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1 Corinthians 10
1 Corinthians 10
Hindi HSB 2023 (नवीन हिंदी बाइबल)
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1
हे भाइयो, मैं नहीं चाहता कि तुम इस बात से अनजान रहो कि हमारे सब पूर्वज बादल के नीचे थे, और सब के सब समुद्र के बीच से पार हुए।
2
और सब ने बादल में और समुद्र में मूसा का बपतिस्मा लिया।
3
सब ने एक ही आत्मिक भोजन किया,
4
और सब ने एक ही आत्मिक जल पीया; क्योंकि वे उस आत्मिक चट्टान से पीते थे जो उनके साथ-साथ चलती थी, और वह चट्टान मसीह था।
5
परंतु परमेश्वर उनमें से अधिकांश से प्रसन्न न हुआ, और वे जंगल में ही ढेर हो गए।
6
अब ये बातें हमारे लिए उदाहरण बनीं कि हम बुरी बातों की लालसा न करें, जैसे कि उन्होंने की थी।
7
तुम मूर्तिपूजक न बनो जैसे कि उनमें से कुछ थे; जैसा लिखा है: लोग बैठे तो खाने-पीने के लिए, और उठे तो नाचने-कूदने के लिए।
8
न ही हम व्यभिचार करें, जैसे कि उनमें से कितनों ने किया, और एक दिन में तेईस हज़ार मर गए;
9
न ही हम मसीह को परखें, जैसे कि उनमें से कितनों ने परखा और साँपों के द्वारा नष्ट किए गए।
10
न ही तुम कुड़कुड़ाओ, जैसे उनमें से कितने कुड़कुड़ाए और नष्ट करनेवाले के द्वारा नष्ट किए गए।
11
अब ये बातें जो उनके साथ घटीं उदाहरण के रूप में थीं, और ये हमारी चेतावनी के लिए लिखी गईं, जो युग के अंतिम समय में आ पहुँचे हैं।
12
अतः जो सोचता है कि वह स्थिर है, वह सावधान रहे कि कहीं गिर न पड़े।
13
तुम किसी ऐसी परीक्षा में नहीं पड़े हो जो मनुष्य के सहने से बाहर है। परमेश्वर विश्वासयोग्य है और वह तुम्हें सामर्थ्य से बाहर परीक्षा में पड़ने नहीं देगा, बल्कि परीक्षा के साथ-साथ बचने का उपाय भी करेगा कि तुम उसे सह सको।
14
इस कारण, हे मेरे प्रियो, मूर्तिपूजा से भागो।
15
मैं तुम्हें बुद्धिमान समझकर कह रहा हूँ: जो मैं कहता हूँ उसे तुम परखो।
16
धन्यवाद का वह कटोरा जिसके लिए हम धन्यवाद देते हैं, क्या मसीह के लहू की सहभागिता नहीं? वह रोटी जिसे हम तोड़ते हैं, क्या मसीह की देह की सहभागिता नहीं?
17
रोटी एक ही है इसलिए हम भी जो बहुत हैं, एक देह हैं; क्योंकि हम सब उसी एक रोटी में भागी होते हैं।
18
शारीरिक रूप से जो इस्राएली हैं उनको देखो: क्या बलिदानों को खानेवाले वेदी के सहभागी नहीं?
19
मेरे कहने का अर्थ क्या है? क्या मूर्ति को चढ़ाया हुआ बलिदान कुछ है? क्या मूर्ति कुछ है?
20
नहीं! पर जो बलिदान वे चढ़ाते हैं, उन्हें परमेश्वर को नहीं बल्कि दुष्टात्माओं को चढ़ाते हैं, और मैं नहीं चाहता कि तुम दुष्टात्माओं के सहभागी बनो।
21
तुम प्रभु के कटोरे और दुष्टात्माओं के कटोरे दोनों में से नहीं पी सकते। तुम प्रभु की मेज़ और दुष्टात्माओं की मेज़ दोनों में सहभागी नहीं हो सकते।
22
क्या हम प्रभु को क्रोध दिलाते हैं? क्या हम उससे अधिक शक्तिशाली हैं?
23
सब वस्तुएँ उचित तो हैं, परंतु सब वस्तुएँ लाभ की नहीं। सब वस्तुएँ उचित तो हैं, परंतु सब वस्तुओं से उन्नति नहीं होती।
24
कोई अपने ही नहीं, बल्कि दूसरों के हित को भी खोजे।
25
मांस-बाज़ार में जो कुछ भी बिकता है, उसे विवेक में प्रश्न किए बिना खा लो;
26
क्योंकि पृथ्वी और जो कुछ उसमें है सब प्रभु का है।
27
यदि अविश्वासियों में से कोई तुम्हें आमंत्रित करता है, और तुम जाना चाहते हो तो विवेक में प्रश्न किए बिना वह सब खा लो जो तुम्हारे सामने परोसा गया है।
28
परंतु यदि कोई तुमसे कहे, “यह मूर्ति को चढ़ाया हुआ भोजन है!” तो तुम उस बतानेवाले और विवेक के कारण न खाओ ।
29
मेरा तात्पर्य तुम्हारे विवेक से नहीं बल्कि दूसरे व्यक्ति के विवेक से है। मेरी स्वतंत्रता भला दूसरे के विवेक से क्यों परखी जाए?
30
यदि मैं धन्यवाद करके भोजन में सहभागी होता हूँ, तो जिसके लिए मैं धन्यवाद करता हूँ, उसके कारण मेरी निंदा क्यों की जाती है?
31
इसलिए चाहे तुम खाओ या पीओ, या जो कुछ भी करो, सब परमेश्वर की महिमा के लिए करो।
32
तुम न तो यहूदियों, न यूनानियों और न ही परमेश्वर की कलीसिया के लिए ठोकर का कारण बनो;
33
ठीक वैसे ही जैसे मैं भी सब बातों में सब मनुष्यों को प्रसन्न रखता हूँ, और अपना नहीं बल्कि बहुतों का लाभ ढूँढ़ता हूँ कि वे उद्धार पाएँ।
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