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Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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2 Samuel 13
2 Samuel 13
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
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1
इसके पश्चात् ये घटनाएँ घटीं: दाऊद के पुत्र अबशालोम की एक सुन्दर बहिन थी। उसका नाम तामार था। दाऊद का पुत्र अम्नोन उससे प्रेम करने लगा।
2
वह ऐसा मोहित हुआ कि वह अपनी सौतेली बहिन तामार के प्रेम में बीमार हो गया। तामार कुआंरी थी। अत: उसके साथ कुछ करना अम्नोन को असम्भव लगा।
3
अम्नोन का एक मित्र था। उसका नाम योनादब था। वह दाऊद के भाई शिमआह का पुत्र था। वह बड़ा धूर्त था।
4
उसने अम्नोन से कहा, ‘राजकुमार, आप दिन प्रतिदिन दुबले होते जा रहे हैं। क्यों? क्या आप मुझे नहीं बताएँगे?’ अम्नोन ने उससे कहा, ‘मैं अपने सौतेले भाई अबशालोम की बहिन तामार से प्रेम करता हूँ।’
5
योनादब ने उससे कहा, ‘आप अपने पलंग पर लेट जाइए और बीमार होने का बहाना कीजिए। जब आपके पिता आपको देखने के लिए आएँगे, तब आप उनसे यह कहना, “कृपाकर मेरी बहिन तामार को मेरे पास आने दीजिए। वह मुझे भोजन कराए। वह मेरी आँखों के सामने भोजन बनाए। मैं उसे देखता रहूँ और उसके हाथ से भोजन खाऊं।” ’
6
अत: अम्नोन पलंग पर लेट गया। उसने बीमार होने का बहाना किया। राजा दाऊद उसे देखने के लिए आया। अम्नोन ने राजा से कहा, ‘कृपाकर, मेरी बहिन तामार को मेरे पास आने दीजिए। वह मेरी आँखों के सामने दो रोटी बनाए और मुझे अपने हाथ से भोजन खिलाए।’
7
अत: दाऊद ने महल में तामार के पास यह आदेश भेजा, ‘अपने भाई अम्नोन के महल में जाओ। वहाँ उसके लिए भोजन तैयार करना।’
8
अत: तामार अपने भाई अम्नोन के महल में गई। वह पलंग पर लेटा हुआ था। तामार ने आटा लिया और उसको गूंधा। तब उसने अम्नोन की आँखों के सामने रोटियाँ बनाईं।
9
उसने थाली ली, और उसके सम्मुख भोजन परोसा। किन्तु अम्नोन ने खाने से इन्कार कर दिया। अम्नोन ने आदेश दिया, ‘मेरे पास से सब लोगों को कमरे से बाहर निकाल दो।’ अत: उसके पास से सब लोग बाहर चले गए।
10
अम्नोन ने तामार से कहा, ‘भोजन मेरे कमरे में ला। मैं तेरे हाथ से भोजन खाऊंगा।’ तामार रोटियाँ लेकर अपने भाई अम्नोन के कमरे में आई।
11
वह उसके पलंग के समीप रोटियाँ ले गई कि वह उनको खाए। किन्तु उसने तामार को पकड़ लिया। उसने तामार से कहा, ‘बहिन, मेरे पास सो।’
12
तामार ने उससे कहा, ‘मेरे भाई, मेरे साथ बलात्कार मत कर। ऐसा काम इस्राएली राष्ट्र में कभी किसी ने नहीं किया। यह मूर्खतापूर्ण कार्य मत कर।
13
मैं अपना काला मुँह लेकर कहाँ जाऊंगी? तू इस्राएली राष्ट्र में मूर्ख व्यक्ति माना जाएगा। तू कृपाकर, महाराज से बात कर। वह मुझे तेरे हाथ में सौंपना अस्वीकार नहीं करेंगे।’
14
परन्तु अम्नोन ने तामार की बात नहीं सुनी। वह तामार से बलिष्ठ था। अत: उसने तामार को विवश कर उसके साथ बलात्कार किया।
15
इसके बाद अम्नोन को तामार से अत्यधिक घृणा हो गई। जितना वह पहले तामार से प्रेम करता था, उससे अधिक घृणा अब उससे हो गई। अम्नोन ने उससे कहा, ‘उठ और यहाँ से जा।’
16
वह उससे बोली, ‘नहीं मेरे भाई, मुझे मत भेज। जो कुकर्म तूने पहले मेरे साथ किया है, उससे बड़ा कुकर्म यह है कि मुझे निकाल रहा है।’ किन्तु उसने तामार की बात नहीं सुनी।
17
उसने अपनी सेवा में तैनात सेवक को बुलाया। उसने उसे यह आदेश दिया, ‘मेरे पास से इस औरत को बाहर निकाल दो। इसे निकालने के बाद दरवाजे में चिटकनी लगा देना।’
18
तामार बाहोंवाला लम्बा कुरता पहिने हुए थी। पुराने समय में कुँआरी राजकन्याएँ ऐसी ही पोशाक पहिनती थीं। सेवा में तैनात सेवक ने तामार को बाहर निकाल दिया। उसने उसे निकालने के बाद दरवाजे में चिटकनी लगा दी।
19
तब तामार ने शोक प्रकट करने के लिए अपने सिर पर राख डाली। अपना बाहोंवाला कुरता, जिसको वह पहिने हुए थी, फाड़ दिया। उसने अपना हाथ सिर पर रखा, और उच्च स्वर में रोती हुई चली गई।
