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Jeremiah 7
Chhattisgarhi
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1
यहोवा कोति ले ये बचन यरमियाह करा आईस:
2
“यहोवा के घर के दुवार म ठाढ़ हो जा अऊ उहां ये संदेस के घोसना कर: “ ‘हे यहूदा के जम्मो मनखेमन, जऊन मन यहोवा के अराधना करे बर ये दुवारमन ले आथव, यहोवा के ये बचन ला सुनव।
3
सर्वसक्तिमान यहोवा, इसरायल के परमेसर ह ये कहत हे: अपन चालचलन अऊ अपन काममन ला सुधारव, तब मेंह तुमन ला ये जगह म रहे बर दूहूं।
4
धोखा देवइया बचन म भरोसा करके ये झन कहव, “येह यहोवा के मंदिर अय, यहोवा के मंदिर, यहोवा के मंदिर!”
5
यदि तुमन सही म अपन चालचलन अऊ काममन ला बदलथव अऊ एक-दूसर के संग सही बरताव करथव,
6
यदि तुमन परदेसी, अनाथ या बिधवा ऊपर अतियाचार नइं करव अऊ ये जगह म निरदोस के हतिया नइं करव, अऊ यदि अपन खुद के हानि करे बर आने देवतामन के पाछू नइं चलव,
7
त मेंह तुमन ला ये जगह म, ये देस म रहे बर दूहूं, जऊन ला कि मेंह तुम्हर पुरखामन ला सदाकाल बर दे हवंव।
8
पर देखव, तुमन ओ धोखा देवइया बचन ऊपर भरोसा करत हव, जेकर कोनो मतलब नइं ए।
9
“ ‘का तुमन चोरी अऊ हतिया करहू, बेभिचार अऊ लबारी गवाही दूहू, बाल देवता बर धूप जलाहू अऊ आने देवतामन के पाछू चलहू, जेमन ला तुमन नइं जानव,
10
अऊ तब ये घर, जऊन म कि मोर नांव हवय, तुमन येमा आके मोर आघू म ठाढ़ होहू अऊ ये कहिहू, “हमन सुरकछित हवन”—ये जम्मो घिनौना काम करे बर सुरकछित हवन?
11
ये घर, जेमा मोर नांव हवय, का येह तुम्हर बर डाकूमन के गुफा हो गे हवय? पर मेंह देखत आवत हंव! यहोवा ह घोसना करत हे।
12
“ ‘अब सीलो नगर म ओ जगह म जावव, जिहां पहिली मेंह मोर नांव बर एक निवास बनाय रहेंव, अऊ देखव कि मेंह अपन मनखे इसरायल के दुस्टता के कारन ओ निवास के का दसा कर दे हंव।
13
यहोवा ह घोसना करत हे, जब तुमन ये जम्मो काम करत रहेव, त मेंह तुमन ला बार-बार कहेंव, पर तुमन नइं सुनेव; मेंह तुमन ला बलांय, पर तुमन जबाब नइं देव।
14
एकरसेति ये घर, जेमा मोर नांव हवय, ये मंदिर, जेमा तुमन भरोसा करथव, ये जगह, जेला मेंह तुमन ला अऊ तुम्हर पुरखामन ला देय रहेंव, येकर दसा घलो मेंह सीलो के सहीं कर दूहूं।
15
जइसने कि मेंह तुम्हर जम्मो संगी इसरायली, एपरैम के मनखेमन संग करे रहेंव, वइसने ही मेंह तुमन ला अपन आघू ले धक्का देके निकाल दूहूं।’
16
“एकरसेति ये मनखेमन बर तेंह पराथना झन कर अऊ न ही येमन बर कोनो बिनती या निबेदन कर; मोर करा येमन के तरफ ले झन गोठिया, काबरकि मेंह तोर बात ला नइं सुनंव।
17
का तेंह नइं देखत हस कि ये मनखेमन यहूदा के नगरमन म अऊ यरूसलेम के गलीमन म का करत हवंय?
18
लइकामन कठवा संकेलथें, ददामन आगी सुलगाथें, अऊ माईलोगनमन पीसान गुंथके स्वरग के रानी ला चघाय बर रोटी बनाथें। ओमन मोर गुस्सा ला भड़काय बर आने देवतामन बर पेय-बलिदान देथें।
19
पर का ओमन मोला ही भड़कावथें? यहोवा ह घोसना करत हे। का ओमन बेसरम होके अपनआप के ही हानि नइं करत हें?
