bible
ra
🌐 Language
English
Español
Français
Deutsch
Português
Italiano
Nederlands
Русский
中文
日本語
한국어
العربية
Türkçe
Tiếng Việt
ไทย
Indonesia
All Languages
Home
/
Garhwali
/
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
/
1 Timothy 5
1 Timothy 5
Garhwali (GHMNT) (गढवली नयो नियम) 2020
← Chapter 4
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 6 →
1
अफ से बड़ा आदिम तैं अपमान का दगड़ी नि डांट; बल्कि वे तैं बड़ा आदर का दगड़ी सलाह दे, जन कि उ तेरु अपड़ो बुबा हो, अर अफ से छुटा आदमियों तैं, अपड़ा भयों जन सलाह दे।
2
त्वे तैं बुजुर्ग जननों तैं इन सलाह दींण चयणु च जन कि उ तेरी अपड़ी ब्वे हों, अर अफ बट्टी छुटी उम्र की जननों का दगड़ी उन ही बरतौ कैर, जन उ तेरी अपड़ी बैंण हों, अर इन शुद्ध मन से कैर।
3
ऊं विधवाओं का प्रति आदर दिखौ, जूं मा ऊंकी जरूरत पूरी कनु कु अर ऊं की देखभाल कनु कु कुई नि च।
4
अर जु कैं विधवा का बच्चा या नाति-नत्येण हूंनु, त ऊं तैं अपड़ा परिवार का सदस्यों की देखभाल कैरी के ईश्वरीय बरतौ कन सिखण चयणु च, अर अपड़ा ब्वे-बुबा कु हक दींण सिखुनु किलैकि यु परमेश्वर तैं अच्छो लगुदु।
5
ऊं विधवाओं का प्रति जूं मा ऊंकी जरूरत पूरी कनु कु अर ऊं की देखभाल कनु कु कुई नि च व भस पिता परमेश्वर पर आस रखदि अर दिन-रात बिनती अर प्रार्थना मा लगिं रौंदि
6
उ विधवा जु अपड़ा सैरो बगत सुख-सुविधाओं मा बितांदी, उ एक मुरयां मनिख जन च, जबकि व देह मा ज्यूंदी च, पर आत्मिक रूप मा मोरि गै।
7
तू विश्वासियों तैं यूं आज्ञाओं तैं दींद रौ ज्यां ल कुई भि ऊं पर भंगार नि लगौ।
8
पर जु कुई अपड़ा कुटुम्ब की, जरूरत पूरी नि कैरो, त उ अपड़ा विश्वास बट्टी भटकि गै, अर अविश्वासी बट्टी भि बुरो बण गै।
9
जब कुई विधवा साठ बरस बट्टी जादा हो, त तु वीं को नौं विधवाओं की सूची मा लिख द्ये, अर उ अपड़ा ही आदिम कि वफादार घरवलि हो,
10
भला काम कन मा सुनाम रै हो; जैल बच्चों कु अच्छो पालन-पोषण कैरी हो, अर विश्वासी भयों, कि खूब खातिरदारि कैरी हो, अर विश्वासी लुखुं की सेवा इन कैरी हो की जन व एक दासी हो, अर अपड़ा लुखुं की मदद कैरी हो जु लोग मुशीबतों मा छा, वीं ल हर ढंग से भला काम कनु कु अफ तैं समर्पित कैरी हो।
11
पर जवान विधवाओं को नौं सूची मा नि लिखीं, किलैकि जब उ शारीरिक इच्छाओं का जाल मा फंसि के मसीह बट्टी दूर हवे जंदींनि अर ब्यो कन चयदींनि
12
अर दुबरा ब्यो कैरी के, उ अपड़ा आप तैं भंगारी बंणौंदींनि किलैकि ऊंल अपड़ा पैला वादा तैं पूरा नि कैरी।
13
अर यांका दगड़ी-दगड़ी उ घौर-घौर रीटिके अलकसी हवे जंदींनि, अर भस अलकसी ही न, पर दुसरा लुखुं का बारा मा चुगली करदी अर और का कामों मा दखल दींदिनि, अर इन बात बुल्दींनि जु बुल्ण लैख नि हूंदींनि।
14
इलै मि इन चांदु कि जवान विधवा ब्यो कैरो अर बच्चों तैं जन्म दयूंनु अर घरबार संभलुन अर कै शैतान तैं बुरै कनु को मौका नि दयूंनु।
15
मि यु इलै बुल्णु छो किलैकि कुछ ल पैली बट्टी ही पिता परमेश्वर की आज्ञाओं तैं मनणु बंद कैरेले और उ विधवा उ कनी छिनी जु शैतान ऊं बट्टी करौंण चांद।
16
जु कै विश्वासी जनन का परिवार मा विधवा जनन छिनी, त व ही ऊंकी मदद कैरो, कि मण्डलि पर भार नि पोड़ु, ज्यां ल मण्डलि ऊं विधवाओं कि मदद कैरी साको जूंको सच मा कुई मदद कन वलो नि च।
17
मण्डलि का जु पुरणा अगुवा अच्छो प्रबंध करदींनि, खास कैरी कै ऊंको जु प्रचार अर शिक्षा दींण कु काम करदींनि, ऊंको दुगनो आदर करे जौं।
18
किलैकि, पिता परमेश्वर का वचन मा लिख्युं च, “जुत्यां बलदुं कु गिच्चो नि बन्ध्यां, इन ही एक मजदूर तैं भि वे तैं नियुक्त कन वला बट्टी मज़दूरी लींण कु अधिकार च।”
19
एक पुरणा अगुवा का विरोध मा पाप कना का भंगार तैं तब त नि सूंणि जब तक द्वी या तीन लोग वे पर एक ही बात कु भंगार नि लगा।
20
अपराध कन वलो तैं सभियूं का संमणी फटकार लगौ, कि और विश्वासी लोग भि अपराध कन से डरुनु।
21
पिता परमेश्वर, अर मसीह यीशु, अर चुणयां स्वर्गदूतों तैं गवाह जांणि के मि त्वे तैं चितौंणु छौं, कि जु कुछ भि तु करदी, खुला मन बट्टी यूं बातों तैं मांणा कैर, अर कुई भि काम पक्षपात नि कैरा कर।
22
कै पर जल्दी हथ रखि के, वे तैं अध्यक्ष नियुक्त नि कैर, अर जु तु इन करदी त वेका पापों मा जिम्मेदार बणदी; अर अनुचित बातों मा अफ तैं दूर रख।
23
भविष्य मा भस पांणि को ही पींण वलो नि रै, पर अपड़ा पुटगा कु अर बार-बार बिमार हूंणा का कारण जरा-जरा दाखमधु भि पिया कैर।
24
मि त्वे बट्टी बुल्णु छो कि अध्यक्षों की नियुक्ति मा जल्दीबाजी नि कैरा किलैकि कुछ लोग खुला रूप मा पाप करदींनि, अर न्याय हूंण से पैली उ विश्वासियों का संमणी भंगारी छिनी पर और लुखुं का पाप बाद मा दिखेदिंनि।
25
इन ही कै, जब अच्छा काम करदींनि, त यु अन्य विश्वासियों का द्वारा साफ-साफ दिखै ज्यन्दींनि, अर जु उ, ऊं तैं एक बार मा साफ ढंग से नि देख सकदींनि, त आखिर मा उ ऊं तैं जांणि ही ज्यन्दींनि।
← Chapter 4
Jump to:
Chapter 1
Chapter 2
Chapter 3
Chapter 4
Chapter 5
Chapter 6
Chapter 6 →
All chapters:
1
2
3
4
5
6