20
तामार के भाई अबशालोम ने उससे पूछा, ‘क्या तेरा सौतेला भाई अम्नोन तेरे साथ रहा है? मेरी बहिन, अब चुप हो जा। वह तेरा भाई है। इस बात को हृदय में मत रख।’ पर तामार को सान्त्वना प्राप्त नहीं हुई। वह दु:खी परित्यक्ता स्त्री के समान अपने भाई अबशालोम के महल में रहने लगी।
21
राजा दाऊद ने ये बातें सुनीं। वह अत्यन्त क्रुद्ध हुआ। किन्तु उसने अपने पुत्र अम्नोन को दण्ड नहीं दिया। अम्नोन उसका ज्येष्ठ पुत्र था, और दाऊद उससे प्रेम करता था।
22
अबशालोम ने भी अम्नोन से भला-बुरा कुछ नहीं कहा। पर वह अम्नोन से घृणा करने लगा; क्योंकि अम्नोन ने उसकी बहिन तामार से बलात्कार किया था।
23
दो वर्ष के बाद यह घटना घटी: अबशालोम ने एफ्रइम प्रदेश के निकट बअल-हासोर पहाड़ी क्षेत्र में भेड़ों का ऊन काटा। उसने सब राजकुमारों को निमन्त्रण दिया।
24
वह राजा दाऊद के पास आया। उसने कहा, ‘महाराज, मैंने, आपके सेवक ने, भेड़ों का ऊन काटा है। अत: कृपाकर, महाराज, आप और आपके समस्त दरबारी इस सेवक के साथ चलें।’
25
परन्तु राजा दाऊद ने अबशालोम से यह कहा, ‘नहीं, मेरे पुत्र, हम सब नहीं जाएँगे। अन्यथा हम तेरे लिए भार बन जाएँगे।’ अबशालोम ने उससे आग्रह किया। परन्तु दाऊद ने जाने से इन्कार कर दिया। फिर भी उसने उसे आशीर्वाद दिया।
26
तब अबशालोम ने कहा, ‘यदि आप नहीं आएँगे तो, कृपाकर, मेरे भाई अम्नोन को हमारे साथ जाने दीजिए।’ राजा दाऊद ने उससे कहा, ‘उसे तेरे साथ क्यों जाना चाहिए?’
27
किन्तु अबशालोम ने उस पर दबाव डाला। अत: उसने अम्नोन तथा अन्य राजकुमारों को उसके साथ भेज दिया।
28
अबशालोम ने राजभोज तैयार किया। उसने अपने सेवकों को यह आदेश दिया, ‘ध्यान से मेरी बात सुनो। जब अम्नोन शराब पीकर मदहोश हो जाएगा, और जब मैं तुम से यह कहूँगा: “अम्नोन पर वार करो,” तब तुम उसे मार डालना। मत डरना। मैंने तुम्हें इस बात का आदेश दिया है। साहसी बनो! शूरवीर बनो!’
29
जैसा आदेश अबशालोम ने अपने सेवकों को दिया था, उन्होंने अम्नोन के साथ वैसा ही किया। अन्य राजकुमार भोज से उठे। वे अपने-अपने खच्चर पर सवार हुए और भाग गए।
30
जब राजकुमार मार्ग में थे तब यह उड़ती खबर दाऊद तक पहुँची: ‘अबशालोम ने सब राजकुमारों को मार डाला है। एक भी राजकुमार नहीं बचा।’
31
राजा दाऊद तुरन्त उठा। उसने शोक प्रकट करने के लिए अपने वस्त्र फाड़े। वह भूमि पर लेट गया। उसके साथ सब दरबारियों ने भी अपने वस्त्र फाड़े।
32
दाऊद के भाई शिमआह के पुत्र योनादब ने कहा, ‘मेरे स्वामी यह न सोचें कि उन्होंने सब राजकुमारों को मार डाला है। महाराज, केवल अम्नोन ही मारे गए हैं। जिस दिन अम्नोन ने अबशालोम की बहिन तामार से बलात्कार किया था, उसी दिन से अबशालोम की आज्ञा से इस बात का निश्चय कर लिया गया था।
33
इसलिए अब महाराज मेरे स्वामी, अपने हृदय में यह बात न रखें कि सब राजकुमार मारे गए हैं। केवल अम्नोन ही मारे गए हैं।’
34
अबशालोम भाग गया। पहरे पर तैनात प्रहरी ने आँख उठाकर ऊपर देखा। उसने यह देखा कि एक विशाल समुदाय होरोनइम मार्ग से पहाड़ की ढाल पर उतर रहा है। प्रहरी राजा के पास आया। उसने राजा को यह बताया। उसने कहा, ‘महाराज, मैंने लोगों को होरोनइम मार्ग से पहाड़ की ढाल पर उतरते हुए देखा है।’
35
योनादब ने राजा से यह कहा, ‘महाराज, आपके सेवक ने जैसा कहा था वैसा ही हुआ। देखिए, राजकुमार आ गए।’
36
अभी उसकी बात समाप्त नहीं हुई थी कि राजकुमार आ गए। वे जोर-जोर से रोने लगे। राजा और उसके दरबारी भी फूट-फूट कर रोने लगे।
37
अबशालोम भाग कर गशूर के राजा अम्मीहूद के पुत्र तलमइ के पास चला गया। दाऊद अपने पुत्र के लिए दिन-प्रतिदिन शोक मनाता रहा।
38
अबशालोम गशूर में तीन वर्ष तक रहा।
39
दाऊद अबशालोम के पास जाने के लिए विकल था। अम्नोन की मृत्यु से उत्पन्न उसका दु:ख अब शान्त हो गया था।
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