20
“ ‘एकरसेति परमपरधान यहोवा ह ये कहत हे: मोर गुस्सा अऊ मोर कोप ह ये जगह के ऊपर भड़कही—मनखे अऊ पसु ऊपर, मैदान के रूखमन ऊपर अऊ तुम्हर भुइयां के फसल ऊपर—अऊ ये गुस्सा अऊ कोप के आगी ह जलते रहिही अऊ नइं बुताही।
21
“ ‘सर्वसक्तिमान यहोवा, इसरायल के परमेसर ह ये कहत हे: जावव अऊ अपन होम-बलिदानमन ला अपन आने बलिदानमन संग मिलावव अऊ मांस ला खुद खावव!
22
काबरकि जब मेंह तुम्हर पुरखामन ला मिसर देस ले बाहिर लानेंव अऊ ओमन ले बात करेंव, त मेंह ओमन ला होम-बलिदान अऊ बलिदानमन के बारे म हुकूम नइं दे रहेंव,
23
पर मेंह ओमन ला ये हुकूम देय रहेंव: मोर बात ला मानव, तब मेंह तुम्हर परमेसर होहूं अऊ तुमन मोर मनखे होहू। मोर दिये गय जम्मो हुकूम के पालन करव, ताकि तुम्हर भलई होवय।
24
पर ओमन मोर बात ला नइं सुनिन अऊ धियान नइं दीन; येकर बदले, ओमन अपन दुस्ट हिरदय के जिद्दी सुभाव म चलिन। ओमन पाछू हट गीन अऊ आघू नइं बढ़िन।
25
जऊन समय ले तुम्हर पुरखामन मिसर देस ला छोंड़िन, बार-बार मेंह अपन सेवक अगमजानीमन ला तुम्हर करा पठोंय।
26
पर ओमन मोर बात ला नइं सुनिन अऊ धियान नइं दीन। ओमन हठी रिहिन अऊ अपन पुरखामन ले बढ़के दुस्ट काम करिन।’
27
“जब तेंह ओमन ला ये जम्मो बात बताबे, त ओमन तोर बात ला नइं सुनहीं; जब तेंह ओमन ला बलाबे, त ओमन जबाब नइं दीहीं।
28
एकरसेति ओमन ले कह, ‘येह ओ जाति ए, जऊन ह यहोवा अपन परमेसर के बात ला नइं माने हे या अपन गलत काममन ला नइं छोंड़े हे। सच्चई ह मर गे हवय; येह ओमन के मुहूं ले गायब हो गे हवय।
29
“ ‘अपन चुंदी ला काट अऊ दूरिहा म फटिक दे; बंजर टीला म चघके बिलाप कर, काबरकि यहोवा ह ये पीढ़ी के मनखेमन ला अस्वीकार करे हवय, ओमन ला तियाग दे हवय; ओमन ओकर कोप के भागी अंय।
30
“ ‘यहूदा के मनखेमन मोर नजर म दुस्ट काम करे हवंय, यहोवा ह घोसना करत हे। ओमन ओ घर म घिनौना मूरतीमन ला रखे हवंय, जेमा मोर नांव हवय; अइसने करके ओमन ओ घर ला असुध कर दे हवंय।
31
ओमन बेन-हिन्नोम के घाटी म अपन बेटा अऊ बेटीमन ला आगी म जलाय बर तोपेत के ऊंचहा जगहमन ला बनाय हवंय—जेकर हुकूम मेंह कभू नइं दे रहेंव अऊ न ही ये बात कभू मोर मन म आईस।
32
एकरसेति सचेत रहव, ओ दिनमन आवत हें, यहोवा ह ये घोसना करत हे, जब मनखेमन येला तोपेत या बेन-हिन्नोम के घाटी नइं कहिहीं, पर येला हतिया के घाटी कहिहीं, काबरकि ओमन तोपेत म अतेक मनखेमन ला माटी दीहीं कि उहां जगह ही नइं बचही।
33
तब ये मनखेमन के लासमन चिरई अऊ जंगली पसुमन के जेवन होहीं, अऊ ओमन ला भगानेवाला कोनो नइं होहीं।
34
मेंह यहूदा के नगरमन म अऊ यरूसलेम के गलीमन म आनंद अऊ खुसी के अवाज अऊ दूल्हा अऊ दुलहिन के अवाज ला खतम कर दूहूं, काबरकि देस ह उजाड़ हो जाही।
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