bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Hindi
/
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
/
Job 41
Job 41
Hindi Bible CLBSI 2015 (पवित्र बाइबिल CL Bible (BSI))
← Chapter 40
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 37
Chapter 38
Chapter 39
Chapter 40
Chapter 41
Chapter 42
Chapter 42 →
1
‘क्या तू समुद्र-राक्षस लिव्यातान को अथवा मगरमच्छ को बंसी के काँटे से फँसाकर खींच सकता है? या रस्सी से उसकी जीभ बाँध सकता है?
2
क्या तू उसकी नाक में नकेल लगा सकता है; या काँटे से उसका जबड़ा छेद सकता है?
3
क्या वह अपने प्राण बचाने के लिए तुझसे अनुनय-विनय करेगा; अथवा तुझसे मीठी बातें बोलेगा?
4
क्या वह तेरे साथ सन्धि करेगा जिससे तू उसको आजीवन अपना सेवक बनाए?
5
जैसे तू पक्षी से खेलता है क्या वैसे ही तू उससे खेल सकता है? अथवा अपनी पुत्रियों का दिल बहलाने के लिए उसको बाँध कर रख सकता है?
6
क्या मछुए उसकी बिक्री कर सकते हैं? क्या व्यापारी आपस में उसको बाँट सकते हैं?
7
क्या तू उसका चमड़ा बरछी से बेध सकता है; अथवा मछुए के त्रिशूलों से क्या तू उसका सिर फोड़ सकता है?
8
तुझमें हिम्मत है तो उसको हाथ लगा! यह लड़ाई तुझे सदा याद रहेगी! फिर कभी ऐसा करने का साहस तुझे न होगा।
9
निस्सन्देह मगरमच्छ को पकड़ने की आस मात्र दुराशा है; मनुष्य उसके दर्शन मात्र से मुँह के बल गिर पड़ता है।
10
मनुष्य इतना दुस्साहसी नहीं है कि वह उसको भड़काए? तब कौन मनुष्य मेरे सामने खड़ा हो सकता है?
11
क्या कभी किसी मनुष्य ने मुझे उधार दिया है कि मैं उसको लौटाऊं? आकाश के नीचे की सम्पूर्ण पृथ्वी मेरी ही है।
12
‘मैं उसके शरीर के अंगों के विषय में कुछ न छिपाऊंगा, उसकी महाशक्ति और शरीर की सुन्दर बनावट के विषय में तुझे बताऊंगा।
13
क्या कोई मनुष्य उसकी ऊपरी चमड़ी को उतार सकता है? उसके दुहरे चर्म-कवच को कौन बेध सकता है?
14
क्या कोई मनुष्य उसके जबड़े खोल सकता है? उसके दाँतों के चारों ओर आतंक रहता है।
15
उसकी पीठ ढाल-समूहों की बनी है; मानो उनको मुहर से बन्द कर दिया गया है।
16
वे एक-दूसरे से ऐसे जुड़े हुए हैं, कि उनके बीच से वायु भी नहीं गुजर सकती।
17
वे आपस में मिले हुए हैं, वे आपस में सटे हुए हैं, कि वे अलग-अलग नहीं किए जा सकते हैं।
18
उसकी छींक से प्रकाश चमक उठता है; उसकी आँखें ऊषा की तरह ज्योतिर्मय होती हैं।
19
उसके मुँह से अग्नि शिखाएँ निकलती हैं, उसके मुँह से आग की चिन्गारियाँ छूटती हैं।
20
जैसे खौलती हुई हांडी से, जलते हुए नरकटों से धुआं निकलता है वैसे ही उसके नथुनों से निकलता है।
21
उसकी सांस से कोयले सुलग जाते हैं, उसके मुँह से आग की ज्वाला निकलती है।
22
उसकी गर्दन में शक्ति का निवास है; उसके सामने आतंक नाचता है।
23
उसके मांस की परतें परस्पर जुड़ी हैं, वे मजबूती से सटी हैं, और नहीं हिलतीं।
24
उसका दिल पत्थर की तरह कड़ा है; वह चक्की के निचले पाट के समान मजबूत है।
25
जब वह उठता है तब शक्तिशाली पुरुष भी डर जाते हैं; उसको देखकर उनके होश उड़ जाते हैं।
26
उस पर तलवार से वार करने पर भी उस पर असर नहीं होता; न भाले का, न बर्छी का और न सांग का।
27
वह लोहे को तिनका समझता है, और पीतल को सड़ी लकड़ी।
28
तीर से वह भागता नहीं; गोफन से फेंके गए पत्थर उसे भूसे जैसे लगते हैं।
29
लाठियों की मार भी उसको फूल जैसी लगती है; वह सांग के वार पर हँसता है।
30
उसके शरीर के निचले भाग पैनी ठिकरियों के समान हैं; वह कीचड़ पर मानो हेंगा फेरता है।
31
वह गहरे समुद्र को हांडी के जल के समान मथता है; वह नील नदी को काढ़े के समान बना देता है।
32
वह अपने पीछे एक चमकीली लीक छोड़ जाता है; जिसके कारण सागर सफेद दिखाई देता है।
33
उसके समान निडर प्राणी पृथ्वी पर दूसरा कोई नहीं है।
34
वह बड़े से बड़े प्राणी का निर्भयता से सामना करता है; वह समस्त महाशक्तिशाली प्राणियों का राजा है।’
← Chapter 40
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 7
Chapter 8
Chapter 9
Chapter 10
Chapter 11
Chapter 12
Chapter 13
Chapter 14
Chapter 15
Chapter 16
Chapter 17
Chapter 18
Chapter 19
Chapter 20
Chapter 21
Chapter 22
Chapter 23
Chapter 24
Chapter 25
Chapter 26
Chapter 27
Chapter 28
Chapter 29
Chapter 30
Chapter 31
Chapter 32
Chapter 33
Chapter 34
Chapter 35
Chapter 36
Chapter 37
Chapter 38
Chapter 39
Chapter 40
Chapter 41
Chapter 42
Chapter 42 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6
7
8
9
10
11
12
13
14
15
16
17
18
19
20
21
22
23
24
25
26
27
28
29
30
31
32
33
34
35
36
37
38
39
40
41
42