bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Garhwali
/
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
/
1 Timothy 3
1 Timothy 3
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
← Chapter 2
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 4 →
1
या बात सच च कि जु कुई आदिम मण्डलि मा अध्यक्ष बनण चौ, त उ अच्छा काम कने मनसा रखो।
2
इलै जरूरी च, कि अध्यक्षों तैं निर्दोष हूंण चयणु च, अर वेकी एक ही जनन हो, अर सब्र रखण वलो, समझदार, इज्जतदार, अर खातिरदारि कन वलो, अर पिता परमेश्वर का वचन तैं सिखांण म निपुण हो।
3
उ एक शराबी आदिम नि हो जु हमेशा लड़ै कनु रौ; झगड़ा कन वलो आदिम नि हो, उ दयालु, धीरज रखण वलो अर शांत स्वभाव कु हो, अर धन कु लोभि नि हो।
4
वे तैं अपड़ा परिवार कु मार्गदर्शन कन मा सक्षम हूंण चयणु च, अर उ अपड़ा बाल-बच्चों तैं सिखांण चयणु च कि उ हर बात मा वेकी आज्ञाओं कु पालन कैरो।
5
किलैकि जब कुई अपड़ा ही परिवार कु प्रबंध कन नि जंणदु हो, त उ पिता परमेश्वर कि मण्डलि कि देख-भाल कनके करलो?
6
फिर यु भि कि उ नयो-नयो विश्वासी चेला नि बणयुं हो, कखि इन नि हो कि उ घमंड कैरी कै उन ही दंड पां जन शैतान तैं दण्ड मिली छो।
7
अर उ मण्डलि का भैर वलो का बीच भि अच्छो अर इज्जतदार आदिम हो, कि वेकी बदनामी नि हो, अर उ शैतान का जाल मा नि फसिं जौं।
8
उन ही अध्यक्षों जन, मंडलि का सेवक लुखुं तैं भि गम्भीर अर इज्जतदार हूंण चयणु च, उ दुबंगला, दाखमधु पीण वला, अर ऊं तैं इन्दरो आदिम नि हूंण चयणु च जु रूपया पांणु कु कुछ भि कैरो।
9
ऊंमा एक साफ सुथरी सुचणै की क्षमता हो ज्वा विश्वास कन मा अर पिता परमेश्वर की ज्वा शिक्षा दीं च ऊं तैं सच मंणुन।
10
जब मंडलि का सेवक चुणै जा, त पैली ऊं तैं यु साबित कन द्या कि ऊंका भितर अच्छा गुण छिनी, जु वेमा कुई भि गलती नि हो त उ सेवक को काम कैरो।
11
इन ही कै सेवकों की जनन तैं भि गम्भीर हूंण चयणु च; कै पर भंगार लगौंण वलि नि हूंनु, पर चौकस अर सभि बातों मा विश्वास का लैख हूंनु।
12
सेवक लोग एक ही जनन का वफादार आदिम हूंनु, अर अपड़ा बाल-बच्चों कु अर अपड़ा परिवार का सभि लुखुं को अच्छो प्रबंध कन जंणदा हूंनु।
13
किलैकि जु सेवक कु काम तैं ठिक ढंग से कैरी सकदींनि, उ लुखुं बट्टी अफ कु अच्छी जगह अर उ मसीह यीशु पर विश्वास मा बड़ो साहस पौदींनि।
14
मि त्वे मा जल्दी औंणै कि आस रखण का बावजूद भि त्वे कु यूं बातों तैं इलै लिखणु छौं,
15
कि जु मेरा औंण मा देर हवे जौं त तु इन जांणि जै कि परमेश्वर का कुटुंब जु कि ज्यूंदा परमेश्वर कि मण्डलि च, अर यु विश्वासी उन ही सच्ची शिक्षाओं का समर्थन करदींनि अर ऊं तैं बणै रखदींनि जन नींव अर खम्बा कै घौर तैं सहारा दींद अर वे तैं मजबूत करदींनि।
16
यां मा कुई शक नीच कि भक्ति कु भेद गैरु-गम्भीर च, मसीह जु मनिख का रूप मा प्रकट हवे, पवित्र आत्मा का द्वारा पिता परमेश्वर का नौंनो का रूप मा साबित किये गै, स्वर्गदूतों तैं दिखै गै अन्य-जातियों का लुखुं ल देश-देश मा वेको प्रचार कैरी, दुनिया भर का लुखुं ल वे पर विश्वास कैरी अर महिमा का दगड़ा वे तैं मथि स्वर्ग मा उठै गै।
← Chapter 2
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 4 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6