहायता के लिए असीरिया देश के राजा के पास दूत भेजे;
17
क्योंकि एदोमी सैनिकों ने यहूदा प्रदेश पर पुन: आक्रमण कर उसको पराजित कर दिया था, और वे यहूदा प्रदेश के अनेक निवासियों को बन्दी बनाकर ले गए थे।
18
पलिश्तियों ने भी शफेलाह के चरागाह, और यहूदा प्रदेश के दक्षिण क्षेत्र नेगेब के नगरों पर चढ़ाई कर इनको अपने अधिकार में कर लिया था, और वहां वे बस गए थे। नेगेब क्षेत्र के नगरों के नाम इस प्रकार हैं: बेतशमेश, अय्यालोन, गदेरोत, सोको और उसके गांव, तिम्ना और उसके गांव, तथा गिमजो और उसके गांव।
19
यहूदा प्रदेश के राजा आहाज के कारण प्रभु ने यहूदा प्रदेश का पतन किया था; क्योंकि आहाज ने यहूदा प्रदेश के साथ मनमाना व्यवहार किया था और प्रभु के साथ विश्वासघात किया था।
20
तब असीरिया देश के राजा तिग्लत-पलेसेर ने उस पर आक्रमण किया; और वह उसको सुदृढ़ करने के बदले उसे सताने लगा।
21
आहाज ने प्रभु के भवन और राजमहल के कोषागारों की सोना-चांदी को निकाला, और असीरिया के राजा को भेंट के रूप में दे दिया। तो भी उसकी इस भेंट से उसको सहायता प्राप्त न हुई।
22
अपने संकट के दिनों में यही राजा आहाज प्रभु के प्रति और अधिक विश्वासघात करने लगा।
23
सीरिया के राष्ट्रीय देवताओं ने उसको पराजित किया था, अत: वह दमिश्क की वेदियों पर उनको बलि चढ़ाने लगा। वह यह सोचता था, ‘सीरिया के राजाओं के देवताओं ने युद्ध में उनकी सहायता की थी; अब यदि मैं उनको बलि चढ़ाऊंगा तो वे मेरी भी सहायता करेंगे।’ किन्तु सीरिया के ये देवता आहाज और समस्त इस्राएलियों के विनाश का कारण बन गए।
24
राजा आहाज ने परमेश्वर के भवन के सब पात्रों को इकट्ठा किया, और उसके बाद उन पात्रों के टुकड़े-टुकड़े कर दिये। उसने प्रभु के भवन के द्वार बन्द कर दिये, और यरूशलेम नगर के कोने-कोने में स्वयं वेदियां बनवाईं।
25
उसने यहूदा प्रदेश के सब नगरों में अन्य देवी-देवताओं को अग्नि-बलि चढ़ाने के लिए वेदियां निर्मित कीं, और यों अपने पूर्वजों के प्रभु परमेश्वर का क्रोध भड़काया।
26
आहाज के शेष कार्यों का विवरण, उसके आचरण का वर्णन आरम्भ से अन्त तक ‘यहूदा और इस्राएल प्रदेशों के राजाओं का इतिहास-ग्रन्थ’ में लिखा हुआ है।
27
तब आहाज अपने मृत पूर्वजों के साथ सो गया। उसको यरूशलेम नगर में गाड़ा गया; परन्तु उसका शव इस्राएल के राजाओं के कब्रिस्तान में नहीं दफनाया गया। उसका पुत्र हिजकियाह उसके स्थान पर राज्य करने लगा।
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